गोरखपुर में जमीनी विवाद को लेकर मौत का मामला सामने आया है। 8 दिसंबर को मारपीट में घायल हुए युवक की मौत हो गई है। जिससे ग्रामीणों में आक्रोश व्याप्त है। परिजनों ने घटना के लिए दरोगा पर आरोप लगाए हैं।

मृतक के शोकाकुल परिजन
Gorakhpur: जनपद के रामगढ़ताल थाना क्षेत्र के महेवा फलमंडी निवासी अनिल साहनी की जमीनी विवाद में हुई मारपीट के बाद इलाज के दौरान मौत हो गई। घटना 8 दिसंबर की है, जब दबंगों द्वारा की गई पिटाई में अनिल गंभीर रूप से घायल हो गया था। करीब डेढ़ महीने तक चले इलाज के बाद गुरुवार को अनिल ने दम तोड़ दिया।
इस मामले में परिजनों ने फलमंडी चौकी प्रभारी दरोगा पंकज पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि उन्होंने आरोपियों से मिलीभगत कर मामले को शुरू से ही हल्का रखने की कोशिश की, जिसका खामियाजा आज एक परिवार को भुगतना पड़ा।
परिजनों के अनुसार, अनिल साहनी के पास महेवा में 28 डिसमिल जमीन है, जो उनकी दादी चनजोता के नाम दर्ज है। आरोप है कि दादी के भतीजों ने बहला-फुसलाकर जमीन अपने नाम लिखवा ली, जिसके बाद अनिल साहनी ने न्यायालय की शरण ली। मामला कोर्ट में विचाराधीन है।
8 दिसंबर को दादी के चार भतीजे अमित, रवि, धर्मेन्द्र और अतुल जमीन पर कब्जा करने पहुंचे। सूचना मिलने पर अनिल साहनी अपनी पत्नी शारदा और मां कमली देवी के साथ मौके पर पहुंचे, जहां चारों आरोपियों ने मिलकर अनिल पर लाठी-डंडों से हमला कर दिया। पत्नी शारदा के साथ भी मारपीट की गई। अनिल को अधमरा छोड़कर आरोपी फरार हो गए।
परिजनों का आरोप है कि सूचना देने के बावजूद फलमंडी चौकी प्रभारी दरोगा पंकज ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया। केवल अनिल का मेडिकल कराया गया, जबकि घायल पत्नी का मेडिकल तक नहीं कराया गया। रामगढ़ताल थाने में भी गंभीर धाराओं के बजाय हल्की धारा में एनसीआर दर्ज कर दी गई।
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अनिल की हालत बिगड़ने पर पहले जिला अस्पताल और फिर लखनऊ पीजीआई रेफर किया गया। 10 दिसंबर को परिजनों ने एसएसपी से शिकायत कर धारा बढ़ाने की मांग की थी, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। आखिरकार 29 जनवरी को अनिल साहनी की मौत हो गई।
मृतक की पत्नी शारदा का रो-रोकर बुरा हाल है। उनका कहना है कि दरोगा की लापरवाही और मिलीभगत के कारण उनके पति की जान चली गई। उनके दो बेटियां और एक बेटा हैं, जिनके भरण-पोषण का संकट खड़ा हो गया है।
परिजनों ने दरोगा पंकज के खिलाफ कार्रवाई, चारों आरोपियों पर हत्या का मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तारी की मांग की है। अब सभी की निगाहें इस पर टिकी हैं कि वरिष्ठ अधिकारी इस गंभीर मामले में क्या कदम उठाते हैं।