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जनपद के बृजमनगंज क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत परसौना में विकास कार्यों के नाम पर बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और फर्जी भुगतान के गंभीर आरोप सामने आए हैं। गांव के निवासी दिलीप कुमार मौर्या ने जिलाधिकारी को शपथ-पत्र देकर ग्राम प्रधान, पंचायत सचिव और अन्य संबंधित लोगों पर सरकारी धन के दुरुपयोग और कूटरचना का आरोप लगाया है। पढ़ें पूरी खबर
बड़ा भ्रष्टाचार
महराजगंज: जनपद के बृजमनगंज क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत परसौना में विकास कार्यों के नाम पर बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और फर्जी भुगतान के गंभीर आरोप सामने आए हैं। गांव के निवासी दिलीप कुमार मौर्या ने जिलाधिकारी को शपथ-पत्र देकर ग्राम प्रधान, पंचायत सचिव और अन्य संबंधित लोगों पर सरकारी धन के दुरुपयोग और कूटरचना का आरोप लगाया है। शिकायत सामने आने के बाद प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है।
क्या है पूरी खबर?
शिकायतकर्ता ने अपने शपथ-पत्र में आरोप लगाया है कि वित्तीय वर्ष 2021-22 में बाबूलाल सहानी के घर से सत्यप्रकाश के घर तक आरसीसी रोड निर्माण के नाम पर सरकारी धन का भुगतान कर दिया गया, जबकि मौके पर उक्त कार्य कराया ही नहीं गया। ग्रामीणों के अनुसार कागजों में सड़क बन चुकी है, लेकिन धरातल पर स्थिति कुछ और ही दिखाई दे रही है। इसी प्रकार ग्राम पंचायत में आरआरसी (कूड़ा डंपिंग सेंटर) के निर्माण में भी भारी अनियमितता का आरोप लगाया गया है। शिकायत में कहा गया है कि कूड़ा डंपिंग सेंटर का निर्माण आधा-अधूरा कराया गया, लेकिन संबंधित अधिकारियों और जिम्मेदार लोगों की मिलीभगत से पूरा भुगतान निकाल लिया गया।
फर्जी भुगतान करने का आरोप
शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि ग्राम पंचायत में इण्डिया मार्का हैंडपंप के रिबोर के नाम पर भी बिना कोई कार्य कराए ही सरकारी धन का भुगतान कर दिया गया। इसके अलावा गांव में स्ट्रीट लाइट लगाने के नाम पर भी फर्जी तरीके से धनराशि निकाली गई। ग्रामीणों का कहना है कि कई स्थानों पर स्ट्रीट लाइट का कोई अस्तित्व ही नहीं है, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में भुगतान दिखाया गया है। इतना ही नहीं, कूड़ादान खरीद के नाम पर भी फर्जी भुगतान करने का आरोप लगाया गया है। शिकायत में कहा गया है कि पंचायत भवन और स्कूल कायाकल्प योजना के अंतर्गत भी कार्यों में अनियमितता बरतते हुए कागजों पर काम दिखाकर भुगतान करा लिया गया।
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भ्रष्टाचार की आशंका और गहरी
स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत स्वच्छता सामग्री की खरीद में भी फर्जी बिल लगाकर सरकारी धन के दुरुपयोग का आरोप लगाया गया है। शिकायतकर्ता के अनुसार ग्राम पंचायत के अभिलेखों, एमआईएस पोर्टल पर दर्ज प्रविष्टियों और मौके के भौतिक सत्यापन में भारी विरोधाभास देखने को मिल रहा है, जिससे पूरे मामले में कूटरचना और भ्रष्टाचार की आशंका और गहरी हो जाती है।
प्रशासनिक और वित्तीय कार्यों से अलग रखने की भी मांग
शिकायतकर्ता ने अपने प्रार्थना पत्र में इन कृत्यों को गंभीर भ्रष्टाचार बताते हुए भारतीय न्याय संहिता 2023 की कई धाराओं के तहत कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने ग्राम प्रधान, पंचायत सचिव अनुराग ठाकुर और अन्य संलिप्त लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने तथा फर्जी तरीके से निकाली गई धनराशि की रिकवरी कराने की मांग की है। साथ ही जांच पूरी होने तक संबंधित लोगों को प्रशासनिक और वित्तीय कार्यों से अलग रखने की भी मांग की गई है।
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मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रभारी जिलाधिकारी एवं मुख्य विकास अधिकारी महेंद्र कुमार सिंह ने संज्ञान लेते हुए जांच के आदेश दे दिए हैं। इस प्रकरण की जांच के लिए जिला पंचायत राज अधिकारी श्रेया मिश्रा के नेतृत्व में एक टीम गठित की गई है, जो पूरे मामले की गहराई से जांच करेगी। प्रशासन का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल इस मामले को लेकर गांव और प्रशासनिक हलकों में चर्चाओं का बाजार गर्म है।