एसआरएन में बवाल: अस्पताल में डॉक्टरों और तीमारदारों के बीच खूनी बवाल, ओपीडी-इमरजेंसी ठप

प्रयागराज के स्वरूपरानी नेहरू अस्पताल में घायल महिला अधिवक्ता के इलाज को लेकर डॉक्टरों और तीमारदारों के बीच हिंसक झड़प हो गई। घटना के बाद डॉक्टरों ने ओपीडी और ट्रॉमा सेंटर बंद कर हड़ताल शुरू कर दी, जिससे हजारों मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

Post Published By: Asmita Patel
Updated : 20 May 2026, 3:06 PM IST
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Prayagraj: प्रयागराज का स्वरूपरानी नेहरू अस्पताल बुधवार की सुबह रणभूमि में बदल गया। ट्रॉमा सेंटर के बाहर चीख-पुकार, गुस्से में भरे तीमारदार, डॉक्टरों की नारेबाजी और अस्पताल परिसर में भारी पुलिस फोर्स सुबह होते-होते एसआरएन अस्पताल में ऐसा माहौल बन गया, जिसने हर किसी को दहला दिया। सड़क हादसे में घायल महिला अधिवक्ता के इलाज को लेकर शुरू हुआ विवाद देखते ही देखते हिंसक झड़प में बदल गया। आरोप है कि डॉक्टरों और अस्पताल कर्मचारियों ने तीमारदारों के साथ मारपीट की, जबकि डॉक्टरों का कहना है कि उनके साथ अभद्रता और हमला किया गया। हालात इतने बिगड़ गए कि डॉक्टरों ने ओपीडी और ट्रॉमा सेंटर की सेवाएं बंद कर दीं।

सुबह 5:30 बजे शुरू हुआ विवाद

जानकारी के मुताबिक झूंसी क्षेत्र की एक महिला अधिवक्ता सुबह सड़क हादसे में घायल हो गई थीं। हादसे की सूचना मिलते ही उनके परिजन और परिचित उन्हें लेकर करीब छह बजे एसआरएन अस्पताल पहुंचे। आरोप है कि ट्रॉमा सेंटर में मौजूद डॉक्टर उस समय सो रहे थे। जब तीमारदारों ने उन्हें जगाया तो दोनों पक्षों में कहासुनी शुरू हो गई। तीमारदारों का आरोप है कि डॉक्टरों ने घायल महिला के इलाज में लापरवाही बरती और सवाल पूछने पर अभद्र व्यवहार किया।

विवाद धीरे-धीरे इतना बढ़ गया कि ट्रॉमा सेंटर में अफरा-तफरी मच गई। आरोप लगाया गया कि अस्पताल के कुछ डॉक्टर और कर्मचारी मौके पर पहुंचे और तीमारदारों के साथ मारपीट शुरू कर दी। परिजनों का दावा है कि सर्जिकल ब्लेड और कैंची तक से हमला किया गया।

डॉक्टरों ने बंद कर दीं सेवाएं

घटना के बाद अस्पताल के डॉक्टरों में भारी आक्रोश फैल गया। डॉक्टरों का कहना है कि उनके साथ बदसलूकी और मारपीट की गई है। इसी के विरोध में उन्होंने ट्रॉमा सेंटर, ओपीडी और कई विभागों की सेवाएं बंद कर दीं। सुबह छह बजे के बाद से अस्पताल का कामकाज पूरी तरह प्रभावित हो गया। ओपीडी पर्ची काउंटर बंद होने से मरीजों का पंजीकरण नहीं हो सका। अस्पताल के बाहर लंबी कतारें लग गईं। मरीज और उनके परिजन घंटों धूप और गर्मी में परेशान होते रहे। कई मरीज ऐसे भी थे जो रातभर का सफर तय करके इलाज कराने प्रयागराज पहुंचे थे, लेकिन हड़ताल के कारण उन्हें बिना इलाज लौटने की नौबत आ गई।

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मरीजों की बढ़ी मुश्किलें

एसआरएन अस्पताल पूर्वांचल और आसपास के कई जिलों के मरीजों के लिए सबसे बड़ा सरकारी इलाज केंद्र माना जाता है। प्रयागराज के अलावा प्रतापगढ़, कौशांबी, चित्रकूट, मिर्जापुर और मध्य प्रदेश के रीवा से भी बड़ी संख्या में मरीज यहां पहुंचते हैं। बुधवार को जब अस्पताल की सेवाएं ठप हुईं तो सबसे ज्यादा परेशानी इन्हीं मरीजों को झेलनी पड़ी।अस्पताल पहुंचे कई मरीजों ने नाराजगी जताई। उनका कहना था कि भीषण गर्मी में लंबा सफर तय करके अस्पताल पहुंचे, लेकिन यहां इलाज बंद मिला। कुछ मरीज जमीन पर बैठकर डॉक्टरों के आने का इंतजार करते रहे, जबकि कई लोग मायूस होकर वापस लौट गए।

अस्पताल में पहुंची भारी पुलिस फोर्स

मारपीट और हंगामे की सूचना मिलते ही प्रशासन हरकत में आ गया। एडीएम सिटी सत्यम मिश्रा, एसडीएम, एसीपी और कई थानों की पुलिस मौके पर पहुंच गई। अस्पताल परिसर को पुलिस छावनी में बदल दिया गया। अधिकारियों ने दोनों पक्षों को शांत कराने की कोशिश की और पूरे मामले की जानकारी ली।

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मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने दिए जांच के आदेश

मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. वीके पांडेय ने कहा कि पूरे मामले को गंभीरता से लिया गया है। उन्होंने बताया कि घटना की जांच कराई जा रही है और जो भी दोषी पाया जाएगा उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन का कहना है कि अस्पताल की व्यवस्था जल्द सामान्य कराने की कोशिश की जा रही है। फिलहाल इस घटना ने एक बार फिर सरकारी अस्पतालों की सुरक्षा व्यवस्था, डॉक्टरों और तीमारदारों के बीच बढ़ते तनाव और इलाज व्यवस्था पर कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

Location :  Prayagraj

Published :  20 May 2026, 3:06 PM IST

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