महराजगंज के हरखोड़ा ग्राम पंचायत में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 4 अपात्र लाभार्थियों को ₹4.80 लाख का अनुचित लाभ दिए जाने का मामला उजागर हुआ है। जिलाधिकारी ने प्रधान के प्रशासनिक व वित्तीय अधिकार सीज कर अंतिम जांच के आदेश दिए हैं।

महराजगंज में पीएम आवास योजना में घपला
Maharajganj: प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) में अनियमितता का गंभीर मामला सामने आने पर जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। विकास खंड मिठौरा की ग्राम पंचायत हरखोड़ा में चार अपात्र लाभार्थियों को आवास योजना का अनुचित लाभ दिए जाने के आरोप सही पाए जाने पर जिलाधिकारी महराजगंज संतोष कुमार शर्मा ने ग्राम प्रधान अनीता के प्रशासनिक एवं वित्तीय अधिकार सीज कर दिए हैं।
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जानकारी के अनुसार यह कार्रवाई ग्रामवासी मेराजुद्दीन एवं अन्य द्वारा की गई शिकायत के बाद की गई। परियोजना निदेशक, जिला ग्राम्य विकास अभिकरण महराजगंज के निर्देश पर मामले की जांच जिला कृषि अधिकारी से कराई गई। जांच आख्या में वर्ष 2022-23 के दौरान प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत आवंटित 09 आवासों की जांच की गई, जिसमें 04 लाभार्थी अपात्र पाए गए।
जांच में सामने आया कि अपात्र लाभार्थियों को योजना के तहत प्रति लाभार्थी ₹1,20,000 की तीनों किस्तें, कुल ₹4,80,000 की धनराशि आवास सॉफ्ट के माध्यम से जारी की जा चुकी थी। जबकि जांच अधिकारी की रिपोर्ट के अनुसार संबंधित लाभार्थियों के पास पहले से पक्के मकान उपलब्ध थे, जिससे वे योजना की पात्रता शर्तों को पूरा नहीं करते थे।
अपात्र पाए गए लाभार्थियों में सुमन वर्मा, अमरावती, त्रिभुवन और रमनी शामिल हैं। प्रधान एवं ग्राम पंचायत सचिव द्वारा दिए गए स्पष्टीकरण में दावा किया गया कि लाभार्थी झोपड़ी में निवास करते थे, जबकि जांच में इसके विपरीत तथ्य सामने आए।
जिलाधिकारी ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि प्रधान और सचिव द्वारा पात्रता से संबंधित कोई ठोस व सुसंगत साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया, जिससे स्पष्टीकरण असंतोषजनक पाया गया।
जिलाधिकारी ने आदेश में कहा कि लाभार्थियों के चयन में मानकों की अनदेखी की गई और योजनाओं के क्रियान्वयन में शिथिलता बरती गई, जो गंभीर प्रशासनिक लापरवाही है। इसके चलते उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम 1947 की धारा 95(1)(छ) के अंतर्गत ग्राम प्रधान के अधिकारों को अतिक्रमित किया गया है। अंतिम जांच के लिए जिला कृषि अधिकारी शैलेन्द्र प्रताप सिंह एवं जिला पंचायत के सहायक अभियंता सत्येन्द्र श्रीवास्तव को जांच अधिकारी नामित किया गया है।
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जिलाधिकारी ने निर्देश दिया है कि अंतिम जांच पूरी होने तक ग्राम पंचायत के प्रशासनिक एवं वित्तीय कार्यों का संचालन तीन सदस्यीय समिति द्वारा किया जाएगा। इस कार्रवाई से जिले में हड़कंप मच गया है और यह मामला सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता व जवाबदेही को लेकर एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है।