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गाजियाबाद में पाकिस्तान के लिए कथित जासूसी करने वाले नेटवर्क पर SIT ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 3 और लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें एक नाबालिग भी शामिल है। जांच में रेलवे स्टेशन, सुरक्षा ठिकानों और रणनीतिक जगहों की फोटो-वीडियो पाकिस्तान भेजने, सोलर-सिम CCTV कैमरे लगाने और विदेशी हैंडलर्स से संपर्क जैसी गंभीर बातें सामने आई हैं।
पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार किया
Ghaziabad: गाजियाबाद में देश विरोधी गतिविधियों के एक कथित नेटवर्क का खुलासा ऐसा हुआ है, जिसने सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा दी है। मामला सिर्फ फोटो या वीडियो भेजने तक सीमित नहीं दिख रहा, बल्कि जांच में ऐसी परतें खुल रही हैं जो सीधे रणनीतिक ठिकानों की निगरानी, विदेशी हैंडलर्स के संपर्क और साजिशन नेटवर्क खड़ा करने की तरफ इशारा कर रही हैं। इसी कड़ी में SIT ने 3 और लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें एक नाबालिग भी शामिल है। पुलिस के मुताबिक, ये लोग रेलवे स्टेशन, सुरक्षा बलों के ठिकानों और संवेदनशील जगहों की तस्वीरें व वीडियो बनाकर पाकिस्तान तक पहुंचा रहे थे। अब तक इस पूरे मामले में अलग-अलग जगहों से 15 लोगों के पकड़े जाने की पुष्टि विश्वसनीय रिपोर्टों में सामने आई है, जबकि पूछताछ और हिरासत का दायरा इससे बड़ा बताया जा रहा है।
सुहेल से शुरू हुई जांच, नेटवर्क में जुड़ते गए नाम
जांच एजेंसियों के मुताबिक, इस गैंग का सरगना सुहेल मलिक उर्फ रोमियो है, जिसे पहले पकड़ा गया था। उसके मोबाइल से रेलवे स्टेशनों और सुरक्षा प्रतिष्ठानों की कई फोटो-वीडियो मिलने के बाद केस ने बड़ा मोड़ लिया। पूछताछ में सामने आया कि एक व्हाट्सऐप नेटवर्क के जरिए अलग-अलग युवकों और युवतियों को जोड़ा गया था। इनमें कुछ लोग पैसे के लालच में इस काम में शामिल हुए। शुरुआती जांच में यह भी सामने आया कि संवेदनशील जगहों की तस्वीरों के बदले कुछ हजार रुपये तक दिए जाते थे। पुलिस को विदेशी नंबरों, खासकर पाकिस्तान स्थित हैंडलर्स से चैट और कॉलिंग के संकेत भी मिले हैं, जबकि मलेशिया, यूके और सऊदी लिंक की भी जांच चल रही है।
सोलर कैमरों से लाइव निगरानी का एंगल सबसे गंभीर
इस केस का सबसे चौंकाने वाला हिस्सा सोलर-सिम आधारित CCTV कैमरों की बरामदगी है। जांच में सामने आया कि दिल्ली कैंट और सोनीपत रेलवे स्टेशन के पास ऐसे कैमरे लगाए गए थे, जिनका एक्सेस विदेश में बैठे लोगों तक था। पुलिस का शक है कि इन कैमरों के जरिए लाइव गतिविधियां देखी जा रही थीं। ताज़ा रिपोर्टों के मुताबिक आरोपियों ने पूछताछ में माना कि उन्हें रणनीतिक जगहों पर कैमरे लगाने के बदले अलग से पैसे मिलते थे। इसी एंगल ने इस मामले को साधारण जासूसी से आगे बढ़ाकर संगठित निगरानी नेटवर्क की शक्ल दे दी है। अब कैमरों को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा जा रहा है और एजेंसियां उन सभी जगहों की पड़ताल कर रही हैं, जहां-जहां ऐसे उपकरण लगाए गए हो सकते हैं।
देशभर में फैला नेटवर्क, जांच अभी और गहराएगी
पुलिस और जांच एजेंसियों का मानना है कि यह नेटवर्क सिर्फ गाजियाबाद तक सीमित नहीं है। हापुड़, दिल्ली-एनसीआर और दूसरे शहरों तक इसके तार जुड़ते दिख रहे हैं। कुछ रिपोर्टों में युवाओं को ब्रेनवॉश कर इस नेटवर्क में जोड़ने और आगे दूसरे राज्यों में कैमरे लगाने की तैयारी की बात भी सामने आई है। यही वजह है कि अब यूपी पुलिस, ATS, दिल्ली पुलिस और दूसरी एजेंसियां मिलकर इस पूरे मॉड्यूल की तह तक जाने में जुटी हैं। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि इस व्हाट्सऐप और कैमरा नेटवर्क के पीछे असली मास्टरमाइंड कौन-कौन हैं और आखिर कितनी संवेदनशील जानकारी सरहद पार पहुंच चुकी है।