सीवीसी की जांच से उठा बड़ा सवाल: किसने नहीं होने दी यूपी एटीएस के एएसपी राजेश साहनी सुसाइड केस की सीबीआई जांच?

डीएन संवाददाता

यूपी एटीएस के दिवंगत एएसपी राजेश साहनी की मौत का जिन्न एक बार फिर बोतल से बाहर निकल आया है। इस मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। सीबीआई निदेशक के पद से हटाये गये आलोक वर्मा के खिलाफ कैबिनेट सचिव के निर्देश पर केन्द्रीय सतर्कता आयोग ने विस्तृत जांच की है। इस रिपोर्ट के मुताबिक इस मामले में सीबीआई जांच की सिफारिश को जानबूझकर ठुकरा दिया गया। यूपी सीएम ने इस मामले में सीबीआई जांच की सिफारिश की थी। आखिर कौन हैं इस नापाक मंसूबे के पीछे? कौन नही चाहता था इस मामले की सीबीआई जांच हो? यदि सीबीआई जांच होती तो किसकी गर्दन फंसती? डाइनामाइट न्यूज़ एक्सक्लूसिव..

दिवंगत राजेश साहनी (फाइल फोटो)
दिवंगत राजेश साहनी (फाइल फोटो)

 

नई दिल्ली: 29 मई को यूपी के एटीएस मुख्यालय में उस समय कोहराम मच गया था जब 1992 बैच के तेज-तर्रार पीपीएस अफसर राजेश साहनी ने खुद को एटीएस मुख्यालय में ऑन ड्यूटी गोली से उड़ा लिया था। इसके बाद राजेश साहनी के साथियों में भारी गुस्सा देखा गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भारत सरकार को सीबीआई जांच की सिफारिश की थी। केन्द्र और राज्य दोनों जगहों पर भाजपा की सरकार होने के बावजूद सीबीआई जांच नही हुई तो लोगों को भारी आश्चर्य हुआ कि इतने हाई-प्रोफाइल मामले में सीबीआई जांच आखिर क्यों नही हो रही है। उस समय की आशंकाओं पर से अब बादल छंटे हैं। डाइनामाइट न्यूज़ आत्महत्या के दिन से लगातार यूपी एटीएस के इस बेहद चर्चित मामले के एक-एक पहलू को कवर कर रहा है। 

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राजेश के अंतिम संस्कार का दृश्य (फाइल फोटो) 

सीबीआई में आलोक वर्मा और राकेश अस्थाना के बीच छिड़ी जंग से अंदर की बातें बाहर निकल रही हैं। निदेशक पद से हटाये गये आलोक वर्मा के खिलाफ कैबिनेट सचिव के निर्देश पर केन्द्रीय सतर्कता आयोग ने एक विस्तृत जांच की है। 6 पन्ने की इस जांच रिपोर्ट पर केन्द्रीय सतर्कता आय़ुक्त केवी चौधरी, सतर्कता आय़ुक्त शरद कुमार और टीएम भसीन के हस्ताक्षर हैं। इन तीनों बड़ी हस्तियों की जांच में यह खुलासा हुआ है कि आलोक वर्मा ने इस केस की सीबीआई जांच नही होने दी और ऐसा करके उन्होंने यूपी पुलिस के बड़े अफसरों को बचाने का काम किया है। जांच रिपोर्ट के कालम सात के भाग दो में इसका जिक्र है। 

डाइनामाइट न्यूज़ को मिली जांच रिपोर्ट के मुताबिक सीबीआई के लखनऊ ब्रांच के अपर पुलिस अधीक्षक सुधांशु खरे ने बताया है कि आलोक वर्मा ने राजेश साहनी के आत्महत्या प्रकरण की सीबीआई जांच से मना कर दिया।

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आज तक राजेश की आत्महत्या एक रहस्यमय पहेली बनी हुई है। आखिर कौन है जिसने आलोक वर्मा पर दबाव डाला कि इसकी सीबीआई जांच न की जाये। किसके दवाब में आलोक वर्मा ने ऐसा किया। 

सवालों के जद में असीम अरुण

एटीएस के आईजी असीम अरुण की भूमिका जांच के दायरे में 

आत्महत्या के बाद लखनऊ से लेकर दिल्ली तक सारे अखबारों और चैनलों पर यही बात छायी थी कि राजेश को आत्महत्या के लिए उकसाया गया था। राजेश एटीएस में करोड़ों की खरीद में मचे भ्रष्टाचार के खिलाफ थे। उस समय मीडिया में राजेश के बॉस और एटीएस के आईजी असीम अरुण (IPS:UP:94) पर गंभीर सवाल खड़े हुए थे कि आत्महत्या से ठीक पहले राजेश..  असीम के सरकारी कमरे में गये थे और वहां दोनों के बीच तीखी नोकझोंक हुई थी। इसके तुरंत बाद राजेश ने खुद को गोली से उड़ा लिया था। राज्य पुलिस के आला अफसरों ने एडीजी लखनऊ जोन की देखरेख में एक कमेटी गठित कर मामले पर पर्दा डालने की कोशिश की थी लेकिन ये जिन्न ऐसा है कि बोतल में बंद होने का नाम ही नही ले रहा है.. एक बार फिर ये जिन्न इस कांड में पर्दे के पीछे बैठे जिम्मेदारों की कलई खोलने बाहर आ गया है। अब इस जांच के सामने आने के बाद चारों ओर हड़कंप मच गया है और इस मामले में सीबीआई जांच की मांग के दोबारा जोर पकड़ने की प्रबल आशंका जतायी जा रही है।  

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सीवीसी की 6 पेज की जांच रिपोर्ट 

 

 

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