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मकर संक्रांति पर बलिया जिले के गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। गंगा स्नान के बाद तिल-गुड़ और तिलकुट का दान किया गया। वहीं बच्चों ने पतंगबाजी कर पर्व का आनंद लिया। उधर, गंगा घाटों से लौटने के बाद बच्चों और युवाओं ने पतंगबाजी का जमकर आनंद लिया।
आस्था की डुबकी
Baliya: कड़ाके की ठंड और सर्द हवाओं के बीच गुरुवार को बलिया जिले में मकर संक्रांति का पर्व पूरे श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। ब्रह्म मुहूर्त शुरू होते ही गंगा घाटों की ओर श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। हर-हर गंगे और सूर्य देव के जयकारों के बीच लोगों ने गंगा में आस्था की डुबकी लगाई। घाटों से लेकर घरों की छतों तक उत्सव का माहौल नजर आया। कहीं दान-पुण्य हो रहा था तो कहीं बच्चों की पतंगों से आसमान रंगीन दिख रहा था।
भोर से गंगा घाटों पर भारी भीड़
सुबह करीब चार बजे से ही श्रद्धालु चार पहिया वाहनों, बाइक, ई-रिक्शा और पैदल गंगा घाटों की ओर निकल पड़े। शिवरामपुर और माल्देपुर घाट पर सबसे ज्यादा भीड़ देखने को मिली। ठंडी हवाओं के बावजूद महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों की संख्या घाटों पर खास रही। स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।
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तिल-गुड़ और तिलकुट का दान
गंगा स्नान के बाद लोगों ने तीर्थ पुरोहितों और ब्राह्मणों को तिल, गुड़, तिलवा, तिलकुट, चिउरा, चावल, सब्जी और अन्य वस्तुओं का दान किया। मान्यता के अनुसार मकर संक्रांति पर किया गया दान विशेष पुण्य फल देता है। हुकुम छपरा गंगा घाट सहित जिले के सभी प्रमुख घाटों पर दान-पुण्य का सिलसिला दोपहर तक चलता रहा।
हर घाट पर आस्था का नजारा
हुकुम छपरा, पचरुखिया, गंगापुर, चौबे छपरा, सुघर छपरा, दूबे छपरा, गोपालपुर, नौरंगा, सतीघाट, शिवपुर, उजियार घाट, कोटवा नारायणपुर नागा घाट, नसीरपुर मठ गंगा तट, भरौली, गोविंदपुर, सोहांव, बड़का खेत पलिया खास, शाहपुर बभनौली, गंगहरा, इच्छा चौबे का पूरा, कोट अंजोरपुर, भिखारीपुर और मंझरिया गांव सहित तमाम इलाकों के श्रद्धालुओं ने गंगा में स्नान कर पुण्य अर्जित किया।
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पतंगों से सजा आसमान
उधर, गंगा घाटों से लौटने के बाद बच्चों और युवाओं ने पतंगबाजी का जमकर आनंद लिया। छतों पर दिनभर पतंग उड़ती रहीं और लोग दही-चिउड़ा खाकर पर्व का लुत्फ उठाते नजर आए। मकर संक्रांति का यह पर्व बलिया में आस्था, परंपरा और उल्लास का प्रतीक बन गया।