8 साल में पहली बार चीनी स्मार्टफोन कंपनियों को बड़ा झटका! भारतीय ब्रांडों की ऐसे हुई वापसी

भारत में चीनी स्मार्टफोन कंपनियों की बाजार हिस्सेदारी आठ साल के निचले स्तर पर पहुंच गई है। मेमोरी चिप की बढ़ती कीमतों के बीच Lava और Ai+ जैसे भारतीय ब्रांडों को कैसे मिल रहा है फायदा?

Post Published By: Asmita Patel
Updated : 25 October 2026, 12:47 PM IST
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New Delhi: भारत के स्मार्टफोन बाजार में चीनी कंपनियों का दबदबा कमजोर पड़ता दिखाई दे रहा है। कभी किफायती कीमत और आकर्षक फीचर्स के दम पर बाजार में अपनी मजबूत पकड़ बनाने वाली Vivo, Oppo और Xiaomi जैसी कंपनियों के सामने अब लागत बढ़ने की चुनौती है। मेमोरी चिप की कीमतों में तेजी ने सस्ते स्मार्टफोन बनाना मुश्किल कर दिया है। इसका फायदा भारतीय ब्रांडों को मिल रहा है, जो कम बजट वाले ग्राहकों को आकर्षित करने की कोशिश कर रहे हैं। बाजार के आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई-सितंबर तिमाही में भारतीय ब्रांडों की हिस्सेदारी बढ़कर 7 फीसदी तक पहुंच गई, जबकि चीनी कंपनियों की हिस्सेदारी घटकर 67-68 फीसदी रह गई।

चीनी कंपनियों की बाजार हिस्सेदारी में लगातार गिरावट

भारतीय स्मार्टफोन बाजार में चीनी ब्रांडों की हिस्सेदारी में आई गिरावट को बाजार के बदलते समीकरणों के तौर पर देखा जा रहा है। रिसर्च फर्म Omdia के मुताबिक, जुलाई-सितंबर तिमाही में भारतीय बाजार में चीनी स्मार्टफोन ब्रांडों की हिस्सेदारी 68 फीसदी रही। पिछली तिमाही में यह आंकड़ा 71 फीसदी था, जबकि एक साल पहले चीनी कंपनियों की हिस्सेदारी 75 फीसदी थी। Counterpoint Research के आंकड़े भी इसी रुझान की ओर इशारा करते हैं। कंपनी के मुताबिक, पिछली तिमाही में चीनी ब्रांडों की हिस्सेदारी 67 फीसदी रही, जो जनवरी-मार्च 2019 के बाद सबसे कम स्तर है। इस तरह अलग-अलग रिसर्च फर्मों के आंकड़ों में थोड़ा अंतर होने के बावजूद दोनों चीनी कंपनियों की बाजार हिस्सेदारी घटने का संकेत दे रहे हैं।

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मेमोरी चिप की बढ़ती कीमतों ने बढ़ाई मुश्किल

चीनी कंपनियों की परेशानी के पीछे सबसे बड़ी वजह स्मार्टफोन के निर्माण में इस्तेमाल होने वाली मेमोरी चिप की बढ़ती कीमतें बताई जा रही हैं। मोबाइल फोन में डेटा और एप्लिकेशन से जुड़े कामकाज के लिए मेमोरी अहम होती है। इसकी लागत बढ़ने का सीधा असर स्मार्टफोन की कुल निर्माण लागत पर पड़ता है। कम कीमत वाले फोन के बाजार में कंपनियों के सामने चुनौती और बड़ी हो जाती है। इस श्रेणी में ग्राहक कीमत को लेकर काफी सतर्क रहते हैं और थोड़ी-सी बढ़ोतरी भी उनके खरीदने के फैसले को प्रभावित कर सकती है। ऐसे में कंपनियों के लिए बढ़ी हुई लागत का पूरा बोझ ग्राहकों पर डालना आसान नहीं होता।

मिड-रेंज और प्रीमियम फोन पर जोर

Omdia के प्रिंसिपल एनालिस्ट संयम चौरसिया के मुताबिक, चीनी कंपनियां पिछले चार से पांच तिमाहियों से लागत नियंत्रित करने के लिए स्मार्टफोन के फीचर्स और स्पेसिफिकेशन में कटौती कर रही हैं। इसके साथ ही कंपनियां अपने मुनाफे को बनाए रखने के लिए मिड-रेंज और प्रीमियम सेगमेंट पर ज्यादा ध्यान दे रही हैं। यह रणनीति कंपनियों के लिए लागत और मुनाफे के बीच संतुलन बनाने का तरीका है। ज्यादा कीमत वाले स्मार्टफोन में कंपनियों को बेहतर मार्जिन मिलने की संभावना रहती है। हालांकि, इसका दूसरा पहलू यह है कि कम बजट वाले ग्राहकों के लिए उपलब्ध विकल्प सीमित हो सकते हैं।

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Lava और Ai+ जैसे भारतीय ब्रांडों को मिला मौका

चीनी कंपनियों के सस्ते स्मार्टफोन कम करने का फायदा भारतीय ब्रांडों को मिल सकता है। Lava और Ai+ जैसे ब्रांड कम कीमत वाले फोन की मांग को ध्यान में रखकर बाजार में अपनी मौजूदगी बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। भारतीय ब्रांडों के लिए सबसे बड़ा अवसर उन ग्राहकों के बीच है, जो नया स्मार्टफोन खरीदते समय बजट को प्राथमिकता देते हैं। यदि उन्हें अपनी जरूरत के मुताबिक उचित कीमत पर फोन मिलता है, तो वे पारंपरिक रूप से लोकप्रिय चीनी ब्रांडों के बजाय भारतीय विकल्पों पर भी विचार कर सकते हैं।

क्या भारतीय स्मार्टफोन ब्रांडों की वापसी का दौर शुरू हो गया है?

भारतीय ब्रांडों की हिस्सेदारी बढ़कर 7 फीसदी होना बाजार में बदलाव का संकेत जरूर है, लेकिन इसे चीनी कंपनियों के दबदबे के पूरी तरह खत्म होने के तौर पर देखना जल्दबाजी होगी। जुलाई-सितंबर तिमाही में भी चीनी ब्रांडों की हिस्सेदारी 67-68 फीसदी के आसपास रही, जो बताती है कि बाजार में उनका प्रभाव अब भी काफी बड़ा है। फिलहाल मेमोरी चिप की बढ़ती लागत ने कंपनियों की रणनीति बदलने पर मजबूर किया है। चीनी ब्रांड मुनाफे वाले सेगमेंट पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, जबकि भारतीय कंपनियां कम बजट वाले स्मार्टफोन की मांग से फायदा उठाने की कोशिश में हैं।

Location :  New Delhi

Published :  25 October 2026, 12:47 PM IST

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