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मुजफ्फरनगर के सरकारी अस्पताल के एआरटी सेंटर में एचआईवी पॉजिटिव युवक की शादी की इच्छा ने भावनाओं और स्वास्थ्य सुरक्षा के बीच बड़ा सवाल खड़ा कर दिया। समझाइश के बाद सेंटर ने युवक के लिए एचआईवी पॉजिटिव दुल्हन की तलाश का भरोसा दिया।
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Muzaffarnagar: सरकारी अस्पतालों में आमतौर पर बीमारी और इलाज की बातें होती हैं, लेकिन मुजफ्फरनगर के स्वामी कल्याण देव जिला चिकित्सालय के एंटी-रेट्रोवायरल थेरेपी यानी एआरटी सेंटर पर उस वक्त माहौल भावनात्मक और संवेदनशील हो गया, जब एचआईवी पॉजिटिव एक युवक अपनी प्रेमिका से शादी कराने की गुहार लेकर पहुंचा। उसकी आवाज में डर था, आंखों में उम्मीद और दिल में एक ही सवाल- क्या बीमारी प्यार पर भारी पड़ जाएगी?
इलाज के साथ आई ज़िंदगी की सबसे बड़ी मांग
एचआईवी का इलाज कराने के लिए एआरटी सेंटर पहुंचे युवक ने कर्मचारियों के सामने अपनी निजी ज़िंदगी का राज खोला। उसने बताया कि वह अपनी प्रेमिका से बेहद प्यार करता है और उससे शादी करना चाहता है। युवक की यह मांग सुनकर वहां मौजूद स्टाफ भी कुछ देर के लिए असहज हो गया, क्योंकि मामला सिर्फ भावनाओं का नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य और संक्रमण के खतरे से भी जुड़ा था।
आसान नहीं था फैसला
एआरटी सेंटर के विशेषज्ञों ने युवक को बेहद संयम और संवेदनशीलता के साथ समझाने की कोशिश की। उसे बताया गया कि अगर एचआईवी नेगेटिव पार्टनर से विवाह होता है, तो संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ सकता है। डॉक्टरों ने साफ किया कि यह सलाह युवक के खिलाफ नहीं, बल्कि उसकी प्रेमिका और समाज की सुरक्षा को ध्यान में रखकर दी जा रही है।
समझाने के बाद उठाया गया अनोखा कदम
काफी बातचीत और समझाइश के बाद युवक को यह बात समझ में आई। इसके बाद एआरटी सेंटर ने एक अनूठी और मानवीय पहल की। सेंटर ने युवक का पूरा बायोडाटा तैयार कराया और उसे भरोसा दिलाया कि उसके लिए एचआईवी पॉजिटिव विवाह योग्य युवती की तलाश की जाएगी, जिससे उसकी ज़िंदगी में अकेलापन न रहे और संक्रमण का खतरा भी न बढ़े।
समाज के लिए एक बड़ा संदेश
यह मामला सिर्फ एक युवक की शादी की इच्छा तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज को यह सोचने पर मजबूर करता है कि एचआईवी को आज भी किस तरह देखा जाता है। एआरटी सेंटर की यह पहल दिखाती है कि इलाज के साथ-साथ मरीजों की भावनाओं और भविष्य की चिंता भी ज़रूरी है। यह घटना स्वास्थ्य व्यवस्था के मानवीय चेहरे को सामने लाती है।