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नई दिल्ली: अतीक अहमद के कांड पर डाइनामाइट न्यूज़ की एक के बाद एक ताबड़तोड़ खबरों के बाद हरकत में आय़ा शासन.. इस बाहुबली को अब देवरिया जिला जेल से हटाने जा रहा है लेकिन सबसे बड़ा सवाल ये है कि अब तक इसे बचाता कौन रहा है? कौन है इसका राजनीतिक आका.. जिसके दम पर ये जमकर उछल-कूद मचाता रहा है।
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डाइनामाइट न्यूज़ को लखनऊ के उच्च पदस्थ सूत्रों ने बताया कि ये तो महज बानगियां भर हैं जो सामने आय़ी हैं अतीक ने ऐसे-ऐसे कांड किये हैं जो सामने ही नही आ पाये हैं।
अंदर की खबर के मुताबिक बीते 14 अगस्त को उच्च स्तर पर हुई कागजी लिखा पढ़ी में इसे देवरिया जिला जेल से हटाने की प्रबल संस्तुति की गयी। डाइनामाइट न्यूज़ के पास मौजूद दस्तावेजों के मुताबिक इसे यहां से हटा आगरा, बाराबंकी, बरेली, गोरखपुर या फिर उन्नाव में से किसी एक जेल में शिफ्ट करने की बात की गयी लेकिन जब उच्च स्तर पर बैठक हुई तो शासन ने यह कहकर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया कि ‘वर्तमान में इसके जेल बदले बदले जाने का कोई औचित्य नही है, जेल मैनुअल के मुताबिक ही इसकी गतिविधियों पर निगरानी रखी जाये।’
फिर घटना घटी 22 नवंबर की जिसमें अतीक ने रंगदारी के लिए इलाहाबाद से टंगवाकर तीन लोगों उमैश अहमद, जैद खालिद और अभिषेक पांडेय को अपने बैरक के अंदर बुलाया औऱ फिर जमकर तुड़ाई करवायी। तुड़ाई इतनी करारी थी कि ये तीनों लंबे समय तक हास्पीटलाइज रहे।

इस मामले में भी लिखा-पढ़ी हुई और दस्तावेजों के मुताबिक कड़ी कार्रवाई की बात हुई लेकिन फिर अदृश्य ताकतों के हस्तक्षेप से नतीजा सिफर।
अब मोहित जायसवाल कांड के बाद हो रही फजीहत से बचने के लिए शासन आज उसकी जेल बदलने वाला है। बेहद भरोसेमंद सूत्रों ने डाइनामाइट न्यूज़ को अंदर की खबर दी है कि अतीक को जिला कारागार बरेली और केन्द्रीय जेल आगरा में से किसी एक जगह शिफ्ट किया जायेगा। इस पर आज हाई-लेवल की मीटिंग होगी जिसमें इस पर मुहर लग जायेगी।
सबसे बड़ा सवाल यहां पर यह है कि जब जिम्मेदारों ने 14 अगस्त को ही लिखा-पढ़ी में इसकी जेल बदलने की सिफारिश कर दी थी तो इसे क्यों माना नही गया? यह अपने आप में एक बड़ी जांच का विषय है तभी इस रहस्य से पर्दा उठ पायेगा कि अतीक के असली संरक्षणदाता हैं कौन?
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अब बात देवरिया जिला जेल के अधीक्षक की.. अंदर की खबर के मुताबिक इसे चार्जशीट दी जा रही है और इसके तबादले की संस्तुति शासन को करने की तैयारी की जा रही है।
डाइनामाइट न्यूज़ की पड़ताल में एक और तथ्य सामने आय़ा है कि जेल के कर्मियों का मनोबल इन अपराधियों के आतंक के आगे टूटा हुआ है। तीन दिन पहले ही प्रतापगढ़ में जेल के एक सिपाही की हत्या कर दी जाती है। बाइक सवार बदमाशों ने जिला कारागार में तैनात सिपाही हरिनारायण त्रिवेदी की गोली मार कर हत्या कर दी। इस हत्याकांड के पीछे 15 दिन पहले जेल में बंदियों के साथ हुए विवाद को वजह बताया जा रहा है। ऐसे में सवाल ये उठता है कि गुंडों से जेल में सामान्य सिपाही कड़ाई करे तो कैसे करे.. क्या इसका कोई मुकम्मल इंतजाम सरकार के पास है?
Published : 31 December 2018, 10:01 AM IST
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