गाजियाबाद परिवहन विभाग पर बड़ा भ्रष्टाचार का आरोप: टैक्सी चालकों को जबरन महंगी दरों पर पैनिक बटन लगवाने का दबाव

गाजियाबाद परिवहन विभाग में पैनिक बटन को लेकर बड़े भ्रष्टाचार का खुलासा हुआ है। टैक्सी मालिक ने आरोप लगाया है कि 4-5 हजार का बटन 15-18 हजार में जबरन 'Nippon' कंपनी से लगवाया जा रहा है। डीएम से शिकायत के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई है।

Updated : 1 October 2026, 1:05 PM IST
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Ghaziabad: जिले के परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर गहरे भ्रष्टाचार के दलदल में फंसती नजर आ रही है। यहां टैक्सियों में लगाए जाने वाले पैनिक बटन के नाम पर एक बड़ा खेल चल रहा है, जहां अधिकारियों और चुनिंदा कंपनियों की मिलीभगत से गरीब और मध्यम वर्ग के वाहन चालकों का खुला आर्थिक शोषण किया जा रहा है। हालात यह हैं कि न्याय की गुहार लगाने के लिए पीड़ित दर-दर भटक रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार तंत्र की आंखें और कान दोनों बंद हैं।

महंगे पैनिक बटन लगवाने के लिए बनाया जा रहा मानसिक दबाव

मामले का खुलासा करते हुए पीड़ित टैक्सी मालिक और ड्राइवर दीपक गुप्ता ने बताया कि बाजार में सामान्य और अधिकृत कंपनियां महज 4 हजार से 5 हजार रुपये के भीतर पैनिक बटन उपलब्ध करा रही हैं। इसके विपरीत, 'निप्पन ऑडियोट्रॉनिक्स प्राइवेट लिमिटेड' (Nippon Audiotronix Pvt. Ltd.) नामक कंपनी द्वारा यही उपकरण 15 हजार से 18 हजार रुपये के भारी-भरकम दाम पर बेचे जा रहे हैं। जब चालकों ने भारी कीमत से बचने के लिए दूसरी कंपनियों से ये उपकरण लगवाने की पहल की, तो परिवहन विभाग के अधिकारियों ने उन पर अवांछित दबाव बनाना शुरू कर दिया। विभाग का साफ फरमान है कि पैनिक बटन सिर्फ 'निप्पन ऑडियोट्रॉनिक्स' से ही लगवाए जाएं।

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'Rosmerta' जैसी अन्य वैध कंपनियों के विकल्पों को किया जा रहा दरकिनार

नियमों के दायरे में रहते हुए वाहन चालकों के पास अन्य बेहतर और किफायती विकल्प भी मौजूद हैं। पीड़ित का कहना है कि वे 'रोसमर्टा ऑटोमेक लिमिटेड' (Rosmerta Autotech Limited) जैसी अन्य अधिकृत कंपनियों से भी आसानी से पैनिक बटन लगवा सकते हैं, जहां दाम बेहद उचित हैं। इसके बावजूद, परिवहन विभाग के अधिकारी किसी एक खास कंपनी को लाभ पहुंचाने की नीयत से चालकों का रास्ता रोक रहे हैं। यह खुला सिंडिकेट राज इस बात का सबूत है कि विभाग के भीतर किस हद तक भ्रष्टाचार की जड़ें मजबूत हो चुकी हैं।

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डीएम को पत्र लिखने के बाद भी न्याय नहीं

इस तानाशाही और आर्थिक उत्पीड़न के खिलाफ पीड़ित दीपक गुप्ता ने हिम्मत जुटाकर जिलाधिकारी (DM) को लिखित शिकायत पत्र भी सौंपा। उन्होंने उच्चाधिकारियों से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की थी। हालांकि, विडंबना यह है कि तमाम शिकायतों के बावजूद प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। पीड़ित की आवाज को दबाया जा रहा है और इस पूरे भ्रष्टाचार पर पर्दा डालने की कोशिश की जा रही है। जब तक इस मनमाने रवैये के खिलाफ सख्त प्रशासनिक डंडा नहीं चलेगा, तब तक गाजियाबाद के वाहन चालकों का यूं ही शोषण होता रहेगा।

Location :  Ghaziabad

Published :  1 October 2026, 1:05 PM IST

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