KIIT की मृत छात्रा के पिता ने क्यों दिया ‘रोटी-बेटी के रिश्ते’ का हवाला; न्याय के लिए कही ये बड़ी बात

डीएन ब्यूरो

नेपाली छात्रा प्रकृति लम्साल की मौत के बाद बवाल मचा हुआ है। छात्रा के मौत के बाद उनके परिवार ने भारत से न्याय की मांग की है। पढ़ें डाइनामाइट न्यूज़ की रिपोर्ट

'प्रकृति लम्साल' के लिए न्याय की मांग
'प्रकृति लम्साल' के लिए न्याय की मांग


ओडिशा: भुवनेश्वर के कलिंग इंस्टीट्यूट ऑफ इंडस्ट्रियल टेक्नोलॉजी (KIIT) में पढ़ने वाली नेपाली छात्रा प्रकृति लम्साल के मौत के बाद से बवाल मचा हुआ है। प्रकृति B.Tech तृतीय वर्ष की छात्रा थी, जो 16 फरवरी को KIIT के हॅास्टल में मृत पाई गई थी। जहां एक तरफ KIIT में छात्र विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर काठमांडू में भी छात्र समुदाय सरकारी दफ्तरों और PMO के बाहर प्रदर्शन कर रह रहे हैं। छात्रा के पिता और नेपाली अधिकारियों ने न्याय और निष्पक्ष जांच की मांग की है। 

मृतिका के पिता ने भारत पर जताया भरोसा 

प्रकृति लम्साल की मौत के बाद उनके पिता सुनील लम्साल भी जवाब ढूंढ रहे हैं। उन्हें विश्वास है कि भारत उनकी बेटी को न्याय दिलाएगा।

रोटी-बेटी का रिश्ता

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बुधवार को काठमांडू से फोन पर मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि रामायण के समय से ही, दोनों देशों के बीच रोटी-बेटी का रिश्ता रहा है। उन्होंने आगे कहा कि मैं पूरी जांच के दौरान ओडिशा में नहीं रह सकता, लेकिन मुझे पूरा भरोसा है कि भारत सरकार जरूरी कदम उठाएगी।

पिता ने बेटी प्रकृति लम्साल के लिए कही ये बात 

प्रकृति लम्साल कंप्यूटर साइंस, इंजीनियरिंग की तीसरे वर्ष की छात्रा थी। वह भारत में अपना भविष्य बनाने के लिए गोरखपुर में भारतीय सीमा से 5 किमी दूर भैरहवा स्थित अपने घर से आई थीं। वह अपने परिवार से कहा था कि वह एक इंजीनियर बनकर वापस आएगी।

पिता सुनील लम्साल ने बताया कि प्रकृति हमेशा से शांत और थोड़ी संकोची स्वभाव की थी। लेकिन KIIT में, उसने दो बार अपनी आवाज उठाई। उसने एक साथी छात्र के खिलाफ उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए दो शिकायतें दर्ज कराई थीं। लम्साल ने कहा कि कोई कार्रवाई नहीं की गई। एक सख्त कार्रवाई उसकी जान बचा सकती थी।

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छात्रावास में पसरा सन्नाटा

प्रकृति लम्साल के मौत के बाद से पूरे छात्रावास में सन्नाटा पसरा हुआ है। प्रकृति के हॉस्टल का कमरा खाली कर दिया गया है। इसका दरवाजा, गलियारे में लगे अन्य कमरों से अलग नहीं है, लेकिन बंद है। फिर भी, इन दीवारों के पार, प्रकृति लम्साल का नाम गूंजता है। उसका परिवार अब इंसाफ की आस में है। वे चाहते हैं कि दोषियों को सजा मिले और ऐसी घटनाएं फिर कभी न हों। 










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