15-20 साल पुराने चैंबरों पर चला बुलडोजर, सड़कों पर उतरे वकील: लखनऊ के कैसरबाग कचहरी में भारी बवाल

लखनऊ के कैसरबाग स्थित कचहरी के आसपास फुटपाथों और सरकारी जमीन पर बने वकीलों के अवैध चैंबरों पर हाईकोर्ट के आदेश के बाद नगर निगम का बुलडोजर चला है। अधिकारियों द्वारा चिह्नित अवैध निर्माणों को ढहाए जाने की कार्रवाई से गुस्साए वकीलों ने मौके पर जोरदार हंगामा किया।

Post Published By: Priyam Kashyap
Updated : 25 October 2026, 1:11 PM IST
google-preferred

Lucknow: लखनऊ नगर निगम ने रविवार को कैसरबाग स्थित कोर्ट परिसर के आसपास अवैध चैंबरों और अतिक्रमण के खिलाफ अपना अभियान तेज कर दिया। उच्च न्यायालय के आदेशों का पालन करते हुए अधिकारी बुलडोजर और भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे, जिसका वकीलों ने विरोध किया। बड़ी संख्या में वकीलों ने धरना दिया और मांग की कि उनके लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जाए। प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि सरकारी जमीन, फुटपाथ और रास्तों पर किए गए हर तरह के अतिक्रमण को हटा दिया जाएगा।

211 से 245 अवैध चैंबरों और अतिक्रमणों की पहचान

नगर निगम ने कोर्ट परिसर के आसपास सरकारी जमीन और फुटपाथ पर बने लगभग 211 से 245 अवैध चैंबरों और अन्य अतिक्रमणों की पहचान की है। इन ढांचों पर लाल रंग से क्रॉस का निशान और एक विशेष नंबर डाला गया था। अब इन्हें चरणबद्ध तरीके से हटाया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, मई और अगस्त के बीच दो चरणों में 72 चैंबर पहले ही तोड़े जा चुके थे। इनमें से कुछ को बाद में फिर से बना लिया गया था। अब बाकी बचे अतिक्रमणों को हटाने की प्रक्रिया चल रही है।

 यह भी पढ़ें - Lucknow: अब घर बैठे मिलेगा नया वोटर ID कार्ड, स्पीड पोस्ट से होगी डिलीवरी

वकीलों की मांग - पहले बैठने की वैकल्पिक व्यवस्था हो

इस कार्रवाई का विरोध कर रहे वकीलों का कहना है कि वे उच्च न्यायालय के आदेशों या अतिक्रमण हटाने के खिलाफ नहीं हैं; लेकिन उनका तर्क है कि प्रशासन को उनकी आजीविका के बारे में भी सोचना चाहिए। उनका दावा है कि कई वकील पिछले 15 से 20 वर्षों से इन चैंबरों से अपनी वकालत कर रहे हैं। वकीलों की मांग है कि चैंबरों को हटाने से पहले कोर्ट परिसर के अंदर या आसपास उनके बैठने के लिए उचित वैकल्पिक व्यवस्था की जाए। उनका कहना है कि इन चैंबरों को अचानक तोड़ देने से उनके रोजमर्रा के पेशेवर कामकाज में बाधा आएगी और वे अपने मुवक्किलों से नहीं मिल पाएंगे।

आपत्तियों का निपटारा, हाईकोर्ट से कोई राहत नहीं

नगर निगम के अधिकारियों के अनुसार, इन चैंबरों को लेकर जारी नोटिसों के खिलाफ वकीलों द्वारा दायर 14 आपत्तियों पर सुनवाई की गई और उनका निपटारा कर दिया गया। इसके बाद इस कार्रवाई को रोकने के लिए हाई कोर्ट में एक अपील दायर की गई थी, जिसे खारिज कर दिया गया। यह अभियान मूल रूप से 11 अक्टूबर को शुरू होना था, लेकिन कानूनी अपीलों और आपत्तियों के निपटारे तक इसे टाल दिया गया था। प्रशासन का कहना है कि कानूनी अड़चनें दूर होने के बाद अब यह अभियान फिर से शुरू हो गया है।

कोर्ट परिसर और उसके आसपास भारी पुलिस बल तैनात

वकीलों की ओर से संभावित विरोध-प्रदर्शन या हंगामे को देखते हुए, कैसरबाग कोर्ट परिसर, पुराने हाई कोर्ट परिसर और कलेक्ट्रेट के आसपास सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। मौके पर कई थानों की पुलिस, प्रांतीय सशस्त्र कांस्टेबुलरी (PAC) की टुकड़ियां, ADCP, ACP और नगर निगम के जोनल अधिकारी ओम प्रकाश सिंह मौजूद हैं।

यह भी पढ़ें - Lucknow: पुलिस को लगातार चकमा दे रही श्रद्धा, लखनऊ लौटने की चर्चा तेज; इंस्पेक्टर के बाद IPS पर भी गिरी गाज

जोनल अधिकारी के अनुसार, इस अभियान का मकसद सिविल कोर्ट से बलरामपुर अस्पताल और 'द रेजीडेंसी' की ओर जाने वाली सड़कों के किनारे हुए अवैध कब्जों जैसे नालों, गटरों और फुटपाथों पर किए गए अतिक्रमण को हटाना है। नगर निगम का कहना है कि इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य सार्वजनिक रास्तों को अतिक्रमण से मुक्त कराना है।

फिलहाल प्रशासन और वकीलों के बीच तनाव बना हुआ है। जहां नगर निगम सार्वजनिक जमीन से अतिक्रमण हटाने पर जोर दे रहा है, वहीं वकील अपने काम करने की जगह के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की मांग कर रहे हैं।

Location :  Lucknow

Published :  25 October 2026, 1:04 PM IST

Related News

Advertisement