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नयी दिल्ली: एक अंतरराष्ट्रीय अनुसंधान संघ ने कोविड-19 के 28 नए जोखिम कारकों की खोज की है, जिसके साथ ही ऐसे जोखिम कारकों की कुल संख्या बढ़कर 51 हो गई है।
शोधकर्ताओं ने कहा कि कई मानदंड यह निर्धारित करते हैं कि हम कोविड-19 से गंभीर रूप से बीमार होंगे या नहीं। उनमें हमारी उम्र और किसी भी पिछली या मौजूदा स्थिति के अलावा आनुवंशिक कारक भी शामिल हैं।
डाइनामाइट न्यूज़ संवाददाता के अनुसार बॉन यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल, जर्मनी के केर्स्टिन लुडविग ने कहा, 'आनुवांशिक जोखिम कारकों के बारे में जानने से वैज्ञानिकों को कारगर दवाएं विकसित करने और जोखिमों का बेहतर अनुमान लगाने में मदद मिलती है।'
हालांकि, इस प्रकार के जीन की पहचान करने के लिए, शोधकर्ताओं को रोगियों के विशाल समूहों की आवश्यकता होती है, जो शायद ही कभी एक ही समय में एक ही स्थान पर मिलें।
यही कारण है कि महामारी की शुरुआत में ‘‘कोविड-19 होस्ट जेनेटिक्स इनिशिएटिव’’ (कोविड-19 एचजीआई) को बड़े पैमाने पर अंतरराष्ट्रीय परियोजना के रूप में शुरू किया गया था। इसका उद्देश्य दुनिया भर में किए जा रहे व्यक्तिगत अध्ययनों से डेटा एकत्र करना और सभी की एक साथ पड़ताल करना है।
कोविड-19 एचजीआई 82 व्यक्तिगत अध्ययनों पर आधारित है और इसके नए निष्कर्ष ‘नेचर’ पत्रिका में प्रकाशित किए गए हैं। अध्ययन में दुनिया भर के कुल 3,669 लेखकों के योगदान को शामिल किया गया है।
इस समूह का सह-नेतृत्व अमेरिका में ब्रॉड इंस्टीट्यूट और इंस्टीट्यूट फॉर मॉलिक्यूलर मेडिसिन फिनलैंड (एफआईएमएम) द्वारा किया जा रहा है।
डेटा विश्लेषण के लिए जिम्मेदार एक्सल श्मिट ने कहा, 'समूह ने कुल मिलाकर 51 जोखिम कारकों की सफलतापूर्वक पहचान की है, जिनमें से 28 नए हैं, जिनका पता पिछले प्रकाशन के बाद चला है।'
Published : 12 September 2023, 6:32 PM IST
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