
महर्षि आश्रम की जमीन पर बनी बहुमंजिला इमारतें (सोर्स: सोशल मीडिया)
Noida: जब कोई अफसर जिस थाली में खाना खाए और उसी में छेद कर दे तो सिस्टम पर सवाल खड़े ही होंगे। नोएडा के सेक्टर-110 स्थित महर्षि आश्रम के पास सामने आया जमीन घोटाला अब प्रदेश के सबसे बड़े भूमि घोटालों में गिना जा रहा है। करोड़ों रुपये की सरकारी और आश्रम की जमीन पर भू-माफियाओं और कॉलोनाइजरों ने ऐसा खेल खेला कि प्राधिकरण के जिम्मेदार देखते रह गए। आरोप है कि करीब 200 करोड़ रुपये कीमत वाली जमीन पर अवैध कॉलोनियां बसाकर फ्लैट, विला और दुकानें बेच दी गई हैं। सबसे हैरानी की बात यह है कि पूरा खेल वर्षों तक चलता रहा, लेकिन जिम्मेदार विभाग सिर्फ नोटिस देकर चुप बैठा रहा। अब मामला ईडी तक पहुंच चुका है और जांच में लगातार बड़े खुलासे हो रहे हैं।
जानकारी के मुताबिक, सेक्टर-110 के पास महर्षि आश्रम के आसपास की जमीन पर कॉलोनाइजरों ने कब्जा कर अवैध निर्माण शुरू कर दिया था। देखते ही देखते यहां फ्लैट, विला और दुकानें बन गई हैं। बताया जा रहा है कि 39 खसरा नंबरों की जमीन पर यह पूरा अवैध निर्माण किया गया। बाजार में इस जमीन की कीमत करीब 200 करोड़ रुपये आंकी जा रही है। आरोप है कि कॉलोनाइजरों ने लोगों को मोटे मुनाफे का सपना दिखाकर भूखंड और फ्लैट बेच दिए।
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सबसे बड़ा सवाल नोएडा प्राधिकरण की भूमिका पर उठ रहा है। बताया जा रहा है कि अवैध निर्माण रोकने के लिए प्राधिकरण ने सिर्फ धारा-10 का नोटिस जारी किया और फिर कार्रवाई ठंडे बस्ते में डाल दी। करीब आठ महीने पहले अधिकारियों की नींद टूटी तो मौके पर पहुंचकर कुछ अवैध निर्माण हटाए गए। जांच में 44 कॉलोनाइजरों के नाम सामने आए, जिनके खिलाफ अलग-अलग थानों में केस दर्ज कराए गए हैं।
सूत्रों के मुताबिक, ईडी ने अब पूरे मामले की जांच तेज कर दी है। प्राधिकरण से जमीन से जुड़े सभी दस्तावेज मांगे गए हैं। जांच में यह भी सामने आया है कि महर्षि आश्रम की करीब 200 बीघा जमीन फर्जी ट्रस्ट बनाकर बेची गई। जिन लोगों ने यह जमीन खरीदी, उन्होंने वहां मकान, दुकान, फ्लैट और विला तक बना लिए। अब जांच पूरी होने के बाद पुराने बैनामे रद्द किए जा सकते हैं।
अगर जमीन के बैनामे रद्द हुए तो सबसे बड़ा नुकसान उन लोगों को होगा जिन्होंने अपनी जिंदगी की जमा पूंजी लगाकर यहां घर और दुकानें खरीदी हैं। राजस्व रिकॉर्ड में जमीन दोबारा महर्षि आश्रम के नाम दर्ज हो सकती है। ऐसे में लोगों का मालिकाना हक खत्म हो जाएगा और उन्हें संपत्ति खाली करनी पड़ सकती है। फिलहाल भू-माफिया और कॉलोनाइजर भूमिगत बताए जा रहे हैं, जबकि खरीदारों के सिर पर बड़ा संकट खड़ा हो गया है।
लेकिन इसमें सवाल प्राधिकरण के अधिकारियों पर सबसे ज्यादा खड़े हो रहे हैं। ऐसा नहीं हो सकता कि नोएडा में किसी सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा किया जा रहा हो और अधिकारियों को पता ना हो। 200 करोड़ रुपए की संपत्ति पर कब्जा करना कोई छोटी बात नहीं है। सीधे तौर पर यह भी कहा जा रहा है कि योगी आदित्यनाथ सरकार में बैठे अधिकारियों ने ही खजाने को लुटवाया आया है।
Location : Noida
Published : 21 May 2026, 4:13 PM IST