यूपी चुनाव से पहले बसपा में हलचल: आकाश आनंद मामले पर नरम रुख, नए चेहरों के कंधों पर संगठन की कमान

बहुजन समाज पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक पद से आकाश आनंद के हटने के बाद पार्टी में सांगठनिक फेरबदल और राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। मायावती के रुख और नए कोआर्डिनेटरों की नियुक्ति पर टिकी हैं सबकी नजरें।

Updated : 9 September 2026, 10:17 AM IST
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Lucknow: बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के राष्ट्रीय संयोजक पद से आकाश आनंद के हटने के बाद से उत्तर प्रदेश की राजनीति में सरगर्मी तेज हो गई है। पार्टी के भीतर और बाहर हर किसी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आगे चलकर आकाश आनंद का राजनीतिक रुख क्या होगा। इस घटनाक्रम ने पार्टी के भीतर संगठनात्मक बदलावों और रणनीतिक हलचलों को एक बार फिर केंद्र में ला दिया है।

निष्ठा और वफादारी की सियासत

राष्ट्रीय संयोजक पद से हटाए जाने के बाद आकाश आनंद पूरी तरह अनुशासित नजर आ रहे हैं। वह वर्तमान में बसपा सुप्रीमो मायावती के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से जारी होने वाले बयानों को लगातार साझा कर रहे हैं और पार्टी के प्रति अपनी अटूट निष्ठा प्रदर्शित कर रहे हैं। उनके ससुर अशोक सिद्धार्थ भी बसपा प्रमुख की नाराजगी को दूर करने और पार्टी के भीतर संतुलन बनाने के लिए इसी दिशा में प्रयास कर रहे हैं।

दूसरी ओर, पार्टी नेतृत्व ने संगठन को गति देने के लिए बड़ा कदम उठाते हुए दो युवा चेहरों- मोहित आनंद और नितिन सिंह को नया नेशनल कोआर्डिनेटर नियुक्त किया है। हालांकि, अंदरखाने के सूत्रों का कहना है कि अशोक सिद्धार्थ की तुलना में आकाश आनंद को लेकर पार्टी हाईकमान का रुख अभी भी काफी हद तक नरम और लचीला बना हुआ है।

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आंतरिक कलह और भविष्य के फैसले

पार्टी सूत्रों के मुताबिक, आकाश आनंद को पार्टी से पूरी तरह बाहर करने या निष्कासित करने जैसी किसी भी सख्त कार्रवाई पर आम सहमति नहीं बन सकी है। हालांकि उनसे संगठनात्मक संचालन से जुड़ी सभी अहम जिम्मेदारियां वापस जरूर ले ली गई हैं, लेकिन उन्हें पार्टी संगठन को मजबूत करने की गतिविधियों से नहीं रोका गया है। बसपा में आकाश के राजनीतिक भविष्य को लेकर अब अंतिम और सर्वोपरि फैसला पार्टी सुप्रीमो मायावती को ही करना है।

राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी जोरों पर है कि आकाश आनंद ने पार्टी के कुछ वरिष्ठ पदाधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए थे। इसी खींचतान के चलते उनके खिलाफ लामबंदी की गई थी। हालांकि, डैमेज कंट्रोल (नुकसान की भरपाई) की कवायद के तहत उनके छोटे भाई ईशान आनंद को मुख्य सेक्टर प्रभारी की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

विधानसभा चुनावों से पहले चुनौती और जनसमर्थन

आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों के लिहाज से बसपा में मचे इस घटनाक्रम और पारिवारिक कलह से पार्टी को नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है। मैदानी स्तर पर स्थिति यह थी कि कई स्थानीय प्रत्याशी खुद आकाश आनंद की जनसभाओं की लगातार मांग कर रहे थे। स्थिति यह थी कि सितंबर माह में पूर्वांचल के कई जिलों में उनकी ताबड़तोड़ जनसभाओं का कार्यक्रम भी पहले से तय किया जा चुका था।

इस घटनाक्रम के बाद आकाश के समर्थक सोशल मीडिया पर मुखर होकर उनकी वापसी की पुरजोर मांग कर रहे हैं। समर्थकों का सीधा आरोप है कि पार्टी के कुछ चुनिंदा पदाधिकारियों ने अपने निहित स्वार्थों के चलते पार्टी नेतृत्व को गुमराह किया है, जिसके कारण यह परिस्थितियां पैदा हुई हैं।

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नए चेहरों की ताजपोशी और रणनीतिक सीमाएं

बसपा द्वारा नए नेशनल कोआर्डिनेटर बनाए गए मोहित आनंद पहले से ही मध्य प्रदेश में पार्टी संगठन का कामकाज संभाल रहे हैं। वहीं, नितिन सिंह को पिछले साल आकाश के ससुर अशोक सिद्धार्थ के साथ पार्टी से बाहर कर दिया गया था, लेकिन बाद में उनकी पार्टी में वापसी हो गई थी। इससे पहले उन्हें हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में संगठन की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, और अब उन्हें पदोन्नत कर नेशनल कोआर्डिनेटर बना दिया गया है।

पार्टी सुप्रीमो मायावती के स्पष्ट दिशा-निर्देशों के अनुसार, इन दोनों नए कोआर्डिनेटरों को फिलहाल उत्तर प्रदेश के चुनावी क्षेत्र से दूर रखा गया है और वे यूपी चुनाव की प्रत्यक्ष गतिविधियों में शामिल नहीं होंगे।

Location :  Lucknow

Published :  9 September 2026, 10:17 AM IST

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