महराजगंज में अरविंद चौधरी मौत मामले में पुलिस ने इसे सड़क हादसा बताया, लेकिन परिजनों ने हत्या का आरोप लगाया। फरेंदा थाने में जमकर हंगामा हुआ और निष्पक्ष जांच की मांग उठी।

अरविंद केस में थाने पर उबाल
Maharajganj: उत्तर प्रदेश के महराजगंज के चर्चित अरविंद चौधरी मौत मामले में रविवार को उस समय बड़ा मोड़ आ गया, जब पुलिस की प्रारंभिक जांच में इसे सड़क हादसा करार दिया गया। पुलिस के इस निष्कर्ष से नाराज परिजनों और ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा और फरेंदा थाना परिसर देखते ही देखते हंगामे का केंद्र बन गया।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक घटनास्थल के निरीक्षण और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर यह मामला सड़क दुर्घटना का प्रतीत होता है। उनका कहना है कि किसी अज्ञात वाहन ने अरविंद चौधरी को टक्कर मारी, जिससे उनकी मौत हो गई। पुलिस का दावा है कि उपलब्ध साक्ष्य फिलहाल इसी ओर इशारा कर रहे हैं।
हालांकि, पुलिस की इस थ्योरी को मृतक के परिजनों ने सिरे से खारिज कर दिया है। परिजनों का आरोप है कि अरविंद चौधरी की सुनियोजित हत्या की गई है और मामले को सड़क हादसा बताकर सच्चाई छिपाने की कोशिश की जा रही है। उनका कहना है कि शरीर पर मिले चोट के निशान सामान्य दुर्घटना से मेल नहीं खाते, बल्कि किसी हमले की ओर संकेत करते हैं।
इसी आरोप को लेकर बड़ी संख्या में परिजन और ग्रामीण फरेंदा थाना पहुंच गए और जोरदार विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। देखते ही देखते थाने का माहौल तनावपूर्ण हो गया। आक्रोशित भीड़ ने पुलिस के खिलाफ नारेबाजी करते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की।
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स्थिति को बिगड़ता देख प्रशासन ने कई थानों की पुलिस फोर्स मौके पर बुला ली। अधिकारियों ने परिजनों को समझाने और शांत कराने की कोशिश की, लेकिन काफी देर तक हंगामा जारी रहा। पुलिस ने लोगों को भरोसा दिलाया कि मामले की हर पहलू से जांच की जाएगी।
घटनाक्रम ने एक बार फिर पुलिस की जांच प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि बिना पूरी जांच के मामले को हादसा करार देना जल्दबाजी हो सकती है।
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अब इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि अरविंद चौधरी की मौत के पीछे असली वजह क्या है- एक साधारण सड़क हादसा या फिर कोई गहरी साजिश। फिलहाल पुलिस जांच जारी है और सभी की नजर आगे आने वाली रिपोर्ट पर टिकी है।