मौत के मुंह में समा रहा था पूरा फ्लोर, तभी ‘काले सांप’ की तरह लटके उस तार ने कैसे बचाई कुछ जानें?

लखनऊ में भीषण आग लगने के बाद इमारत में फंसे कर्मचारियों के सामने मौत का खतरा मंडरा रहा था। मुख्य निकास बंद होने पर कई लोगों ने बिजली के केबल को सहारा बनाकर अपनी जान बचाई। जानिए कैसे धुएं और आग के बीच चला जिंदगी और मौत का संघर्ष।

Updated : 23 June 2026, 9:15 AM IST
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Lucknow: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में एक बहुमंजिला इमारत में लगी भीषण आग ने कई परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया। इस दर्दनाक हादसे में 15 लोगों की मौत हो गई। आग इतनी तेजी से फैली कि कई लोगों के लिए बाहर निकलने का रास्ता बंद हो गया। हालांकि, कुछ कर्मचारियों ने सूझबूझ दिखाते हुए इमारत के बाहर लटके बिजली के केबल का सहारा लिया और अपनी जान बचाने में सफल रहे।

धुएं और आग के बीच फंसे कर्मचारी

आग से बाल-बाल बचे मेरठ के 29 वर्षीय ग्राफिक आर्टिस्ट गौरव कुमार ने मीडिया से बातचीत में बताया कि हादसे के वक्त वह बिल्डिंग के दूसरे फ्लोर पर स्थित हेड हॉपर स्टूडियो में मौजूद थे। स्टूडियो में उस समय करीब 24 से 25 कर्मचारी काम कर रहे थे।

गौरव ने बताया कि सबसे पहले निचली मंजिल से आग की लपटें उठती दिखाई दीं। कुछ ही देर में आग दूसरे फ्लोर की ओर बढ़ने लगी, जहां उनका स्टूडियो था। देखते ही देखते पूरे फ्लोर में घना धुआं भर गया और हालात बेहद भयावह हो गए।

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बिजली का केबल बना बचाव का रास्ता

गौरव कुमार के मुताबिक, आग के कारण मुख्य निकास मार्ग पूरी तरह बंद हो गया था। धुएं के कारण सांस लेना मुश्किल हो रहा था और कई लोगों की आंखों में जलन होने लगी थी। कुछ कर्मचारियों को चक्कर आने लगे और वे बेहोश होने की स्थिति में पहुंच गए थे।

ऐसे में कर्मचारियों ने इमारत के बाहर लटके एक मोटे केबल को देखा और उसी के सहारे नीचे उतरने का फैसला किया। गौरव ने बताया कि एक-एक कर लोग केबल पकड़कर नीचे उतरते गए। वह उन लोगों में शामिल थे जो सबसे आखिर में इस रास्ते से बाहर निकल पाए।

सीढ़ियां हुईं खतरनाक, खिड़कियों से खोजा रास्ता

एक अन्य ग्राफिक आर्टिस्ट 29 वर्षीय आसिफ ने भी अपनी जान बचाने के लिए केबल का इस्तेमाल किया। उन्होंने बताया कि आग लगने के शुरुआती समय में कुछ कर्मचारी सीढ़ियों के रास्ते बाहर निकलने में सफल रहे थे। लेकिन आग और धुएं के बढ़ने के साथ ही सीढ़ियां भी असुरक्षित हो गईं।

आसिफ ने बताया कि जब सामान्य निकास मार्ग बंद हो गया तो कर्मचारियों ने खिड़कियां खोलकर बाहर की स्थिति का जायजा लिया। इसी दौरान उन्हें छत से नीचे लटका एक मोटा और बिना इस्तेमाल किया गया बिजली का केबल दिखाई दिया, जिसे बाद में बचाव के रास्ते के रूप में इस्तेमाल किया गया।

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गर्म केबल के कारण बढ़ी मुश्किल

आसिफ के अनुसार आग की तीव्रता इतनी अधिक थी कि कुछ समय बाद केबल भी गर्म हो गया था। उसे लंबे समय तक पकड़कर रखना मुश्किल हो रहा था। कई लोगों को अपनी पकड़ बनाए रखने में परेशानी हुई।

उन्होंने बताया कि उनके साथी जयंत गुप्ता गर्मी सहन नहीं कर पाए और उन्हें काफी ऊंचाई से नीचे कूदना पड़ा। जमीन पर गिरने से उनकी पीठ में चोटें आईं।

समय रहते बाहर निकले पंकज

24 वर्षीय ग्राफिक आर्टिस्ट पंकज गोस्वामी ने बताया कि लंच के तुरंत बाद उन्हें नीचे की मंजिल से जलने की तेज गंध महसूस हुई। जब उन्होंने नीचे देखा तो वहां आग की लपटें दिखाई दीं। उन्होंने तुरंत अपने साथियों को सतर्क किया और इमारत खाली करने के लिए कहा।

पंकज खुद सीढ़ियों के रास्ते बाहर निकलने में सफल रहे और उनके साथ कुछ अन्य कर्मचारी भी सुरक्षित निकल गए। उन्होंने आशंका जताई कि घने धुएं के कारण कुछ लोग बेहोश हो गए होंगे, जिससे वे बाहर नहीं निकल सके। पंकज ने बताया कि उन्हें जानकारी मिली है कि उनके कार्यस्थल से जुड़े 15 लोगों की इस हादसे में मौत हो गई।

Location :  Lucknow

Published :  23 June 2026, 9:15 AM IST

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