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बदायूं के दातागंज में एक सरकारी जमीन पर निर्माण को लेकर विवाद छिड़ गया। अब एसडीएम और तहसीलदार की अलग-अलग रिपोर्टों ने प्रशासन की कार्यप्रणाली को कठघरे में खड़ा कर दिया है।
राजस्व अभिलेखों की खुली पोल
Budaun: उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले में बारात घर निर्माण का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। जिले के दातागंज तहसील क्षेत्र के ग्राम भगवानपुर का यह पूरा मामला है। आरोप है कि राजस्व अभिलेखों में श्रेणी-6 दर्ज गाटा संख्या-153 पर पक्का निर्माण कराया जा रहा है, जो नियमों के खिलाफ है।
ग्रामीणों का कहना है कि यह जमीन आम रास्ते के रूप में दर्ज है, लेकिन इसके बावजूद यहां स्थायी निर्माण किया जा रहा है। इस मामले को लेकर कई बार संबंधित अधिकारियों से शिकायत की गई, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। इसके बाद शिकायतकर्ता ने जनसुनवाई पोर्टल पर भी अपनी शिकायत दर्ज कराई। हालांकि, वहां भी निस्तारण को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।
आईजीआरएस पर दर्ज शिकायतों के निस्तारण में अलग-अलग अधिकारियों द्वारा दी गई रिपोर्टों में विरोधाभास सामने आया है। एक ओर उप जिलाधिकारी (एसडीएम) ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि बारात घर का निर्माण ग्राम पंचायत के प्रस्ताव के आधार पर किया जा रहा है। वहीं दूसरी ओर तहसीलदार ने अपनी आख्या में लिखा कि निर्माण कार्य ग्रामवासियों की सहमति से कराया जा रहा है। दोनों रिपोर्टों में अंतर होने से मामले में पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं।
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शिकायतकर्ता का दावा है कि ग्राम प्रधान ने अपने शपथ पत्र में किसी भी प्रस्ताव की जानकारी से साफ इनकार किया है। ऐसे में प्रशासनिक रिपोर्टों और वास्तविक स्थिति के बीच अंतर नजर आ रहा है, जिससे पूरे मामले पर संदेह और गहरा गया है।
राजस्व नियमों के अनुसार, श्रेणी-6 की जमीन सार्वजनिक उपयोग के लिए निर्धारित होती है, जैसे रास्ता या चकरोड। ऐसी जमीन पर बिना वैध प्रक्रिया के निर्माण कराना कानून का उल्लंघन माना जाता है।
शिकायतकर्ता ने उच्च अधिकारियों से मामले की निष्पक्ष जांच कराने, निर्माण कार्य को तुरंत रुकवाने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
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वहीं ग्रामीणों का कहना है कि जब जमीन का रिकॉर्ड स्पष्ट रूप से रास्ता दिखा रहा है, तो उस पर निर्माण कैसे हो रहा है। इस पूरे मामले ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।