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सीबीआई ने उत्तर प्रदेश और राजस्थान में सुपारी तस्करी और टैक्स चोरी के एक बड़े सिंडिकेट का पर्दाफाश किया है। तीन सीजीएसटी अधिकारियों की गिरफ्तारी के बाद, इस घोटाले में और बड़ी मछलियों के फंसने की संभावना है। सीबीआई इस नेटवर्क के अन्य हिस्सों की जांच कर रही है।
झांसी रिश्वत मामला
Jhansi: सीबीआई ने उत्तर प्रदेश और राजस्थान के कई हिस्सों में सुपारी तस्करी और टैक्स चोरी के एक बड़े सिंडिकेट का पर्दाफाश किया है। झांसी में सीबीआई ने तीन सीजीएसटी अधिकारियों को गिरफ्तार किया है, जो कथित रूप से एक बड़े कर चोरी के खेल में शामिल थे। इस खेल में सुपारी कंपनियों तक पहुंचाने के लिए कच्चे बिलों का उपयोग किया जाता था, जिससे सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये की चपत लगती थी। यह सिंडिकेट बड़े पैमाने पर चल रहा था और सीबीआई अब इसमें शामिल अन्य प्रमुख अफसरों की तलाश में है।
सीबीआई के जांचकर्ताओं के मुताबिक, इस पूरे खेल में सुपारी को विभिन्न राज्यों से लाकर मसाला कंपनियों तक पहुंचाया जाता था। उत्तर प्रदेश, बिहार और दिल्ली से होते हुए सुपारी राजस्थान के विभिन्न इलाकों में पहुंचाई जाती थी। जीएसटी से बचने के लिए पान-मसाला कंपनियां कच्चे बिलों का सहारा लेती थीं, जिससे कर चोरी को बढ़ावा मिलता था। इस सिंडिकेट के अफसरों की मदद से यह खेल आसानी से चल रहा था।
इस पूरे खेल में सीजीएसटी और एसजीएसटी विभाग के कई अधिकारियों की मिलीभगत सामने आई है। अफसरों की मदद से यह तस्करी कच्चे बिलों के माध्यम से होती थी, जिससे करोड़ों रुपये की टैक्स चोरी की जाती थी। कच्चे बिलों का इस्तेमाल करके यह तस्करी का नेटवर्क सुपारी को कंपनियों तक पहुंचाता था और इसके बदले बड़े पैमाने पर टैक्स से बचने का खेल खेला जा रहा था।
सीबीआई ने झांसी में सीजीएसटी के डिप्टी कमिश्नर प्रभा भंडारी और दो अन्य अधिकारियों अनिल तिवारी और अजय शर्मा को गिरफ्तार किया है। ये तीनों अधिकारी सुपारी तस्करी के इस सिंडिकेट का हिस्सा थे और टैक्स चोरी के खेल में शामिल थे। सीबीआई का कहना है कि इनकी गिरफ्तारी इस नेटवर्क के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई है, लेकिन इस मामले में और बड़ी मछलियों के फंसने की संभावना है।
सीबीआई को इस पूरे नेटवर्क के बारे में जानकारी तब मिली जब उन्होंने कानपुर और लखनऊ में तैनात दो सीजीएसटी अधिकारियों के कॉल डिटेल्स पर नजर डाली। इन अधिकारियों के संपर्क में अन्य अधिकारियों के भी नाम सामने आए, जो इस सिंडिकेट के साथ मिलकर टैक्स चोरी और तस्करी में शामिल थे। सीबीआई की टीम अब इन अधिकारियों के नेटवर्क की जांच कर रही है और इस सिंडिकेट के और सदस्य गिरफ्तार हो सकते हैं।
सीबीआई ने इस मामले में सीजीएसटी अफसरों की गिरफ्तारी के लिए दो बार पहले भी प्रयास किया था, लेकिन सफलता नहीं मिल पाई थी। पहले 21 नवंबर को एक प्रमुख सराफा कारोबारी के यहां छापे मारे गए थे, जहां टैक्स का घालमेल मिला था। हालांकि, जब सीबीआई ने इन अधिकारियों पर कार्रवाई की तो वे भागने में सफल हो गए थे। बाद में, सीबीआई ने तीसरी बार इन अधिकारियों को पकड़ने में सफलता पाई, जो इस मामले में एक महत्वपूर्ण कदम है।
सीबीआई की कार्रवाई के दौरान नए सबूत भी सामने आए हैं। जब सीबीआई ने अनिल तिवारी से संपर्क साधा तो उन्होंने सराफा कारोबारी से रिश्वत के तौर पर मोटी रकम की मांग की थी। इसके बाद सीबीआई ने उनके खिलाफ जांच तेज कर दी। अब, सीबीआई की टीम इस सिंडिकेट से जुड़ी बाकी कड़ी पर भी नजर बनाए हुए है और मामले की गहरी जांच कर रही है।