क्या आप भी इस खबर को पढ़कर भूल जाओगे मेरठ का नीला ड्रम हत्याकांड, देखें मुस्कान को भुलाने के लिए कांवड़िए ने क्या खास किया?

मेरठ के शिवभक्त उज्जवल ठाकुर ने कांवड़ यात्रा में अनोखी मिसाल पेश की है। उन्होंने चार नीले ड्रमों में 251 लीटर गंगाजल भरकर हरिद्वार से मेरठ तक यात्रा पूरी की। उज्जवल का कहना है कि नीले ड्रम को लेकर बनी गलत धारणा बदलनी चाहिए और इसका इस्तेमाल धार्मिक कार्यों के लिए भी किया जा सकता है।

Post Published By: Mayank Tawer
Updated : 10 August 2026, 8:04 PM IST
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Meerut: मेरठ के चर्चित ब्लू ड्रम केस के बाद जिस नीले ड्रम को लेकर लोगों के बीच चर्चा और विवाद देखने को मिला था, अब वही नीला ड्रम कांवड़ यात्रा में एक अलग वजह से सुर्खियों में है। मेरठ के एक शिवभक्त ने इसी नीले रंग के प्लास्टिक ड्रम में 251 लीटर गंगाजल भरकर हरिद्वार से कांवड़ यात्रा शुरू की है। शिवभक्त का कहना है कि नीले ड्रम को गलत नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने इसे भगवान शिव की भक्ति और सकारात्मक सोच का प्रतीक बनाने की कोशिश की है।

चार नीले ड्रमों में लेकर आए 251 लीटर गंगाजल

मेरठ के सरधना रोड स्थित ड्रीम सिटी निवासी उज्जवल ठाकुर इस बार अपनी अनोखी कांवड़ को लेकर चर्चा में हैं। उज्जवल अपने कंधों पर चार नीले ड्रम लेकर चल रहे हैं, जिनमें वह हरिद्वार की हर की पैड़ी से 251 लीटर गंगाजल लेकर आए हैं। उज्जवल का कहना है कि कांवड़ यात्रा उनके लिए केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि भगवान शिव के प्रति अटूट आस्था का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि पिछले सात साल से लगातार वह कांवड़ लेकर आ रहे हैं और हर बार भोलेनाथ की कृपा से यात्रा पूरी होती है।

मन्नत नहीं, सिर्फ भोलेनाथ के प्रति आस्था

उज्जवल ठाकुर ने बताया कि वह किसी विशेष मन्नत के लिए कांवड़ नहीं उठाते हैं। उनके लिए यह यात्रा केवल भक्ति और श्रद्धा का माध्यम है। इस बार उन्होंने कुछ अलग करने का फैसला लिया और नीले ड्रम को कांवड़ का हिस्सा बनाया। उन्होंने बताया कि 26 जुलाई को वह अपने साथियों के साथ मेरठ से हरिद्वार के लिए रवाना हुए थे। इसके बाद हरिद्वार से गंगाजल लेकर करीब 13 दिनों का सफर तय करते हुए वह मेरठ पहुंचे।

नीले ड्रम को लेकर गलत धारणा बदलना चाहते हैं उज्जवल

उज्जवल ठाकुर का कहना है कि नीले ड्रमों का इस्तेमाल किसी विवाद या गलत संदर्भ से प्रेरित नहीं है। उन्होंने कहा कि कुछ घटनाओं की वजह से लोगों के मन में नीले ड्रम को लेकर गलत धारणा बन गई है, लेकिन किसी वस्तु को उसके रंग या पहचान के आधार पर नहीं आंका जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि नीले ड्रम का इस्तेमाल अच्छे और धार्मिक कार्यों के लिए भी किया जा सकता है। इसी सोच के साथ उन्होंने इसमें गंगाजल भरकर भगवान भोलेनाथ को अर्पित करने का निर्णय लिया।

कांवड़ यात्रा सिर्फ सफर नहीं, आस्था का प्रतीक

उज्जवल ठाकुर के मुताबिक कांवड़ यात्रा उनके लिए किलोमीटर का सफर तय करना नहीं, बल्कि भगवान शिव के प्रति समर्पण और विश्वास की यात्रा है। उन्होंने कहा कि भोलेनाथ का नाम लेते हुए कठिन रास्ते भी आसान हो जाते हैं। 251 लीटर गंगाजल लेकर निकले उज्जवल की यह कांवड़ अब मेरठ में चर्चा का विषय बनी हुई है। लोग उनके इस प्रयास को सकारात्मक सोच और भाईचारे का संदेश देने वाली पहल बता रहे हैं।

Location :  Meerut

Published :  10 August 2026, 8:04 PM IST

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