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नई दिल्लीः पितृ पक्ष सोमवार से शुरू हो चुका है। आज सुबह 7.17 बजे से पूर्णिमा शुरू हो गई है यह अगले दिन यानी मंगलवार को 8.22 तक रहेगी। आज से ही अगले 16 दिनों के लिए श्राद्ध पक्ष की शुरुआत हो गई है। इस दिनों जो भी अपने पितरों को पिंडदान करता है उसके घर में सुख शांति और पूर्वजों की कृपा बनी रहती है
पितृ पक्ष श्राद्ध पर ऐसे करें पितृों का तृपण, इन विधियों को अपनाएं

1. अपने पितरों का तर्पण यानी कि जलदान पिंडदान के रूप में जो पितरों को भोजन समर्पित किया जाता है उसी ही श्राद्ध कहते हैं।
2. पितृ पक्ष का श्राद्ध देव, ऋषि और पितृ ऋण के निवारण के लिए श्राद्ध कर्म है। इसके लिए यह जरूरी हो जाता है कि जो पूर्वजों के बताए मार्ग पर चलता है वहीं मुख्यतः अपने कर्म को भली-भांति निभाता है।
3. पूर्वजों की जिस दिन मृत्यु हुई है यानी हिंदी तिथि के अनुसार जब मृत्यु हुई हो श्राद्ध के लिए वहीं दिन उत्तम माना गया है।
4. श्राद्ध पर अपने पूर्वजों से कामना करें कि वो अब जिस भी रूप में हैं उन्हें सुख-शांति मिले। इसलिए इन 16 दिनों में विशेषतौर पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करनी चाहिए।
5. श्राद्ध करते समय सबसे पहले यम के प्रतीक यानी कौओं, कुत्तों और गाय के लिए भोजन का अंश निकालना चाहिए।

6. किसी भी पात्र में दूध, जल, तिल और पुष्प लेकर कुश और काले तिलों के साथ तीन बार तर्पण कर ऊं पितृदेवताभ्यो नमः का जाप करना चाहिए।
7. अपने बाएं हाथ में जल का पात्र लेकर और दाएं हाथ के अंगूठे को पृथ्वी की तरफ करते हुए उस पर जल डालकर तर्पण करना चाहिए। साथ ही जरूरतमंद को वस्त्र दान करना चाहिए।
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8. पुत्र, पौत्र, भतीजा, भांजा कोई भी श्राद्ध कर सकता है। अगर किसी के घर में पुरुष सदस्य नहीं है लेकिन पुत्री के कुल में हैं तो दामाद भी श्राद्ध कर सकते हैं।
9. यह हमेशा उलझन भरा रहता है कि क्या महिलाएं भी श्राद्ध कर सकती है तो यहां बता दें कि अगर जिस किसी के घर में पुरुष नहीं है तो वहां महिलाएं भी श्राद्ध कर सकती है।
10. नवीन मान्याताओं के अनुसार अपने पितृ और मातृ तुल्य लोगों का श्राद्ध महिलाएं कर सकती है।
किस दिन होगा किसका श्राद्ध

प्रतिपदा पर नाना-नानी का श्राद्ध, पंचमी पर मृत्यु अविवाहित हो गई हो, नवमी पर माता व अन्य महिलाओं का श्राद्ध, एकादशी व द्वादशी पर पिता, पितामाह का श्राद्ध, चतुर्दशी पर अकाल मृत्यु हुए पूर्वजों का श्राद्ध व अमावस्या पर ज्ञात-अज्ञात सभी पितृों का तर्पण कर श्राद्ध कर सकते हैं।
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इस तरह से पितृ पक्ष में अपने पूर्वजों का श्राद्ध करने से उनकी कृपा अपने बच्चों पर बनी रहती हैं और वो जिस भी रूप में जहां भी विराजमान है उनका तृपण करने मात्र से ही उनका भी कष्ट निवारण हो जाता है और वो अपनी पीढ़ियों को आशीर्वाद देते हैं।
Published : 24 September 2018, 12:47 PM IST
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