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बेंगलुरु: यहां एक सामाजिक कार्यकर्ता के पास से जब्त चावल की बोरियों को छोड़ने का आदेश देते हुए कर्नाटक उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि सिर्फ चुनाव की घोषणा के बाद ही निर्वाचन अधिकारियों को किसी सामग्री की तलाशी और उसे जब्त करने का अधिकार है।
डाइनामाइट न्यूज़ संवाददाता के मुताबिक न्यायमूर्ति एम. नागाप्रसन्ना ने इस्तियाक अहमद की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान अपने हालिया फैसले में कहा कि चुनाव की घोषणा के पूर्व किसी सामग्री की तलाशी या उसे जब्त करना निर्वाचन अधिकारी/अधिकारियों के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता है।
अदालत ने कहा कि सिर्फ इसलिए कि उन्हें चुनाव आयोजित करने के लिए अधिकारी के तौर पर नियुक्त किया गया है, वे चुनाव की घोषणा से पूर्व उक्त अधिकार का इस्तेमाल नहीं कर सकते।
अदालत ने कहा, ‘‘चुनाव की घोषणा के बाद उनके लिए सारे रास्ते खुल जाएंगे, लेकिन उससे पहले नहीं। सामान्य परिस्थितियों में प्राधिकरण/अधिकारी आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत जब्ती की कार्रवाई कर सकते हैं। वर्तमान मामले में तलाशी लेने वाले निर्वाचन अधिकारी और पुलिस निरीक्षक के पास इस तरह का अधिकार नहीं था और इसलिए उनकी कार्रवाई अवैध है।’’
शिवाजीनगर के निर्वाचन अधिकारी ने 19 मार्च, 2023 को अहमद के आवास से 25 किलोग्राम वजन के 530 बोरे चावल जब्त किए थे, जिसके बाद अहमद ने उच्च न्यायालय का रुख किया।
रिटर्निंग ऑफिसर के नोटिस का जवाब देने के बावजूद चावल की बोरियां वापस नहीं की गईं। उसने दावा किया कि वह एक सामाजिक कार्यकर्ता है, जो त्योहारों के दौरान जरूरतमंदों को चावल वितरित करता है और जो चावल जब्त किए गए वे उसी मद में रखे गए थे।
अहमद को क्षतिपूर्ति बांड भरने को कहा गया था कि उसने चुनाव के दौरान चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन नहीं किया।
Published : 11 April 2023, 3:45 PM IST
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