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प्रतीकात्मक छवि (Img: Pinterest)
Jhansi: गिरोह का मास्टरमाइंड अरमान करीब डेढ़ साल पहले झांसी के गढ़िया फाटक इलाके में परिवार के साथ एक छोटे मकान में रहता था। उसके पिता ऑटो चलाते थे। साइबर ठगी करने वाले लोगों के संपर्क में आने के बाद उसकी जीवनशैली तेजी से बदलने लगी। कुछ ही समय में उसने प्रेमनगर क्षेत्र में दो फ्लैट खरीद लिए। इसके बाद झांसी के पॉश इलाके में भी मकान खरीदा। अब वह महंगी और लग्जरी कार से चलता था। अचानक बढ़ी संपत्ति और बदलती जीवनशैली ने पुलिस का ध्यान खींचा।
पुलिस ने अरमान से जुड़े कई बैंक खातों की जांच की। जांच के दौरान उसके पास करीब 20 करोड़ रुपये की संपत्ति होने की जानकारी सामने आई। पुलिस के मुताबिक, पिछले महीने उसके खातों में लगभग हर तीन दिन में 6.75 लाख रुपये तक की रकम क्रेडिट हो रही थी। पुलिस को शक है कि साइबर ठगी से मिलने वाली रकम को अलग-अलग बैंक खातों और दूसरे माध्यमों से घुमाया जाता था। इसके लिए गिरोह के लोग म्यूल खातों का इस्तेमाल करते थे।
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जांच में यह भी पता चला कि अरमान अपना गेमिंग पैनल चलाता था। इसी काम की आड़ में वह दूसरे लोगों के बैंक खातों का इंतजाम करता था। इन खातों में ठगी की रकम पहुंचाई जाती और बाद में उसे अलग-अलग माध्यमों से आगे भेजा जाता था।
अरमान ने ही सत्यम, अदनान, आदिल, जानपाल, अभिषेक और अर्चित जैसे लोगों को गिरोह से जोड़ा था। सभी को अलग-अलग जिम्मेदारियां दी गई थीं। पुलिस के मुताबिक सत्यम अरमान का सबसे करीबी था। उसका काम डेबिट कार्ड के जरिए रकम निकालना था। गिरोह का खुलासा होने के बाद अरमान फरार हो गया। पुलिस उसकी तलाश में जुटी है।
साइबर अपराधियों के बीच क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। इस गिरोह के लोग भी यूएसडीटी के जरिए पैसों को बदलने और आगे भेजने का काम करते थे। पुलिस के मुताबिक, इसके लिए यूमनी नाम के एप का इस्तेमाल किया जाता था।
साइबर विशेषज्ञों के अनुसार, यूएसडीटी की कीमत अमेरिकी डॉलर के आसपास बनी रहती है। बिटकॉइन जैसी क्रिप्टोकरेंसी के मुकाबले इसमें कीमत में उतार-चढ़ाव कम होता है। यही कारण है कि साइबर अपराधी इसे रकम को तेजी से एक जगह से दूसरी जगह भेजने के लिए इस्तेमाल करते हैं।
क्रिप्टो वॉलेट के जरिए रकम दूसरे देशों तक भी भेजी जा सकती है। इसमें हर लेनदेन के लिए पारंपरिक बैंक खाते की जरूरत नहीं होती। अलग-अलग वॉलेट का इस्तेमाल करने से रकम के वास्तविक स्रोत तक पहुंचना जांच एजेंसियों के लिए चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
प्रेमनगर पुलिस ने मई में चाइनीज गेमिंग वेबसाइट के पेमेंट सर्वर को हैक कर करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले गिरोह का भी खुलासा किया था। इस मामले में पुलिस ने 27 मई को स्कूलपुरा निवासी रागिब अहमद को गिरफ्तार किया था।
जांच के बाद पुलिस ने मिशन कंपाउंड निवासी सनी अमराया, पानी की टंकी निवासी सोहिल खान, नगरा निवासी अनुभव सिंह, ईसाई टोला निवासी दानिश खान, महावीरन निवासी सौरभ विश्वकर्मा और सुमेर नगर निवासी देवेश कुमार को भी गिरफ्तार किया था। पुलिस को हर्ष और सलाम की तलाश है।
पुलिस को जांच के दौरान पता चला कि दोनों मामलों में शामिल कई आरोपी प्रेमनगर और उसके आसपास के इलाकों से जुड़े हैं। इसी वजह से पुलिस को दोनों गिरोहों के बीच कनेक्शन होने का शक है। आशंका है कि एक गिरोह दूसरे गिरोह के लिए ठगी की रकम को अलग-अलग खातों और माध्यमों से खपाने का काम करता था। पुलिस अब दोनों मामलों के आरोपियों के बीच संपर्क और लेनदेन की जानकारी जुटा रही है।
साइबर ठगी की रकम को इधर-उधर करने के लिए आरोपियों ने बड़ी संख्या में म्यूल बैंक खातों का इस्तेमाल किया। पुलिस को अब तक ऐसे 114 खातों का पता चला है। इनमें से कई खाते प्रेमनगर के गढ़िया गांव, ईसाई टोला, सुमेर नगर और आसपास के इलाकों में रहने वाले लोगों के नाम पर खोले गए थे। इन खातों में ठगी की रकम मंगाई जाती थी और फिर अलग-अलग खातों या डिजिटल माध्यमों के जरिए आगे भेजी जाती थी।
पुलिस अब इन 114 खातों के लेनदेन की जांच कर रही है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि खाताधारकों को इसकी जानकारी थी या उनका इस्तेमाल किसी लालच या झांसे में करके किया गया।
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झांसी पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की आर्थिक गतिविधियों की जांच में जुटी है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि साइबर ठगी से हासिल रकम कहां-कहां निवेश की गई और गिरोह से जुड़े अन्य लोगों के पास कितनी संपत्ति है।
अधिकारियों की नजर म्यूल खातों, क्रिप्टो लेनदेन, गेमिंग पैनल और आरोपियों की संपत्तियों पर है। पुलिस को आशंका है कि जांच आगे बढ़ने पर साइबर ठगी के इस नेटवर्क से जुड़े और भी लोगों तथा करोड़ों रुपये के लेनदेन का खुलासा हो सकता है।
Location : Jhansi
Published : 29 August 2026, 7:20 PM IST