हिंदी
सोलर पंप से देवघर के किसानों की बदली तकदीर (Img: Dynamite News)
Deoghar: खेती करने की जमीन हो, मेहनत करने का जज्बा भी हो, लेकिन खेतों तक पानी पहुंचाने का इंतजाम न हो तो किसान की सारी उम्मीदें सूखने लगती हैं। देवघर के ग्रामीण इलाकों में यह परेशानी लंबे समय से खेती की राह में रोड़ा बनी हुई थी। कहीं पथरीली जमीन तो कहीं पहाड़ी क्षेत्र और कहीं सिंचाई के साधनों का अभाव। नतीजा यह कि कई खेतों में साल के बड़े हिस्से में खेती करना मुश्किल हो जाता था।
अब इसी तस्वीर के कुछ हिस्सों में बदलाव दिखने लगा है। खेतों तक सौर ऊर्जा से चलने वाले पंप के जरिए पानी पहुंच रहा है और जिन जमीनों पर खेती करना कभी चुनौती था, वहां बैंगन, मिर्च, टमाटर, गोभी और मूली जैसी सब्जियां उगाई जा रही हैं। देवघर के मोहनपुर प्रखंड के सरसा और गोरेगांव जैसे इलाकों में खेती का यह बदला हुआ रूप देखने को मिल रहा है। किसानों के लिए सोलर पंप महज सिंचाई का एक साधन नहीं, बल्कि उन खेतों को दोबारा खेती के योग्य बनाने का जरिया बन रहा है, जहां पानी की कमी ने खेती की संभावनाओं को सीमित कर रखा था।
सिंचाई की समस्या का सीधा असर किसानों की लागत और आमदनी पर पड़ता है। बिजली से मोटर चलाकर खेतों तक पानी पहुंचाना हो तो खर्च की चिंता अलग रहती है। कई बार सिंचाई की व्यवस्था ही नहीं होने से किसान अपनी जमीन का पूरा इस्तेमाल नहीं कर पाते। पीएम कुसुम योजना के तहत सोलर पंप मिलने से इस परेशानी को कम करने में मदद मिल रही है।
ये भी पढ़ें- रोहिन नदी में किसने घोला जहर? सैकड़ों मछलियों की मौत से हड़कंप, जिम्मेदार विभागों की निगरानी पर उठे सवाल
सौर ऊर्जा से चलने वाले पंप की मदद से किसान अपने खेतों तक पानी पहुंचा पा रहे हैं। इससे बिजली पर निर्भरता और सिंचाई के खर्च का दबाव कम होता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि किसान अब केवल बारिश के भरोसे खेती करने के बजाय सिंचाई की उपलब्धता के अनुसार फसलों की योजना बना सकते हैं।
सोलर प्लांट से किसानों को मिली राहत (Img: Dynamite News)
किसान दशरथ ठाकुर के अनुभव से इस बदलाव को समझा जा सकता है। उनके मुताबिक, पहले खेतों में सिंचाई के लिए बिजली से मोटर चलानी पड़ती थी, जिस पर खर्च होता था। सोलर प्लेट और पंप की सुविधा मिलने के बाद खेतों तक पानी पहुंचाना आसान हुआ है। सिंचाई की बेहतर व्यवस्था ने सब्जियों की खेती के विकल्प भी बढ़ाए हैं। अब बैंगन, मिर्च, गोभी, टमाटर और मूली जैसी फसलों की खेती की जा रही है। सिंचाई की सुविधा मिलने से किसानों को उम्मीद है कि वे अपनी जमीन का बेहतर इस्तेमाल कर सकेंगे और आमदनी बढ़ाने के नए रास्ते तलाश पाएंगे।
मोहनपुर प्रखंड के गोरेगांव निवासी अशोक यादव बताते हैं कि उनके गांव में करीब 30 किसानों ने पीएम कुसुम योजना का लाभ उठाया है। सोलर पंप की सुविधा से गांव के किसानों को खेती करने में सहूलियत मिली है।
देवघर के कई ग्रामीण क्षेत्रों में जमीन की प्रकृति और पानी की उपलब्धता खेती को प्रभावित करती है। ऐसी जगहों पर सिंचाई की सुविधा मिलने से उन जमीनों पर भी फसल उगाने की संभावना बढ़ती है, जो पहले पानी के अभाव में खाली पड़ी रहती थीं।
उद्यान पदाधिकारी सह पीएम कुसुम योजना के नोडल पदाधिकारी हंसराज कुमार के मुताबिक, यह योजना किसानों के लिए लाभकारी साबित हो रही है। सोलर पंप की मदद से किसान उन खेतों में भी खेती कर पा रहे हैं, जहां पहले सिंचाई के अभाव में फसल उगाना मुश्किल था।
हालांकि, सोलर पंप लग जाना ही खेती की सभी समस्याओं का समाधान नहीं है। किसानों के लिए पर्याप्त जलस्रोत, अच्छी गुणवत्ता वाले बीज, खाद, फसल की सुरक्षा और बाजार तक पहुंच भी उतनी ही जरूरी है। सिंचाई की सुविधा के साथ इन पहलुओं पर ध्यान दिया जाए तो खेती से बेहतर आमदनी की संभावना और मजबूत हो सकती है।
ये भी पढ़ें- पत्नी का फोन आया, ससुराल पहुंचा और फिर लौटकर नहीं आया! झांसी में 23 वर्षीय संगम की संदिग्ध मौत से मचा हड़कंप
जिला कृषि कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, वर्ष 2025 में करीब 1,200 किसानों को पीएम कुसुम योजना के तहत लाभान्वित किया गया था। वहीं, वर्ष 2026 में अब तक करीब एक हजार किसानों को योजना का लाभ मिल रहा है।
देवघर में सोलर पंप से सिंचाई की सुविधा बढ़ना उन किसानों के लिए राहत की बात है, जो पानी की कमी के कारण अपनी जमीन का पूरा इस्तेमाल नहीं कर पा रहे थे। इससे सिंचाई के खर्च को नियंत्रित करने और सब्जियों जैसी फसलों की खेती के अवसर बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
Location : Deoghar
Published : 27 October 2026, 5:03 PM IST