गोरखपुर की झाड़ियों में बेबस मासूम, ‘मां की मजबूरी’ या ‘मानवता पर कलंक’; खबर पढ़कर आपकी आंखों में आ जाएंगे आंसू
यह दृश्य केवल एक बच्चे की पीड़ा नहीं, बल्कि पूरे समाज की संवेदनाओं को आईना दिखाता प्रतीत हुआ। सुबह करीब 7 बजे कुछ ग्रामीण रोज की तरह टहलने निकले थे। तभी उन्हें झाड़ियों की ओर से हल्की रोने की आवाज सुनाई दी। जब उन्होंने झांक कर देखा तो गुलाबी तौलिए में लिपटा एक नवजात शिशु ठंडी जमीन पर पड़ा था।