कानपुर: मनोकामना के लिए भक्तों ने बांधे मंदिर में ताले

डीएन संवाददाता

कानपुर चौक के सर्राफा बाजार स्थित बंगाली मोहल्ले में माता काली का सैकड़ो वर्ष पुराना मंदिर है जो ताला वाली मां के नाम से प्रसिद्ध है। ऐसी मान्यता है की जो लोग सच्चे मन से माता के दरबार आकर मंदिर में एक ताला बांधते है, उनकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती है।

मंदिर में ताला बांधते भक्त
मंदिर में ताला बांधते भक्त

कानपुर: चौक के सर्राफा बाजार स्थित बंगाली मोहल्ले में माता काली का सैकड़ो वर्ष पुराना मंदिर है जो ताला वाली मां के नाम से प्रसिद्ध है। इस मंदिर में नवरात्री के पावन अवसर पर भक्तों की भीड़ की तादात काफी बढ़ जाती है। इस मंदिर की मान्यता है की जो लोग सच्चे मन से माता के दरबार आकर मंदिर में एक ताला बांधते है उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती है। 

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ताला वाली माता की कहानी

डाइनामाइट न्यूज़  से बातचीत के दौरान मन्दिर के पुजारी रविन्द्र नाथ बनर्जी ने बताया कि माँ काली यहाँ कैसे विराजमान हुई ये आज तक कोई नहीं जान पाया। कहा जाता है कि  सदियों पहले एक महिला भक्त बहुत परेशान रहा करती थी, और वो नियम से इस मंदिर में सुबह पूजन के लिए आया करती थी। एक बार वो मंदिर के प्रांगण में ताला लगाने लगी तो उस समय के पुरोहित ने उससे इसके बारे पूछा तो उसका जबाब था कि माँ ने सपने में हमसे कहा था कि तुम एक ताला मेरे नाम से मेरे मंदिर प्रांगण में लगा देना तुम्हारी हर मुराद पूरी हो जायेगी। जिसके बाद से मन्दिर में मनोकामना मांग कर भक्त एक ताला भी लगा देते है और जब उनकी मनोकामना पूरी हो जाती है तभी वह ताला खोलने भी आते है।जिसके बाद से माँ काली का नाम ताला वाली देवी भी पड़ गया। 

मनोकामना पुरी होने पर भक्त चढ़ाते है चढ़ावा

ताला वाली माता के माता के दर्शन के लिए कानपुर ही नहीं वल्कि प्रदेश के कई जिलो से लोग माता के दर्शन के लिए आते हैं। मनोकामना पूरी होने के बाद यहा लोग ताला खोलने आते है वही कुछ लोग अपनी मनोकामना पुरी करने के लिए ताला लगाते हुए नजर आते हैं। भक्त अपनी मनोकामना पूरी होने के बाद नवमी के दिन इस मंदिर में बकरे की बलि देते है और इसे  प्रसाद के रूप में माता को अर्पित करते है।वहीं मन्दिर में खास बात ये है कि यहां दर्शन करने के बाद हर तरह की बाधाएं दूर हो जाती हैं।

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