महराजगंज LIVE: बिना लिखित नोटिस, बिना मुआवज़े के बुलडोज़र ने मचायी तबाही, हाइवे के नाम पर क़हर, ग़रीबों की नहीं है कोई सुनवाई

डीएन ब्यूरो

महराजगंज नगर में बाईपास बनाने के केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी और डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के ऐलान को दरकिनार कर नगर के बीचो-बीच से लोगों के घर, दुकान सब जबरन उजाड़े जा रहे हैं। पर इस बीच उन लोगों का क्या.. जिन्होनें अपनी पूरी जिंदगी की जमा-पूंजी अपना घर बनाने में लगा दी और अब खुद की नजरों के सामने उसे उजड़ता हुआ देख रहे हैं। बिना किसी लिखित नोटिस, बिना मुआवजे के घर-दुकान को तोड़ा जा रहा है। हाईवे के नाम पर अंधेररगर्दी के बीच गरीबों की कोई सुनवाई नही है। पढ़ें डाइनामाइट न्यूज़ पर पूरी खबर..


महराजगंज: भले आप सौ साल से अपने नंबर की जमीन पर काबिज हों, कोई फर्क नहीं पड़ता, कोई नियम-कानून नहीं.. मनमानी करने वाले ठेकेदार निर्माण के बारे में आपको नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए आपको कोई जानकारी नहीं देंगे.. न तो जिला प्रशासन के बड़े अफसर ठेकेदार से पूछेंगे कि कहां है तुम्हारा डिस्पले बोर्ड.. क्यों नहीं लगाया यदि झूठ बोल रहे हो कि लगा दिया तो फिर आम जनता को दिखायी क्यों नहीं देता?

नगर में हाईवे निर्माण के नाम पर बिना किसी लिखित नोटिस के, बिना किसी मुआवजे के लोगों को उजाड़ा जा रहा है। भाजपा राज में लोग वोट देकर पछता रहे हैं। नेता हैं तो मस्त कि हमें क्या फर्क पड़ता है, अभी कोई वोट थोड़े ही लेना है? और लेना भी होगा तो जनता तब तक सब भूल जायेगी.. बड़े अफसर हैं जिनकी कानूनन जिम्मेदारी है.. कि वे नियमों का पालन करायें और यदि किसी की नंबर की जमीन ली जा रही है तो फिर वे अधिग्रहण व मुआवजे के बाद ही तोड़फोड़ करें लेकिन कोई भी अफसर न तो हाईकोर्ट से डर रहा है और न ही सुप्रीम कोर्ट से।

सब आंख मूंदे ठेकेदार की अंधेरगर्दी को मानो मौन समर्थन दिये हुए हैं, नंबर की जमीनों को अतिक्रमण बता जबरन बुलडोजर के तले कुचल दिया जा रहा है। अगर किसी ने इस अंधेरगर्दी और प्रशासनिक अत्याचार से आजिज आकर उल्टा-सीधा कदम उठाया तो फिर जिले के अफसर मुख्यमंत्री को जवाब देंगे।

पुलिसिया फोर्स की छावनी के बीच लोगों को दहशत के साये में जीने को मजबूर कर दिया गया है। दहशत इस कदर मचायी गयी है कि अगर किसी ने मुंह खोला तो मानो उसे लील लिया जायेगा। 

बुधवार और गुरुवार को लोग अपने नजरों के सामने अपने घरों को उजड़ता देख रहे हैं। 100 सालों से संजोकर रखे अपने घरों और जमा-पूंजी को लोग किस तरह उजड़ता देख रहे हैं, उससे किसी को कोई मतलब नहीं है। ना ही सरकार को ना ही अपनी मनमानी करने वाले ठेकेदार और इंजीनियर को।

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अपनी जमा-पूंजी को लूटता देख लोग सरकार को कोसे जा रहे हैं। पर नेताओं को जैसे इस बात से कोई फर्क ही नहीं पड़ता है। पड़ेगा भी क्यों, क्योंकि नेताओं को भी जनता की याद तभी आती है, जब चुनाव आता है। चुनाव के समय भले ही गरीबों के लिए बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं। पर चुनाव के बाद नेता और उनके वादे ना जानें कहां गायब हो जाते हैं। अब कहां गए वो नेताओं जब गरीबों के घर बर्बाद हो रहे हैं, जब गरीबों की कहीं सुनवाई नहीं हो रही है। 

तीन दिन पहले लाउडस्पीकर से मुनादी करके ऐलान कर दिया गया कि जिलाधिकारी के आदेश पर आप लोग अपने-अपने मकान-दुकान को पांच सितंबर तक खुद हटा लें न ही तो खुद उजाड़ दिया जायेगा। बीच सड़क से दोनों तरफ सोलह-सोलह मीटर तोड़े जाने का ऐलान होने के बाद हजारों प्रभावित लोग दहशत के साये में जीने को मजबूर हैं। 

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देखना दिलचस्प होगा कि जिले में बुलडोजर के सहारे मचायी जा रही यह तबाही आगे कहां जाकर रुकती है और इसका क्या अंजाम होता है?

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