गोरखपुर का रामगढ़ ताल इतिहास, भूगोल और लोककथाओं का अनोखा संगम है। प्राचीन राप्ती नदी की छाड़न से बनी यह झील अब पर्यटन और विकास का प्रमुख केंद्र बन चुकी है। मल्टीमीडिया फाउंटेन, बोटिंग और फ्लोटिंग रेस्टोरेंट जैसी आधुनिक सुविधाओं के साथ यह स्थल पर्यटकों और स्थानीय लोगों का आकर्षण बना हुआ है।

रामगढ़ ताल (Img: Google)
Gorakhpur: गोरखपुर का रामगढ़ ताल अब केवल एक झील नहीं, बल्कि इतिहास, भूगोल और लोककथाओं का जीवंत संगम बन चुका है। यह स्थल प्राचीन ‘रामग्राम’ क्षेत्र से जुड़ा हुआ है, जहां कभी राप्ती नदी बहती थी। समय के साथ नदी का मार्ग बदल गया और पुराने पाट में जल भरने से विशाल छाड़न झील का निर्माण हुआ, जिसे आज हम रामगढ़ ताल के नाम से जानते हैं।
डाइनामाइट न्यूज़ संवददाता के अनुसार, इतिहासकारों और भू-वैज्ञानिकों के अनुसार, ईसा पूर्व छठी शताब्दी में गोरखपुर का क्षेत्र ‘रामग्राम’ के नाम से जाना जाता था। उस समय यहां कोलीय गणराज्य का प्रभाव था और राप्ती नदी के मार्ग परिवर्तन के कारण ताल का निर्माण हुआ। इसी वजह से इसे राप्ती नदी की छाड़न झील भी कहा जाता है।
रामगढ़ ताल से जुड़ी लोककथाएं भी कम रोचक नहीं हैं। एक प्रचलित कथा के अनुसार, यहां कभी एक समृद्ध नगर बसा था, जो एक ऋषि के श्राप से नष्ट हो गया और उसी स्थान पर यह विशाल ताल बन गया। भले ही इसे ऐतिहासिक प्रमाणों से जोड़कर देखा जाए या न देखा जाए, यह कथा स्थानीय संस्कृति और जनमानस में गहरी जड़ें जमा चुकी है।
पर्यटन विकास की दृष्टि से ताल की कहानी उतार-चढ़ाव से भरी रही है। 1980 के दशक में तत्कालीन मुख्यमंत्री वीर बहादुर सिंह ने इसे पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने का प्रयास किया, लेकिन उनके असामयिक निधन के कारण यह परियोजना ठंडे बस्ते में चली गई। हालांकि, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में इसे पुनः विकसित किया गया और इसे ‘पूर्वांचल का मरीन ड्राइव’ के रूप में पेश किया जा रहा है।
आज रामगढ़ ताल पर मल्टीमीडिया फाउंटेन, बोटिंग, फ्लोटिंग रेस्टोरेंट, वॉकिंग ट्रैक और आधुनिक लाइटिंग जैसी आधुनिक सुविधाएं विकसित की जा चुकी हैं। शाम ढलते ही यह क्षेत्र स्थानीय लोगों और पर्यटकों से गुलजार हो उठता है। साथ ही, राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के दिशा-निर्देशों के तहत ताल के संरक्षण, अतिक्रमण हटाने और जल गुणवत्ता सुधारने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
वर्तमान में रामगढ़ ताल गोरखपुर का प्रमुख पिकनिक स्पॉट, सांस्कृतिक केंद्र और पर्यटन आकर्षण बन चुका है। यहां प्राकृतिक सौंदर्य, प्राचीन इतिहास और आधुनिक विकास एक साथ देखने को मिलता है। राप्ती की पुरानी धारा से जन्मी यह झील अब न केवल पर्यटकों को आकर्षित करती है, बल्कि पूर्वांचल के विकास और पहचान का प्रतीक बनकर उभर रही है।