जानिये क्या है उत्तराखंड का एनएच-74 घोटाला?

सुभाष रतूड़ी

उत्तराखंड के सीएम ने तीन सौ करोड़ के एनएच-74 घोटाले में दो आईएएस अफसरों को निलंबित करने का फरमान क्या सुनाया.. देश भर की ब्यूरोक्रेसी में हलचल मच गयी। डाइनामाइट न्यूज़ की इस एक्सक्लूसिव खबर में पढ़िये.. आखिर क्या है यह घोटाला, कब और कैसे अंजाम दिया गया इस घोटाले को..

फाइल फोटो
फाइल फोटो

देहरादून: उत्तराखंड के कुमाऊं मंडल में पिछली सरकार के कार्यकाल में नेशनल हाईवे-74 के निर्माण के लिये भूमि अधिग्रहण में 300 करोड़ के घोटाले में राज्य के मौजूदा मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने दो आईएएस अफसरों को निलंबित कर दिया है। इस घोटाले में अब तक कई अफसर फंस चुके हैं। 

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क्या है एनएच-74 घोटाला

यह घोटाला उत्तराखंड के ऊधमसिंह नगर जिले से जुड़ा हुआ है। जहां नेशनल हाईवे संख्या-74 के निर्माण में भूमि मुआवजा में घोटाला किया गया। किसानों के नाम पर गलत तरीके से कई गुना अधिक मुआवजा दिया गया। एनएच-74 भूमि मुआवजा घोटाले में कृषि योग्य भूमि को अकृषि भूमि में दर्शाकर जसपुर, काशीपुर, सितारगंज और बाजपुर के दर्जनों किसानों ने दस से लेकर बीस गुना तक अधिक मुआवजा ले लिया था। इस मामले में अफसरों ने बड़ी लापरवाही की और सब कुछ जानते हुए भी अनभिज्ञ बने रहे। राष्ट्रीय राजमार्ग-74 उत्तर प्रदेश के बरेली शहर के पास स्थित नगीना से शुरू होकर उत्तराखंड के काशीपुर इलाके में ख़त्म होता है। 

एसआईटी का गठन और जांच

गलत तरीके से किसानों को मुआवजा देने के मामले को लापरवाह अफसर लंबे समय तक मामले को छुपाते रहे। घोटाले की जांच के लिये एसआईटी का गठन किया गया। जांच के बाद एसआईटी ने ऐसे कई आरोपी किसानों की गिरफ्तारी के लिए कोर्ट से गैर जमानती वारंट भी प्राप्त किया। किसानो से पूछताछ और जांच में इस घोटाले का दायरे बढ़ता गया, जो 300 करोड़ तक पहुंचा।
 

कहां से गुजरता है एनएच-74

राष्ट्रीय राजमार्ग-74 कुल 333 किलोमीटर लंबा है। यह राजमार्ग उत्तर प्रदेश के बरेली जिले से शुरू होता है। बरेली के समीप स्थित नगीना से शुरू होकर यह मार्ग उत्तराखंड का काशीपुर क्षेत्र में खत्म होता है। काशीपुर उत्तराखंड के कुमांऊ मंडल में उधमसिंह नगर जिले में पड़ता है। 

घोटाले की कहानी

उत्तराखंड की पूर्ववर्ती हरीश रावत के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में उधमसिंह नगर ज़िले में पड़ने वाले एनएच-74 के  चौड़ीकरण के लिए किसानों से भूमि अधिग्रहण की गयी। मुआवजे की राशि को बढ़ाने के लिये भू-उपयोग बदला गया। कृषि भूमि को अकृषि भूमि भी दर्शाया गया, ताकि सरकार आसानी से जमीन अधिगृहण कर सके। इस घाटले की शुरूआत यहां से हुई। दरअसल किसानों को भूमि अधिग्रहण के एवज में दिये गये मुआवजे में 300 करोड़ रुपये का कथित घोटाला किया गया।

बदला गया लैंड यूज

भू-उपयोग बदलने समेत किसानों को वास्तविकता से ज्यादा मुआवजा देने के काम में सरकारी अफसरों की बड़ी लापरवाही सामने आई। इसमे उत्तराखंड के अधिकारियों के अलावा केंद्र के एनएचएआई अधिकारियों ने भी कथित तौर बड़ी लापरवाही की। 

20 अधिकारियों पर गिर चुकी है गाज 

इस कथित घोटाले को उजागर करने वाली जांच रिपोर्ट पर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने मार्च में पद संभालते ही संज्ञान लिया और कई उप-जिलाधिकारी स्तर के अधिकारियों को निलंबित कर दिया था। इस घोटाले में अब तक 20 अफसर फंस चुके है, जिनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। कुछ को जेल भी भेजा गया। 

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