जानें कैसे शुरू हुई मौत की वो आग, जिसने कोचिंग में पढ़ रहे 15 बच्चों को नहीं दिया संभलने का मौका; बड़ी वजह आई सामने

लखनऊ की एक इमारत में लगी आग ने कुछ ही मिनटों में ऐसा मंजर पैदा कर दिया, जिसे देखकर हर कोई सन्न रह गया। कोचिंग और एनीमेशन क्लास में मौजूद कई छात्र बाहर निकलने का रास्ता तलाशते रह गए। कुछ ने जान बचाने के लिए ऊंचाई से छलांग लगा दी।

Post Published By: Nidhi Kushwaha
Updated : 22 June 2026, 9:58 PM IST
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Lucknow: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज इलाके की एक बहुमंजिला इमारत में लगी भीषण आग ने 15 बच्चों की जान ले ली, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे के वक्त इमारत में कोचिंग और थ्री-डी एनीमेशन की कक्षाएं चल रही थीं। किसी को अंदाजा भी नहीं था कि कुछ ही मिनटों में पूरा माहौल चीख-पुकार में बदल जाएगा।

घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन, पुलिस, दमकल और एसडीआरएफ की टीमें मौके पर पहुंच गईं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपना अलीगढ़ दौरा बीच में छोड़कर लखनऊ लौटने का फैसला किया और घटनास्थल का निरीक्षण किया।

वेयरहाउस में लगी आग ने लिया विकराल रूप

जानकारी के अनुसार बिल्डिंग के ग्राउंड फ्लोर पर पेट शॉप संचालित होती थी। पहली मंजिल पर उसी दुकान का वेयरहाउस बनाया गया था। दूसरी मंजिल पर थ्री-डी एनीमेशन का प्रशिक्षण केंद्र और बच्चों की कोचिंग क्लास चलती थी।प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक दोपहर करीब ढाई बजे वेयरहाउस क्षेत्र में आग लग गई। आशंका जताई जा रही है कि एसी के कंप्रेसर में विस्फोट या शॉर्ट सर्किट के कारण आग भड़की। देखते ही देखते आग ने पूरे भवन को अपनी चपेट में ले लिया। धुएं और लपटों के कारण ऊपर मौजूद छात्रों को बाहर निकलने का मौका नहीं मिल सका।

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जान बचाने के लिए बच्चों ने लगाई छलांग

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार आग इतनी तेजी से फैली कि कई बच्चे घबरा गए। ऊपर की मंजिलों पर फंसे छात्रों की चीखें दूर तक सुनाई दे रही थीं। इसी दौरान चार से पांच छात्रों ने जान बचाने के लिए इमारत से छलांग लगा दी। बताया गया कि एक छात्र नीचे लगी लोहे की ग्रिल पर गिर गया, जिसकी सरिया उसके पेट में धंस गई। अन्य कई छात्र भी गंभीर रूप से घायल हुए। सभी घायलों को तत्काल ट्रॉमा सेंटर और अन्य अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है।

दो घंटे तक चला रेस्क्यू ऑपरेशन

घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस, दमकल विभाग और एसडीआरएफ की टीमों ने राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया। आग की तीव्रता इतनी अधिक थी कि रेस्क्यू टीमों को अंदर पहुंचने में काफी कठिनाई हुई। करीब दो घंटे तक चले अभियान के दौरान 15 शव बाहर निकाले गए। देर शाम तक राहत कार्य जारी रहा और इमारत के हर हिस्से की जांच की जाती रही ताकि कोई व्यक्ति अंदर फंसा न रह जाए।

दमकल की देरी पर उठे सवाल

स्थानीय लोगों ने दावा किया कि हादसे के लगभग 40 मिनट बाद दमकल की गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। लोगों का कहना है कि अगर राहत दल समय पर पहुंच जाता तो शायद कई जानें बचाई जा सकती थीं। इस दावे के बाद दमकल विभाग की कार्यप्रणाली और आपातकालीन प्रतिक्रिया को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।

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अवैध निर्माण और सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल

घटना के बाद सामने आया कि इमारत में बाहर निकलने का वैकल्पिक रास्ता नहीं था। भवन तीन ओर से अन्य इमारतों से घिरा हुआ था। ऐसे में आग लगने के बाद अंदर मौजूद लोगों के पास बच निकलने का विकल्प बेहद सीमित रह गया।कई लोगों ने खिड़कियों के शीशे तोड़कर बाहर निकलने की कोशिश की। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर भवन में पर्याप्त अग्नि सुरक्षा व्यवस्था और आपातकालीन निकास मार्ग होते तो नुकसान कम हो सकता था।

राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री ने जताया दुख

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने हादसे पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए शोक संतप्त परिवारों के प्रति संवेदना प्रकट की और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख रुपये और घायलों को 50-50 हजार रुपये की सहायता देने की घोषणा की। वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घटना को हृदयविदारक बताते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और घायलों के बेहतर इलाज के निर्देश दिए हैं।

Location :  Lucknow

Published :  22 June 2026, 9:22 PM IST

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