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प्रयागराज जाने वाली बसों का बदला रूट (IMG: Pinterest)
Pratapgarh: प्रयागराज में फाफामऊ गंगा पुल पर जाम की समस्या को देखते हुए लागू किया गया रूट डायवर्जन अब परिवहन निगम और यात्रियों दोनों के लिए परेशानी का सबब बनता जा रहा है। बड़े और भारी वाहनों के लिए लागू डायवर्जन के चलते प्रतापगढ़ से प्रयागराज जाने वाली रोडवेज बसों को सोरांव, सहसों और झूंसी के रास्ते भेजा जा रहा है। इससे जहां यात्रियों को पहले के मुकाबले अधिक किराया देना पड़ रहा है, वहीं सफर में भी काफी अतिरिक्त समय लग रहा है।
रूट बदलने का सीधा असर यात्रियों की जेब पर पड़ा है। पहले प्रतापगढ़ से प्रयागराज तक रोडवेज बस का किराया 93 रुपये था, लेकिन डायवर्जन के बाद सफर लंबा होने से किराया बढ़कर 120 रुपये हो गया है। यानी यात्रियों को एक तरफ के सफर में ही 27 रुपये अतिरिक्त खर्च करने पड़ रहे हैं। किराए में बढ़ोतरी के साथ सफर का समय भी बढ़ गया है। यात्रियों का कहना है कि अब प्रयागराज पहुंचने में पहले की तुलना में काफी ज्यादा वक्त लग रहा है।
परिवहन निगम के अधिकारियों के मुताबिक, डायवर्जन का असर बसों में यात्रियों की संख्या और निगम की कमाई पर भी दिखाई दे रहा है। प्रयागराज जाने वाले कई यात्री अब सोरांव तक ही रोडवेज बस से सफर कर रहे हैं। इसके बाद वे निजी साधनों से प्रयागराज या अपने दूसरे गंतव्य तक पहुंच रहे हैं। प्रतापगढ़ से सोरांव तक रोडवेज बस का किराया करीब 56 रुपये है। ऐसे में कुछ यात्री लंबा रूट और ज्यादा किराया देने के बजाय सोरांव उतरकर आगे का सफर दूसरे साधनों से पूरा करना ज्यादा सुविधाजनक समझ रहे हैं।
इस रूट डायवर्जन का असर सिर्फ प्रतापगढ़ डिपो की बसों तक सीमित नहीं है। अधिकारियों के अनुसार लखनऊ जाने वाली बसों के संचालन पर भी इसका प्रभाव पड़ रहा है। आलमबाग, चारबाग और रायबरेली डिपो की बसों को भी बदले हुए रूट से गुजरना पड़ रहा है। परिवहन निगम के अधिकारियों का कहना है कि लंबे रूट और यात्रियों के सोरांव में उतरने के कारण इन बसों की आमदनी भी प्रभावित हो रही है।
प्रतापगढ़ डिपो के एआरएम जयकरन ने प्रयागराज यातायात प्रशासन की व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि रोडवेज की सरकारी बसों को फाफामऊ पुल से गुजरने से रोका जा रहा है, जबकि निजी और अन्य भारी वाहनों को पुल से गुजरने की अनुमति दी जा रही है। एआरएम का कहना है कि यदि जाम और यातायात व्यवस्था को नियंत्रित करने के लिए डायवर्जन जरूरी है तो इसका पालन सभी वाहनों के लिए समान रूप से होना चाहिए।
एआरएम जयकरन के मुताबिक, मौजूदा व्यवस्था के कारण प्रतापगढ़ डिपो को रोजाना करीब 20 प्रतिशत राजस्व का नुकसान हो रहा है। उनका कहना है कि यात्रियों के सोरांव में उतरने से बसों को प्रयागराज तक मिलने वाली पूरी यात्री आय प्रभावित हो रही है। परिवहन निगम के लिए यह स्थिति इसलिए भी चिंता की वजह है क्योंकि प्रतापगढ़ से प्रयागराज के बीच रोजाना बड़ी संख्या में विद्यार्थी, कर्मचारी, मरीज और आम यात्री सफर करते हैं।
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रूट डायवर्जन का सबसे ज्यादा असर उन लोगों पर पड़ रहा है जिन्हें किसी निश्चित समय पर प्रयागराज पहुंचना जरूरी होता है। गंभीर मरीजों को अस्पताल तक पहुंचने में अतिरिक्त समय लग सकता है। वहीं विद्यार्थी और सरकारी कर्मचारी भी समय पर स्कूल, कॉलेज और कार्यालय पहुंचने के लिए पहले से ज्यादा समय लेकर निकल रहे हैं।
प्रतापगढ़ डिपो के एआरएम जयकरन ने यातायात प्रशासन से रोडवेज बसों को फाफामऊ गंगा पुल से ही संचालित करने की अनुमति देने की मांग की है। उनका कहना है कि आम यात्रियों की सुविधा और परिवहन निगम के राजस्व को देखते हुए सरकारी बसों के लिए राहत दी जानी चाहिए।
Location : Pratapgarh
Published : 15 September 2026, 2:24 PM IST