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नई दिल्ली: नवरात्रि का पर्व देवी दुर्गा की पूजा-अर्चना और उपवास के साथ मनाया जाता है और इस पर्व का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है कन्या पूजन। नवरात्रि के अंतिम दिन, यानी अष्टमी और नवमी तिथि को विशेष रूप से कन्याओं को भोजन कराया जाता है। जिससे घर में सुख-समृद्धि और मां दुर्गा का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस वर्ष 5 और 6 अप्रैल को कन्या पूजन का आयोजन किया जाएगा और इन दोनों दिन विशेष पूजा का महत्व है।
कन्या पूजन की विधि और महत्व
कन्या पूजन नवरात्रि के अंतिम दिनों में किया जाता है। जिसके अंतर्गत कन्याओं को भोजन कराया जाता है। यह न केवल एक धार्मिक कर्तव्य है बल्कि एक शुभ कार्य भी माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार कन्याओं को भोजन कराने से घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है और मां दुर्गा का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
इस वर्ष 5 और 6 अप्रैल को कन्या पूजन किया जाएगा। कुछ लोग अष्टमी के दिन कन्या पूजन करते हैं, जबकि कुछ नवमी तिथि को इस पूजा को करते हैं। जो लोग अष्टमी के दिन कन्या पूजन करेंगे। वे 5 अप्रैल को यह कार्य करेंगे। जबकि जो लोग नवमी तिथि के दिन पूजा करेंगे। वे 6 अप्रैल को कन्या पूजन का आयोजन करेंगे।
कन्याओं की संख्या
कन्या पूजन में कितनी कन्याओं को भोजन कराना चाहिए, यह एक सामान्य प्रश्न है। शास्त्रों के अनुसार नवरात्रि के पहले दिन से लेकर आखिरी दिन तक आप कन्याओं को भोजन करा सकते हैं। हालांकि, विशेष रूप से अष्टमी या नवमी तिथि को आप 9 कन्याओं को भोजन करा सकते हैं, जो मां दुर्गा के 9 रूपों का प्रतीक मानी जाती हैं। अगर 9 कन्याएं उपलब्ध नहीं हो पातीं तो आप 3, 5 या 7 कन्याओं को भी भोजन करा सकते हैं। इसके साथ ही एक लड़के को भी कन्याओं के साथ बैठाकर भोजन कराया जाता है। जिसे बटुक भैरव कहा जाता है।
कन्याओं की उम्र
कन्या पूजन के लिए शास्त्रों में विशेष रूप से 2 से 10 वर्ष तक की कन्याओं को भोजन कराना कहा गया है। ऐसी कन्याएं शुद्ध और पवित्र मानी जाती हैं और इनका पूजन करने से व्यक्ति के सभी दोष समाप्त होते हैं और उसे धन, धान्य, सुख और समृद्धि की प्राप्ति होती है।
कन्या पूजन का शुभ मुहूर्त
नवरात्रि के दौरान कन्या पूजन का सही समय और मुहूर्त का पालन करना बेहद महत्वपूर्ण होता है। इस बार अष्टमी तिथि 4 अप्रैल की रात 8 बजकर 13 मिनट से शुरू होगी और 5 अप्रैल को शाम 7 बजकर 27 मिनट तक रहेगी। इस समय में विशेष रूप से 5 अप्रैल को अष्टमी पूजन का आयोजन किया जाएगा।
5 अप्रैल को शुभ चौघड़िया का समय कन्या पूजन के लिए अत्यंत शुभ रहेगा। यह समय सुबह 7 बजकर 40 मिनट से लेकर 9 बजकर 15 मिनट तक है। यदि इस समय में आप पूजन नहीं कर सकते, तो लाभ चौघड़िया में 1 बजकर 58 मिनट से 3 बजकर 32 मिनट तक भी कन्या पूजन कर सकते हैं।
नवमी तिथि का आरंभ 5 अप्रैल को शाम 7 बजकर 28 मिनट से होगा और यह 6 अप्रैल को शाम 7 बजकर 24 मिनट तक रहेगी। इस दिन, 6 अप्रैल को कन्या पूजन के लिए शुभ मुहूर्त होगा। लाभ चौघड़िया 7 बजकर 40 मिनट से 9 बजकर 14 मिनट तक रहेगा, जबकि अमृत चौघड़िया का समय 10 बजकर 49 मिनट से 12 बजकर 23 मिनट तक रहेगा।
Published : 5 April 2025, 1:45 PM IST
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