पैसे नहीं थे, बारिश में स्ट्रेचर पर पत्नी का शव लेकर घंटों बैठा रहा पति, मासूम बेटी रोती रही; फिर जो हुआ उसने झकझोर दिया

झांसी मेडिकल कॉलेज में पत्नी की मौत के बाद शव घर ले जाने के लिए पैसे नहीं होने पर पति बारिश में घंटों स्ट्रेचर लेकर बैठा रहा। करीब आठ साल की बेटी मां के शव के पास रोती रही। सिपाही की नजर पड़ने के बाद एंबुलेंस की व्यवस्था हुई और शव घर भेजा गया।

Post Published By: Poonam Rajput
Updated : 5 September 2026, 3:27 PM IST
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Jhansi: यूपी के झांसी से इंसानियत और व्यवस्था को सवालों के घेरे में खड़ा करने वाली तस्वीरें सामने आई हैं। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में इलाज के बाद एक महिला की मौत हो गई। पत्नी की मौत के बाद पति के सामने सबसे बड़ी मुश्किल शव को घर ले जाने की थी, क्योंकि उसकी जेब में इतने पैसे नहीं थे कि वह शव वाहन की व्यवस्था कर सके।

बारिश के बीच पति अपनी पत्नी का शव स्ट्रेचर पर रखकर मेडिकल कॉलेज की पार्किंग में घंटों मदद का इंतजार करता रहा। पास ही करीब आठ साल की मासूम बेटी अपनी मां को खोने के गम में रोती रही। इसी दौरान शव के पास एक कुत्ते का बच्चा भी बैठा दिखाई दिया। यह पूरा दृश्य देखकर हर किसी का दिल दहल उठा।

इलाज के लिए ओरछा से झांसी आया था परिवार

मध्य प्रदेश के ओरछा निवासी राहुल आदिवासी की पत्नी रामवती काफी समय से बीमार थीं। राहुल के मुताबिक, वह अपनी पत्नी को इलाज के लिए ओरछा अस्पताल लेकर पहुंचे थे। हालत गंभीर होने पर डॉक्टरों ने उन्हें झांसी के महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया।

राहुल का कहना है कि आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के बावजूद वह किसी तरह पत्नी को लेकर झांसी पहुंचे। लेकिन मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों ने रामवती को मृत घोषित कर दिया। एक तरफ पत्नी की मौत का सदमा था, तो दूसरी तरफ शव को घर ले जाने के लिए पैसे नहीं थे।

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मां के शव के पास रोती रही मासूम बेटी

राहुल के साथ उसकी करीब आठ साल की बेटी नंदनी भी थी। मां की मौत के बाद मासूम कभी अपने पिता को देखती तो कभी मां के शव की तरफ। बारिश के बीच वह लगातार रोती रही। पिता भी पत्नी को खोने के दर्द और आर्थिक मजबूरी के बीच बेबस नजर आया।

स्ट्रेचर पर शव लेकर मदद का इंतजार

मेडिकल कॉलेज की पार्किंग में राहुल पत्नी का शव स्ट्रेचर पर रखकर घंटों बैठा रहा। बारिश होती रही, लेकिन उसकी मदद के लिए कोई व्यवस्था नहीं हो सकी। घटना की तस्वीरों ने गरीब परिवारों के लिए शव वाहन और एंबुलेंस की व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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सिपाही की नजर पड़ी तो मिली मदद

इसी दौरान ड्यूटी पर तैनात एक सिपाही की नजर राहुल और उसके परिवार पर पड़ी। सिपाही ने जब पूरा मामला समझा तो उसने एंबुलेंस बुलाने की व्यवस्था कराई। इसके बाद महिला के शव को उसके घर भेजा जा सका।

एक पुलिसकर्मी की पहल से परिवार को आखिरकार मदद मिल गई, लेकिन यह घटना कई सवाल छोड़ गई। क्या किसी गरीब परिवार को अपने परिजन का शव घर ले जाने के लिए भी पैसे के इंतजार में घंटों बैठना पड़ेगा? क्या ऐसे परिवारों के लिए तत्काल शव वाहन की व्यवस्था नहीं होनी चाहिए? यह तस्वीरें सिर्फ एक परिवार की बेबसी नहीं, बल्कि व्यवस्था की संवेदनशीलता पर भी सवाल खड़े करती हैं।

Location :  Jhansi

Published :  5 September 2026, 2:47 PM IST

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