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प्रतीकात्मक छवि (सोर्स- Pinterest)
Sitapur: उत्तर प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में फर्जी दस्तावेजों के सहारे नौकरी हासिल करने वाले शिक्षकों का मामला एक बार फिर गंभीर चर्चा का विषय बन गया है। फर्जी अंकपत्र और प्रमाणपत्रों के आधार पर वर्षों तक सरकारी नौकरी करने और लाखों रुपये का वेतन उठाने वाले इन शिक्षकों से रिकवरी न होने पर बेसिक शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। हालांकि विभाग ने सेवा समाप्ति और एफआईआर जैसी कार्रवाई की है, लेकिन सरकारी धन की वसूली और आपराधिक मामलों में सुस्ती व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवालिया निशान लगाती है।
डाइनामाइट न्यूज़ संवाददाता हिमांशु सिंह द्वारा दिये जानकारी के अनुसार, उत्तर प्रदेश के सभी 18 मंडलों में फर्जी प्रमाणपत्रों के सहारे नौकरी पाने वाले लगभग 1710 शिक्षकों के मामले सामने आए हैं। आंकड़ों के मुताबिक, सबसे ज्यादा मामले लखनऊ मंडल (261) और गोरखपुर मंडल (260) में पाए गए हैं। इसके अलावा देवीपाटन मंडल में 180, बस्ती मंडल में 182, आजमगढ़ मंडल में 177, प्रयागराज मंडल में 143, आगरा मंडल में 120, कानपुर मंडल में 111, वाराणसी मंडल में 49, विंध्याचल मंडल में 53, अलीगढ़ मंडल में 52, बरेली मंडल में 36, मेरठ मंडल में 33, अयोध्या मंडल में 25, सहारनपुर मंडल में 12, चित्रकूट मंडल में 8, मुरादाबाद मंडल में 6 और झांसी मंडल में 2 फर्जी शिक्षक चिह्नित किए गए हैं। इन सभी की सेवाएं समाप्त कर नोटिस जारी किए गए हैं, लेकिन रिकवरी की रफ्तार बेहद धीमी है।
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विभाग द्वारा केवल सेवा समाप्त कर देना और नोटिस जारी करना ही पर्याप्त नहीं माना जा रहा है। सवाल यह है कि वर्षों तक अवैध रूप से वेतन और सरकारी सुविधाएं लेने वाले इन लोगों से करोड़ों-अरबों रुपये की रिकवरी कौन करेगा और कब तक होगी? कई मामलों में देखा गया है कि अधिकारियों के तबादले की प्रक्रिया शुरू होते ही पुरानी फाइलें अचानक सक्रिय हो जाती हैं, जिससे विभागीय मंशा पर संदेह पैदा होता है। इसके अलावा, फर्जी प्रमाणपत्र तैयार करने वाले संस्थानों और संरक्षकों पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई जनता के सामने नहीं आई है।
फर्जी शिक्षकों का इतने लंबे समय तक बिना जांच के नौकरी करते रहना प्रशासनिक निगरानी तंत्र की बड़ी नाकामी को दर्शाता है। जनता के खून-पसीने की कमाई से दिए गए वेतन की एक-एक पाई की वसूली होना बेहद जरूरी है। यदि समय रहते प्रभावी रिकवरी और एफआईआर की ठोस पैरवी नहीं की गई, तो यह पूरी प्रक्रिया महज कागजी खानापूर्ति बनकर रह जाएगी। विभाग को यह सुनिश्चित करना होगा कि दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई के साथ-साथ वित्तीय क्षति की भरपाई भी जल्द से जल्द हो।
Location : Sitapur
Published : 25 September 2026, 10:37 AM IST
Topics : Basic shiksha vibhag Fake Documents Inquiry Fake Teachers UP Salary Recovery Scandal UP Primary Teachers
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