महराजगंज: प्रसूता की मौत मामला गरमाया, मदरहुड हॉस्पिटल की जांच सीएमओ को सौंपी गई

महराजगंज के सोनौली क्षेत्र स्थित मदरहुड हॉस्पिटल में प्रसूता की मौत के मामले ने तूल पकड़ लिया है। परिजनों के आरोपों के बाद जांच सीएमओ को सौंपी गई है, जो पूरे इलाज और ऑपरेशन प्रक्रिया की जांच करेंगे।

Maharajganj: सोनौली क्षेत्र स्थित मदरहुड हॉस्पिटल में प्रसूता की मौत के मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। परिजनों द्वारा इलाज में लापरवाही के लगाए गए आरोपों के बाद शासन-प्रशासन हरकत में आ गया है और पूरे प्रकरण की जांच मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) को सौंप दी गई है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग अस्पताल में हुए उपचार, ऑपरेशन प्रक्रिया और मरीज की देखभाल से जुड़े सभी पहलुओं की जांच करेगा।

प्रसूता की मौत के बाद क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं। परिजनों का आरोप है कि ऑपरेशन के बाद महिला की हालत लगातार बिगड़ती रही, लेकिन समय रहते उचित उपचार नहीं मिल सका। यही वजह है कि अब जांच एजेंसियां अस्पताल के दस्तावेजों, ऑपरेशन रिकॉर्ड, रेफरल प्रक्रिया और उपचार से जुड़े तथ्यों की बारीकी से पड़ताल करेंगी।
ऑपरेशन और उपचार प्रक्रिया की होगी गहन जांच

सूत्रों के अनुसार जांच के दौरान यह देखा जाएगा कि ऑपरेशन निर्धारित चिकित्सकीय मानकों के अनुरूप किया गया था या नहीं। साथ ही यह भी जांच का विषय होगा कि मरीज की स्थिति बिगड़ने पर अस्पताल द्वारा कौन-कौन से चिकित्सकीय कदम उठाए गए और रेफर करने में किसी प्रकार की देरी तो नहीं हुई।

स्वास्थ्य विभाग अस्पताल से जुड़े सभी आवश्यक अभिलेखों को खंगालने की तैयारी में है। जांच रिपोर्ट के आधार पर यह तय होगा कि मामले में किसी प्रकार की चिकित्सकीय लापरवाही या नियमों का उल्लंघन हुआ है अथवा नहीं।

जांच रिपोर्ट तय करेगी जिम्मेदारी

प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने से पहले किसी भी व्यक्ति या संस्था को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा। हालांकि यदि जांच में लापरवाही या अनियमितता के तथ्य सामने आते हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा सकती है। वहीं आरोपों की पुष्टि नहीं होने पर संबंधित पक्ष को राहत मिल सकती है।

इस मामले ने क्षेत्र में निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली को लेकर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं। लोगों का मानना है कि जांच निष्पक्ष और पारदर्शी होनी चाहिए ताकि पीड़ित परिवार को न्याय मिल सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

क्या है पूरा मामला?

जानकारी के मुताबिक सोनौली क्षेत्र के मदरहुड हॉस्पिटल में 23 मई को फरीदा खातून पत्नी अब्दुल करीम का ऑपरेशन कर प्रसव कराया गया था। ऑपरेशन के बाद उनकी तबीयत बिगड़ने लगी। परिजनों के अनुसार 25 मई को उन्हें जनपद के एक निजी हॉस्पिटल में रेफर किया गया, जहां उनका उपचार चलता रहा। हालत में सुधार न होने पर 29 मई को उन्हें लखनऊ स्थित मेदांता अस्पताल भेजा गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई।

मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई। मामले की गंभीरता को देखते हुए पूरे प्रकरण की जांच मुख्य चिकित्सा अधिकारी  नवनाथ प्रसाद को सौंप दी गई है।

अब पूरे जिले की निगाहें सीएमओ की जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं। रिपोर्ट आने के बाद ही यह साफ हो सकेगा कि प्रसूता की मौत के पीछे वास्तविक कारण क्या थे और उपचार प्रक्रिया में किसी प्रकार की चूक हुई थी या नहीं। फिलहाल यह मामला स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन के लिए बड़ी परीक्षा बन गया है।

Location :  Maharajganj

Published :  31 May 2026, 12:02 PM IST

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