यूपी का गालीबाज एसपी.. कुर्सी पर बैठते ही भूले पद की गरिमा

जय प्रकाश पाठक

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जहां प्रदेश में अधिकारियों को आम जनता के साथ अच्छा बर्ताव करने की लगातार नसीहतें दे रहे हैं वहीं दूसरी ओर अधिकारी सीएम की बात मानने को तैयार ही नही हैं। अंबेडकर नगर में बतौर एसपी तैनात मनबढ़.. गालीबाज और प्रमोटेड आईपीएस विपिन कुमार मिश्रा.. जिस भी जिले में ये जाते हैं वे वहां पूर्वाग्रह से ग्रस्त होकर जाते हैं। जमीनी हकीकत को न तो ये जानना चाहते हैं और नही जनता से अच्छा व्यवहार करना। डाइनामाइट न्यूज़ की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट...


अंबेडकर नगर: यूपी में नौकरशाही पूरी तरह बेलगाम हो चुकी है। यूपी के मुख्यमंत्री लगातार जनता से अच्छा बर्ताव करने के लिए अधिकारियों को प्रेरित कर रहे हैं लेकिन कुछ ऐसे भी अधिकारी हैं जिनके ऊपर मुख्यमंत्री के इन आदेशों का कोई असर नहीं होता दिख रहा है। कुछ नौकरशाहों ने प्रदेश में विभिन्न जगहों पर तैनाती से पहले ही यह मानसिकता बना रखी है कि जहां पर उनकी तैनाती की गई है वहां रहने वाले लोग चोर-उचक्के और नेतागिरी झाड़ने वाले लोफर हैं। 

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मनबढ़ और बेअंदाज..गालीबाज एसपी विपिन कुमार मिश्र

 

यूपी के अंबेडकर नगर का मामला

ताजा मामला यूपी के अंबेडकर नगर जिले का है। जहां के भाजपा सांसद हरिओम पांडे के प्रतिनिधि कृष्ण गोपाल ने बीते 31 अक्टूबर को जिले के पुलिस कप्तान विपिन कुमार मिश्रा के पास फोन कर अपनी बात रख रहे थे। दरअसल एक छेड़खानी के मामले में जालिम यादव नाम के शख्स को पुलिस ने 29 अक्टूबर को हिरासत में लिया था। अंबेडकर नगर के सांसद हरिओम पाण्डेय के प्रतिनिधि कृष्ण गोपाल ने पुलिस कप्तान से हुई बातचीत में ये कहा कि जालिम यादव पूरे मामले में निर्दोष है और मामले में हुई एक झड़प के मामले में उसे हिरासत में रखा गया है और 24 घंटे से ज्यादा बीत जाने के बाद भी उसे मजिस्ट्रेट के सामने पेश नहीं किया गया है।  

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पुलिस कप्तान ने अमर्यादित भाषा का किया इस्तेमाल

इस पर अंबेडकर नगर के पुलिस कप्तान भड़क जाते हैं और तमाम मर्यादाओं को ताक पर रखकर गाली गलौज की भाषा पर उतर आते हैं। उनका कहना है कि अंबेडकर नगर का हर आदमी या तो गुंडा है या फिर नेता है। अब जिले के पुलिस कप्तान ही जिले के सभी नागरिकों को अपराधी मान लेंगे तो फिर यहां की जनता का तो केवल भगवान ही मालिक है।

पूरे मामले में अहम बात यह है कि एक सांसद प्रतिनिधि के साथ जिले के पुलिस कप्तान ने जिस अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल किया, उसे सुनकर कोई भी शर्म से पानी-पानी हो जायें। यह पूरी घटना सामने आने के बाद एक बात तो तय है कि ऐसे मनबढ अफसर तो बिना किसी जांच के ही किसी भी आरोपी को मुल्जिम ठहरा देंगे।

बदतर हालात

नौकरशाहों की लोगों के प्रति इस तरह की मानसिकता से यह साफ पता चलता है कि उनका रवैया भी ऐसे लोगों के प्रति कैसा रहेगा। बिना सोच-विचार किये और क्षेत्र का दौरा किये बिना जनता के प्रति ऐसे ख्यालात रखना अधिकारियों की विचारधारा को दर्शाता है।   

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अगर किसी सांसद के प्रतिनिधि से किसी जिले का पुलिस कप्तान से गाली गलौज की भाषा में बात करें तो आम आदमी के साथ उसका बर्ताव कैसा होगा। इसका अंदाजा आप आसानी से लगा सकते हैं। यूपी के कुछ ऐसे भी अफसर हैं जो शायद कानून को अपने ठेंगे पर रखकर चलना अपनी शान समझते हैं। 

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