
धान पर मंडराया बर्बादी का खतरा (IMG: Dynamite News)
Gorakhpur: गोरखपुर में धान की फसल पर अब सिंचाई संकट का साया मंडराने लगा है। सरयू पंप कैनाल बारानगर की मुख्य शाखा से निकलने वाली बनकटी माइनर में पर्याप्त पानी नहीं पहुंचने से टेल क्षेत्र के किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। खेतों में धान की फसल खड़ी है, लेकिन समय पर पानी नहीं मिलने से उसके सूखने का खतरा पैदा हो गया है।
बनकटी माइनर बनगांव-अकोल्हा के बीच से निकलती है। इसके बाद यह अलीपुर, नसीरपुर, रामालखना, भवानीपुर और समदपुर होते हुए बनकटी तक जाती है। इस माइनर से आसपास के कई गांवों के किसानों को अपनी धान की फसल की सिंचाई के लिए पानी मिलता है। किसानों के मुताबिक, इस समय धान की फसल को पानी की सबसे ज्यादा जरूरत है, लेकिन माइनर में पर्याप्त पानी नहीं पहुंच रहा है।
ग्रामीणों का आरोप है कि बनकटी माइनर की लंबे समय से ठीक तरीके से सफाई नहीं कराई गई है। माइनर के दोनों किनारों पर झाड़-झंखाड़ उग आए हैं। इसके अलावा माइनर के अंदर भी बड़ी मात्रा में घास-फूस जमा है। किसानों का कहना है कि पानी के बहाव में रुकावट की यह बड़ी वजह है। अगर समय रहते माइनर की सफाई और गहरी खुदाई करा दी जाती तो पानी का प्रवाह बेहतर हो सकता था। लेकिन अब फसल को पानी की जरूरत के बीच माइनर की बदहाली किसानों के लिए बड़ी परेशानी बन गई है।
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मामले में जब विभाग के जेई से बात की गई तो उन्होंने पानी के आगे नहीं पहुंचने की एक वजह कुछ किसानों की ओर से माइनर को बीच में काट देना बताया। जेई के अनुसार, कुछ किसान माइनर को बीच में काट देते हैं, जिससे पानी का दबाव कम हो जाता है और आगे पानी नहीं पहुंच पाता। जेई ने बताया कि फिलहाल मामले को दिखवाया जा रहा है। वहीं, माइनर की सफाई को लेकर उन्होंने कहा कि इसकी सफाई गर्मी के मौसम में ही कराई जाती है।
विभाग की ओर से दिए गए तर्क से किसान संतुष्ट नहीं हैं। स्थानीय किसानों का कहना है कि माइनर की समस्या केवल बीच में काटे जाने तक सीमित नहीं है। इसकी मौजूदा हालत भी पानी के सुचारु प्रवाह में बड़ी बाधा बनी हुई है। किसान पारस यादव, गंगा प्रसाद, नागेंद्र यादव और नरसिंह समेत अन्य ग्रामीणों का कहना है कि जेसीबी से खुदाई कराए जाने के बाद माइनर कई जगह समतल नहीं रह गई है।
किसानों ने माइनर में एक और गंभीर समस्या की ओर ध्यान दिलाया है। ग्रामीणों के मुताबिक, जगह-जगह रैट होल बने हुए हैं। इनसे पानी का रिसाव हो रहा है। इससे माइनर में आने वाला पानी खेतों के आखिरी छोर तक पहुंचने से पहले ही कम हो जाता है। किसानों का कहना है कि अगर माइनर की गहराई और सतह को ठीक कराया जाए, गड्ढों को भरा जाए और रिसाव वाले स्थानों की मरम्मत की जाए तो पानी के बहाव में काफी सुधार हो सकता है।
किसानों की सबसे बड़ी शिकायत माइनर के लेवल को लेकर है। ग्रामीणों का आरोप है कि हेड की तुलना में टेल की तरफ माइनर कई जगह ऊंची हो गई है। इसके चलते पानी आगे नहीं चढ़ पा रहा है। टेल क्षेत्र के किसानों के खेतों में धान की फसल खड़ी है, लेकिन सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है। किसानों का कहना है कि उन्होंने कई बार संबंधित विभाग के अधिकारियों को अपनी समस्या से अवगत कराया और प्रार्थना पत्र भी दिए, लेकिन स्थायी समाधान नहीं हुआ।
किसानों ने साफ कहा है कि अगर जल्द बनकटी माइनर की सफाई, गहरी खुदाई और जरूरी मरम्मत नहीं कराई गई और टेल तक पानी नहीं पहुंचा तो स्थिति गंभीर हो सकती है। किसानों का कहना है कि सैकड़ों एकड़ धान की फसल बर्बादी की कगार पर पहुंच सकती है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि सिंचाई विभाग की टीम को मौके पर भेजकर माइनर की वास्तविक स्थिति की जांच कराई जाए।
Location : Gorakhpur
Published : 23 August 2026, 9:00 PM IST