Gorakhpur: नीलकंठ महादेव के शिवलिंग पर 1000 साल पुराना राज? वैज्ञानिक जांच में सामने आएगा प्राचीन लेख का सच

गोरखपुर के सरयां तिवारी स्थित ऐतिहासिक नीलकंठ महादेव मंदिर के शिवलिंग पर अंकित अरबी-फारसी लेख की प्राचीनता अब वैज्ञानिक जांच से सामने आएगी। एएसआई टीम ने शिवलिंग का निरीक्षण कर नमूना लिया है। निचले हिस्से में ब्राह्मी लिपि के संकेत मिलने से इसके और भी प्राचीन होने की संभावना बढ़ गई है।

Gorakhpur : खजनी ब्लॉक के सरयां तिवारी गांव स्थित ऐतिहासिक नीलकंठ महादेव मंदिर का विशाल शिवलिंग इन दिनों अपनी प्राचीनता को लेकर चर्चा में है। शिवलिंग पर अंकित बताए जा रहे अरबी-फारसी लेख की उम्र का पता अब वैज्ञानिक जांच से चलेगा। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की टीम बुधवार को मंदिर पहुंची और बारीकी से निरीक्षण के बाद शिवलिंग का नमूना अपने साथ ले गई।

एएसआई टीम ने किया बारीकी से निरीक्षण

संस्कृति मंत्रालय के अधीन एएसआई के एपिग्राफी विभाग के निदेशक डॉ. के. मुनिरत्नम के निर्देश पर नागपुर स्थित एएसआई सर्वे कार्यालय से वरिष्ठ सुपरिटेंडिंग एपिग्राफिस्ट डॉ. मुहम्मद आफताब जेया मंदिर पहुंचे। उन्होंने शिवलिंग पर मौजूद लेख और उसके आसपास के हिस्सों का निरीक्षण किया।

प्रारंभिक जांच के बाद डॉ. जेया ने लेख को करीब एक हजार वर्ष पुराना प्रतीत होने की बात कही। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि शिवलिंग की वास्तविक प्राचीनता और लेख के कालखंड को लेकर अंतिम निष्कर्ष वैज्ञानिक जांच की रिपोर्ट आने के बाद ही सामने आएगा।

ब्राह्मी लिपि के संकेतों ने बढ़ाया रहस्य

शिवलिंग के निचले हिस्से में ब्राह्मी लिपि के संकेत दिखाई देने की बात भी सामने आई है। यही पहलू इस जांच को और महत्वपूर्ण बना रहा है। यदि वैज्ञानिक परीक्षण में इन संकेतों की प्राचीनता प्रमाणित होती है तो शिवलिंग का कालखंड अरबी-फारसी लेख से भी काफी पहले का हो सकता है।

डॉ. जेया ने करीब 2500 वर्ष पुराने अशोककालीन कालखंड से जुड़े होने की संभावना से भी इनकार नहीं किया है। हालांकि फिलहाल इसे केवल संभावना माना जा रहा है और वैज्ञानिक प्रमाण सामने आने के बाद ही इसकी पुष्टि हो सकेगी।

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मंदिर परिसर से मिले हैं पुराने पुरावशेष

बताया जाता है कि शिवलिंग पर ‘बिस्मिल्लाह-हिर्रहमान-निर्रहीम’ शब्द अंकित हैं। मंदिर क्षेत्र के इतिहास से जुड़े अन्य साक्ष्यों में गोरखपुर विश्वविद्यालय के पुरातत्व विभाग की ओर से पुण्यहवां पोखरे की खुदाई में मिले मुगलकालीन तलवारें, खंडित सूर्य प्रतिमा और अन्य पुरावशेष शामिल हैं। गांव में 12वीं शताब्दी की चपटी आयताकार ईंटें मिलने की बात भी सामने आती रही है।

वैज्ञानिक रिपोर्ट से खुलेगा प्राचीनता का राज

ग्राम प्रधान प्रतिनिधि एवं भाजपा के पूर्व मंडल अध्यक्ष अधिवक्ता धरणीधर राम त्रिपाठी ने बताया कि उन्होंने गोरखपुर में आयोजित भाजपा की ‘दिशा’ बैठक में नीलकंठ मंदिर के सर्वे का मुद्दा उठाया था। इसके बाद संस्कृति मंत्रालय स्तर से जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ी।

मंदिर में पूरे वर्ष श्रद्धालुओं की भीड़ रहती है। महाशिवरात्रि, सावन और पुरुषोत्तम मास में बड़ी संख्या में श्रद्धालु जलाभिषेक के लिए पहुंचते हैं। पर्यटन विभाग ने मंदिर के जीर्णोद्धार और धर्मशाला निर्माण सहित विभिन्न कार्यों के लिए 1.79 करोड़ रुपये का अनुदान भी दिया है। अब वैज्ञानिक रिपोर्ट बताएगी कि शिवलिंग और उस पर अंकित लेख का वास्तविक इतिहास कितना पुराना है।

Location :  Gorakhpur

Published :  1 October 2026, 1:20 PM IST

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