दहेज के लिए विवाहिता की हत्या पड़ी भारी, पति समेत तीन दोषियों को मिली ये सजा

दहेज की मांग और प्रताड़ना के गंभीर मामले में गोरखपुर की अदालत ने सख्त फैसला सुनाया है। विवाहिता की हत्या के मामले में पति समेत तीन लोगों को दोषी ठहराते हुए कठोर कारावास की सजा दी गई है। इतना ही नहीं, तीनों दोषियों पर जुर्माना भी लगाया गया है।

Gorakhpur: उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में दहेज हत्या के एक मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। विवाहिता की हत्या के मामले में पति समेत तीन आरोपियों को दोषी करार देते हुए प्रत्येक को 10-10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई है। इसके साथ ही तीनों दोषियों पर कुल 30 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। इस तरह मामले में दोषी पाए गए तीनों लोगों को जेल की सजा के साथ आर्थिक दंड भी भुगतना होगा।

अदालत के इस फैसले को दहेज उत्पीड़न और महिलाओं के खिलाफ अपराध करने वालों के लिए कड़ा संदेश माना जा रहा है।

वर्ष 2014 के मामले में कोर्ट का फैसला

पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, मामला वर्ष 2014 का है। गोला थाना क्षेत्र के जिरकिटा दीगर गांव में दहेज हत्या की घटना के संबंध में पुलिस ने मुकदमा अपराध संख्या 310/2014 दर्ज किया था। मामले में भारतीय दंड विधान की धारा 304बी, 498ए और 201 तथा दहेज प्रतिषेध अधिनियम की धारा 3/4 के तहत मुकदमा दर्ज कर विवेचना की गई थी।

दहेज हत्या मामले में अदालत का कड़ा रुख

 

इनको मिली सजा

इस मामले में अभियुक्त प्रदीप साहनी पुत्र रामलखन साहनी, रामलखन साहनी पुत्र मानिक राम और बदामी देवी पत्नी रामलखन साहनी, निवासी जिरकिटा दीगर थाना गोला, को आरोपी बनाया गया था। सुनवाई के दौरान न्यायालय में प्रस्तुत साक्ष्यों और अभियोजन पक्ष की दलीलों के आधार पर तीनों को दोषी करार दिया गया।

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तीनों दोषियों को मिली ये सजा

मामले की सुनवाई अपर सत्र न्यायाधीश (एएसजे)/पीसी-2 गोरखपुर की अदालत में हुई। न्यायालय ने तीनों दोषियों को 10-10 वर्ष के कठोर कारावास और 10-10 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। इस तरह तीनों पर कुल 30 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है।

पुलिस महानिदेशक उत्तर प्रदेश की ओर से चलाए जा रहे ऑपरेशन कनविक्शन अभियान के तहत वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक गोरखपुर के निर्देशन में इस मुकदमे की प्रभावी पैरवी की गई। थाना गोला के पैरोकार और मॉनिटरिंग सेल ने लगातार मामले की निगरानी करते हुए न्यायालय में प्रभावी पैरवी सुनिश्चित की, जिसके परिणामस्वरूप आरोपियों को सजा दिलाने में सफलता मिली।

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इस मामले में दोषसिद्धि सुनिश्चित कराने में सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता (एडीजीसी) धर्मेंद्र दुबे और नितिन मिश्रा का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा। पुलिस ने इसे ऑपरेशन कनविक्शन के तहत न्यायालय में प्रभावी पैरवी का परिणाम बताया है।

Location :  Gorakhpur

Published :  4 November 2026, 11:12 PM IST

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