जिंदा कर्मचारी, मुर्दा रिकॉर्ड, बलरामपुर PWD के बाबुओं पर अवैध वसूली का आरोप

लोक निर्माण विभाग में भ्रष्टाचार का एक ऐसा मामला सामने आया है जहाँ रिटायरमेंट के करीब पहुँच चुके एक कर्मचारी, अनुरुद्ध प्रताप तिवारी को सरकारी दस्तावेजों में मृत दिखा दिया गया। इस कागजी मौत की वजह से उनका वेतन रोक दिया गया है।

Balrampur: उत्तर प्रदेश के बलरामपुर स्थित लोक निर्माण विभाग  के प्रांतीय खंड में एक अत्यंत गंभीर और संवेदनशील प्रशासनिक अनियमितता का मामला प्रकाश में आया है। विभागीय कार्यप्रणाली की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगाते हुए, यहाँ कार्यरत एक जीवित कर्मचारी अनुरुद्ध प्रताप तिवारी को सरकारी अभिलेखों में मृत घोषित कर दिया गया। सेवानिवृत्ति के अंतिम पड़ाव पर पहुँच चुके कर्मचारी के लिए यह स्थिति तब और भयावह हो गई जब मानव संपदा पोर्टल पर हुई इस त्रुटि के कारण उनका वेतन बाधित हो गया।
इस पूरे प्रकरण में विभागीय स्तर पर एक संगठित भ्रष्टाचार की आशंका जताई जा रही है। पीड़ित कर्मचारी, जो स्वयं कर्मचारी संघ के जिला महामंत्री हैं, ने आरोप लगाया है कि मानव संपदा पोर्टल पर डेटा के साथ जानबूझकर छेड़छाड़ की गई ताकि सुधार के नाम पर अवैध वसूली की जा सके।
इस षड्यंत्र में डीडीओ सहायक मोहम्मद शफीक सहित कुछ अन्य कर्मियों की भूमिका को संदिग्ध माना जा रहा है, जो लंबे समय से एक ही पटल पर जमे हुए हैं। पूर्व में भी अधिकारियों को इस तरह के अनुचित दबाव और उगाही की शिकायतें प्राप्त हुई थीं, किंतु प्रभावी कार्रवाई के अभाव में यह सिंडिकेट निर्बाध रूप से सक्रिय बना रहा।
वर्तमान में, मामला उजागर होने के पश्चात अधिशासी अभियंता कुमार शैलेंद्र ने इसका कड़ा संज्ञान लिया है। विभाग ने इस फर्जीवाड़े की तह तक जाने के लिए एक विशेष जांच समिति का गठन कर दिया है। उच्च अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जांच में संलिप्त पाए जाने वाले किसी भी दोषी कर्मचारी या बाबू को बख्शा नहीं जाएगा और उनके विरुद्ध सख्त दंडात्मक एवं वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

Location :  Balrampur

Published :  7 May 2026, 12:42 PM IST

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