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महामृत्युंजय महादेव मंदिर (सोर्स- डाइनामाइट न्यूज़)
Varanasi: काशी की गलियों में मंदिरों की कमी नहीं है। यहां हर मोड़ पर कोई न कोई शिवालय मिल जाता है। लेकिन जब बात जिंदगी और मौत के बीच खड़े डर की हो, जब किसी अपने की सांसों पर संकट मंडरा रहा हो या बीमारी के बीच परिवार को कोई उम्मीद दिखाई न दे रही हो, तब कई लोग काशी के दारानगर स्थित महामृत्युंजय महादेव के दरबार की ओर रुख करते हैं।
यहां आने वालों की प्रार्थना सिर्फ सुख-समृद्धि की नहीं होती। कोई लंबी उम्र मांगता है, कोई गंभीर बीमारी से राहत की कामना करता है तो कोई अपने किसी प्रियजन के लिए अकाल मृत्यु से बचाने की गुहार लगाता है। मंदिर की सबसे बड़ी पहचान ही उसके नाम में छिपी है- मृत्युंजय, यानी मृत्यु पर विजय पाने वाले महादेव।
मंदिर के भीतर पहुंचते ही शिव आराधना के साथ महामृत्युंजय मंत्र का जाप सुनाई देता है। श्रद्धालु रुद्राभिषेक कराते हैं, महामृत्युंजय जाप और हवन करवाते हैं। किसी के हाथ में पूजा की थाली होती है तो किसी की आंखों में अपने किसी करीबी की चिंता।
काशी की धार्मिक मान्यता में महामृत्युंजय महादेव को ऐसे स्वरूप के रूप में देखा जाता है, जिनकी उपासना संकट, रोग और अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति की कामना से की जाती है। यही वजह है कि इस मंदिर में आने वाले हर व्यक्ति की कहानी अलग होती है, लेकिन उनकी प्रार्थना अक्सर एक ही होती है- “बाबा, जिंदगी बचा लीजिए।”
यही इस मंदिर को एक साधारण धार्मिक स्थल से आगे ले जाता है। यहां आस्था के साथ इंसान का सबसे पुराना डर- मृत्यु का डर- भी दिखाई देता है।
मंदिर परिसर में मौजूद प्राचीन धन्वंतरि कूप, जिसे कालोडक कूप भी कहा जाता है, इस स्थान की धार्मिक मान्यताओं को और खास बनाता है। मान्यता है कि भगवान धन्वंतरि ने इसमें अनेक औषधीय जड़ी-बूटियां डाली थीं।
मंदिर से जुड़ी मान्यता के अनुसार, इसके जल का संबंध विभिन्न रोगों से मुक्ति से जोड़ा जाता है। हालांकि इन दावों को धार्मिक आस्था और परंपरा के रूप में ही देखा जाना चाहिए, लेकिन भक्तों के लिए इस कूप का महत्व आज भी कम नहीं हुआ है।
मंदिर के महंत किशन दीक्षित बताते हैं कि यह स्थान बेहद प्राचीन है और मंदिर परिसर में धन्वंतरि कूप की अपनी विशेष मान्यता है। 2020 में भी मंदिर से जुड़ी रिपोर्टों में किशन दीक्षित का उल्लेख मंदिर के महंत परिवार के सदस्य के रूप में हुआ था। बाद की रिपोर्टों में उन्हें मंदिर के महंत के रूप में दर्ज किया गया है। 2024 और 2025 की रिपोर्टों में भी किशन दीक्षित को महामृत्युंजय मंदिर का महंत बताया गया है।
महामृत्युंजय मंदिर का परिसर केवल एक शिवलिंग तक सीमित नहीं है। यहां महाकालेश्वर, नागेश्वर महादेव, अष्टांग भैरव, शनिदेव और हनुमान जी के मंदिर भी हैं। परिसर में प्राचीन पीपल का वृक्ष भी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र है।
मान्यता है कि इसी परिसर के एक छोर पर महामृत्युंजय महादेव विराजमान हैं तो दूसरे छोर पर महाकालेश्वर को पुत्र स्वरूप में स्थान मिला है। गोस्वामी तुलसीदास से जुड़ा हनुमान मंदिर भी यहां की धार्मिक परंपरा को और समृद्ध करता है। इस तरह एक ही परिसर में शिव के अलग-अलग स्वरूपों के दर्शन श्रद्धालुओं को काशी की उस धार्मिक परंपरा से जोड़ते हैं, जहां जन्म, जीवन, मृत्यु और मोक्ष- सब कुछ महादेव से जुड़ा माना जाता है।
मंदिर में साल भर में चार विशेष श्रृंगार की परंपरा बताई जाती है। इनमें महामृत्युंजय महादेव के साकार स्वरूप का श्रृंगार विशेष माना जाता है। इस रूप में बाबा को आठ भुजाओं के साथ सजाया जाता है। सिर से चंद्र की वर्षा, हाथों में रुद्राक्ष की माला और कलश तथा साथ में बगलामुखी माता का स्वरूप भक्तों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र होता है।
मान्यता है कि इस विशेष स्वरूप के दर्शन से मनोकामनाएं पूरी होती हैं। श्रद्धालुओं में यह विश्वास भी है कि लगातार 40 सोमवार बाबा के दरबार में पहुंचकर दूध और जल से अभिषेक करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं।
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शायद यही इस मंदिर की सबसे बड़ी कहानी है। यहां आने वाला हर व्यक्ति मौत को हराने का दावा लेकर नहीं आता, बल्कि मौत के डर के सामने उम्मीद लेकर आता है। किसी के लिए महामृत्युंजय मंत्र अपने बीमार पिता के लिए आखिरी प्रार्थना है, किसी के लिए मां की लंबी उम्र की कामना, तो किसी के लिए खुद के जीवन पर मंडराते संकट से निकलने का भरोसा।
धार्मिक मान्यता में महामृत्युंजय महादेव को अकाल मृत्यु से अभय देने वाला स्वरूप माना गया है। मंदिर से जुड़ी परंपराओं में यहां तक कहा जाता है कि महादेव का स्मरण मृत्यु तुल्य कष्ट को भी दूर करने वाला है।
काशी में महादेव के अनेक दरबार हैं, लेकिन दारानगर का यह दरबार उन लोगों की आस्था का ठिकाना बन जाता है, जिनके मन में एक ही सवाल होता है- “क्या जिंदगी बच सकती है?” और शायद इसी सवाल के साथ वे महामृत्युंजय महादेव के सामने हाथ जोड़कर खड़े होते हैं।
जहां बाकी मंदिरों में लोग सुख मांगते हैं, वहां महामृत्युंजय महादेव के दरबार में कई लोग सबसे पहले जिंदगी मांगते हैं।
Location : Varanasi
Published : 11 August 2026, 10:04 AM IST
Topics : Dhanvantari Well Varanasi Mahamrityunjay Mahadev Temple Mahamrityunjay Mantra Sawan 2026 Varanasi Shiva Temple