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खुदाई में निकला मटकों भरा कुषाणकालीन खजाना (फोटो सोर्स- इंटरनेट)
Firozabad: उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। थाना नारखी क्षेत्र के कोटला गांव स्थित ऐतिहासिक वनखंडेश्वर महादेव मंदिर में खुदाई के दौरान मिले करीब 40 से 45 किलोग्राम प्राचीन कुषाणकालीन तांबे के सिक्के रहस्यमय ढंग से गायब हो गए हैं। इस बहुमूल्य खजाने के गायब होने के बाद अब प्रशासनिक गलियारों से लेकर पुलिस और पुरातत्व विभाग तक हड़कंप मच गया है। मामले में नया मोड़ तब आया जब एसडीएम सदर ने राजस्व विभाग की भूमिका पर स्थिति स्पष्ट की। फिलहाल, डीएम ने इस पूरे प्रकरण की जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
यह पूरा मामला मई 2025 का है, जब वनखंडेश्वर महादेव मंदिर में पर्यटन विकास के अंतर्गत जीर्णोद्धार और नींव की खुदाई का कार्य चल रहा था। इसी दौरान जमीन के नीचे से मिट्टी के दो मटके निकले, जो भारी मात्रा में प्राचीन सिक्कों से भरे हुए थे। इन सिक्कों का कुल वजन करीब 40 से 45 किलोग्राम आंका गया था।
खजाना मिलने के बाद मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष शैलेंद्र प्रताप ने इसकी विधिवत सूचना राज्य पुरातत्व विभाग की आगरा इकाई को दी। 22 मई 2025 को पुरातत्व विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच की और पुष्टि की कि ये उच्च कोटि के तांबे के सिक्के हैं, जो उत्तर कुषाण काल (तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व) के हैं।
इस पूरे मामले में पुरातत्व विभाग और संबंधित पक्षों की बड़ी लापरवाही सामने आई है। प्रारंभिक जांच के बाद पुरातत्व विभाग की टीम कुछ सिक्कों को नमूने के तौर पर अपने साथ ले गई, लेकिन बाकी बचे भारी मात्रा में सिक्कों को बिना किसी सुरक्षा के मंदिर की ही एक कोठरी में बोरी में भरकर छोड़ दिया गया। यह पूरा खजाना मंदिर ट्रस्ट की सुपुर्दगी में दे दिया गया था। इसके बाद जून 2025 में जब विभाग की टीम दोबारा बाकी के सिक्के लेने पहुंची, तो वहां से सिक्कों से भरी पूरी बोरी ही गायब थी।
सिक्के गायब होने के इस गंभीर प्रकरण पर स्थिति स्पष्ट करते हुए एसडीएम सदर सत्येंद्र सिंह ने एक बड़ा बयान दिया है, जिससे मामले में नया मोड़ आ गया है। एसडीएम ने साफ तौर पर कहा कि इस पूरे मामले में राजस्व विभाग को किसी भी स्तर पर न तो कोई लिखित जानकारी दी गई थी और न ही कोई मौखिक सूचना मिली थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्तमान में राजस्व विभाग के पास एक भी सिक्का मौजूद नहीं है।
45 किलो ऐतिहासिक सिक्के गायब होने के बाद अब कोई भी विभाग जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं है और सब एक-दूसरे पर पल्ला झाड़ रहे हैं:
मंदिर ट्रस्ट: अध्यक्ष शैलेंद्र प्रताप का कहना है कि सिक्के गायब होने की जानकारी मिलते ही पुलिस को तहरीर दी गई थी, लेकिन पुलिस ने मुकदमा दर्ज नहीं किया। ग्रामीणों को दिखाने के लिए इसे ठेकेदार की निगरानी में रखा गया था।
पुरातत्व विभाग: तत्कालीन अधिकारी कृष्ण मोहन दुबे (वर्तमान में गोरखपुर तैनात) और आगरा इकाई के अधिकारी ज्ञानेंद्र रस्तोगी का कहना है कि उनका काम सिर्फ सिक्कों की प्राचीनता बताना था, उन्हें संरक्षित करने का काम संग्रहालय का है। उन्होंने उस समय सिक्कों को पुलिस मालखाने में रखवाने की सलाह दी थी।
पुलिस विभाग: नारखी थानाध्यक्ष राकेश गिरी ने बताया कि मामला एक साल से पुराना है और सिक्के कभी पुलिस को सौंपे ही नहीं गए थे। मंदिर परिसर से सिक्के गायब होने की सूचना पर संदिग्ध ठेकेदार पवन से पूछताछ की गई थी, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। उन्होंने थाने में किसी भी तरह की तहरीर आने से इंकार किया है।
अगर संबंधित जिम्मेदारों ने समय रहते लापरवाही न बरती होती और इन बहुमूल्य सिक्कों को सुरक्षित कर लिया होता, तो यह भारतीय संस्कृति के इतिहास की कई बिखरी कड़ियों को जोड़ने में मददगार साबित होते। कुषाण काल की संस्कृति, धातु कला और तत्कालीन व्यापारिक इतिहास को समझने के लिए यह प्राचीन सिक्के एक बहुत बड़ा जरिया बन सकते थे, जिसे लापरवाही के कारण गंवा दिया गया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी (डीएम) संतोष कुमार शर्मा ने सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि यह मामला बेहद गंभीर है और इसकी पूरी जांच कराई जाएगी। डीएम ने स्पष्ट किया कि अगर जांच में किसी भी स्तर से लापरवाही या फिर गबन जैसा कोई मामला सीधे तौर पर किसी अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ सामने आता है, तो उस पर सख्त कार्रवाई के लिए शासन को लिखा जाएगा। इसके अलावा, यदि किसी अन्य बाहरी व्यक्ति का दोष पाया जाता है, तो उसके खिलाफ तुरंत प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई जाएगी।
Location : Firozabad
Published : 18 June 2026, 4:30 PM IST
Topics : Ancient Coins Missing Firozabad Coin Theft Kushan Era Treasure UP Archaeology Negligence Vankhandeshwar Mahadev Temple
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