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फांसी की सजा पाने वाले मुस्कान-साहिल पहुंचे हाई कोर्ट (Img: AI Generated)
Meerut: मेरठ के चर्चित नीला ड्रम हत्याकांड में फांसी की सजा पाए मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला ने अब इलाहाबाद हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। दोनों की अपील स्वीकार कर ली गई है और मामले की अगली सुनवाई के लिए 30 नवंबर की तारीख तय की गई है। निचली अदालत के फैसले को चुनौती देने वाली इस अपील में कई सवाल उठाए गए हैं। अब हाई कोर्ट में होने वाली सुनवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं।
यह मामला मेरठ के ब्रह्मपुरी थाना क्षेत्र में सौरभ राजपूत की हत्या से जुड़ा है। घटना 3 मार्च 2025 की बताई गई है। अभियोजन पक्ष के मुताबिक, सौरभ की हत्या के बाद उनके शव को नीले रंग के प्लास्टिक ड्रम में छिपाया गया था और ड्रम में सीमेंट भर दिया गया था। इसी वजह से यह मामला चर्चा में आया और इसे नीला ड्रम कांड कहा जाने लगा।
इस मामले में सौरभ की पत्नी मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को आरोपी बनाया गया था। मेरठ की अदालत ने 30 सितंबर को दोनों को दोषी ठहराया और 14 अक्टूबर को मृत्युदंड की सजा सुनाई। अब दोनों ने इसी फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी है।
मुस्कान और साहिल की ओर से दाखिल अपील में निचली अदालत के दोषसिद्धि और मृत्युदंड के आदेश को रद्द करने की मांग की गई है। दोनों ने अपने वकीलों के माध्यम से खुद को आरोपों से बरी किए जाने का अनुरोध किया है।
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अपील में दावा किया गया है कि अभियोजन पक्ष का मामला परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित था और आरोपों को उचित संदेह से परे साबित नहीं किया जा सका। यह अपील में पेश किया गया बचाव पक्ष का तर्क है; इस पर अंतिम फैसला हाई कोर्ट सुनवाई और उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर करेगा।
अपील में कथित तौर पर हथियार, सीमेंट और ड्रम की खरीद से जुड़े पहलुओं पर सवाल उठाए गए हैं। इसके साथ ही बरामदगी से संबंधित मेमो पर स्वतंत्र गवाहों के हस्ताक्षर को लेकर भी आपत्ति जताई गई है।
इस मामले की सुनवाई जस्टिस सलिल कुमार राय और जस्टिस पदम नारायण मिश्रा की खंडपीठ में हुई। मुस्कान और साहिल की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सुशील शुक्ला समेत अन्य वकील पेश हुए। हाई कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए 30 नवंबर की तारीख तय की है। अब आगे की कार्यवाही में अपील के आधारों और निचली अदालत के फैसले से जुड़े कानूनी पहलुओं पर विचार किया जाएगा।
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नीला ड्रम हत्याकांड में निचली अदालत से मिली फांसी की सजा के बाद यह अपील मामले का अहम कानूनी पड़ाव है। मुस्कान और साहिल ने अपने खिलाफ आए फैसले को चुनौती दी है, जबकि अब हाई कोर्ट को अपील में उठाए गए तर्कों पर विचार करना है।
Location : Prayagraj
Published : 27 October 2026, 6:07 PM IST