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नयी दिल्ली: देश की आर्थिक प्रगति से केवल अमीरों को लाभ मिलने का दावा करते हुए तृणमूल कांग्रेस के नेता डेरेक ओब्रायन ने मंगलवार को कहा कि विकास ‘बांटने वाला नहीं सर्व समावेशी होना चाहिए’ तथा केंद्र सरकार को 60-70 साल पुरानी बातों की चर्चा करने के बजाय वर्तमान समस्याओं के समाधान पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
‘‘देश में आर्थिक स्थिति’’ पर राज्यसभा में अल्पकालिक चर्चा में भाग लेते हुए तृणमूल कांग्रेस सदस्य ओब्रायन ने कहा कि चुनाव आते और जाते रहते हैं, कोई जीतता है और कोई हारता है किंतु अंतत: जीत संसदीय लोकतंत्र के अलावा लोगों की होती है। अर्थव्यवस्था की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि यह निर्भर करता है कि आप अर्थव्यवस्था को किस निगाह से देखते हैं?
उन्होंने कहा कि यदि आप शेयर बाजार की दृष्टि से, किसी अरबपति की दृष्टि से देखते हैं तो अर्थव्यवस्था बहुत अच्छी है। उन्होंने कहा, ‘‘हम अरबपतियों के खिलाफ नहीं हैं। भारत में तीन साल पहले तक अरबपतियों की संख्या 142 थी जो अब बढ़कर 169 हो गयी है।’’
डेरेक ने कहा कि यदि आप देश के एक प्रतिशत अमीर लोगों की दृष्टि से अर्थव्यवस्था को देखते हैं, जिनके पास देश की संपदा का 40 प्रतिशत है, तो स्थिति काफी अच्छी है। उन्होंने कहा कि यदि वित्त मंत्री की दृष्टि से देखें तो अर्थव्यवस्था की स्थिति अच्छी है क्योंकि सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की दर (चालू वित्त वर्ष की) दूसरी तिमाही में 7.6 प्रतिशत रही।
तृणमूल नेता ने कहा कि लेकिन यदि देश के किसी भी परिवार की दृष्टि से देखेंगे तो पायेंगे कि 2014 से लेकर 2023 के बीच चावल के दाम में 56 प्रतिशत की वद्धि हुई, गेहूं में 59 प्रतिशत, दूध में 61 प्रतिशत, टमाटर में 115 प्रतिशत, तूर (अरहर) दाल में 120 प्रतिशत वृद्धि हुई।
उन्होंने पश्चिम बंगाल में मनरेगा कामगारों को उनका पारिश्रमिक दो वर्ष से नहीं मिलने की ओर सदन का ध्यान दिलाया, जबकि उन्हें 15 दिन के भीतर भुगतान मिलने की गारंटी दी गयी थी। उन्होंने कहा कि इसके कारण केवल एक राज्य (पश्चिम बंगाल) का बकाया 15,000 करोड़ रूपये हो गया है और यदि इसमें अन्य राज्यों का बकाया जोड़ दिया जाए तो यह राशि और बढ़ जाएगी।
डेरेक ने कहा कि यदि आप युवक और युवतियों की दृष्टि से अर्थव्यवस्था को देखे तो 25 प्रतिशत युवाओं को बेरोजगार पाएंगे। उन्होंने सरकार से प्रश्न किया कि जो संपदा सृजित हुई है क्या उसका वितरण समान रूप से और न्यायोचित रूप से हो पाया है? उन्होंने कहा कि क्या यह लाभ ‘पिरामिड’ के निचले स्तर तक पहुंच पाया है?
उन्होंने दावा किया कि पिछले छह साल में पहली बार ग्रामीण मुद्रास्फीति की दर शहरी महंगाई दर से अधिक हो गयी है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2022-23 में घरेलू बचत 50 साल के निम्नतम स्तर पर पहुंच गयी है। उन्होंने कहा, ‘‘हमें अपने से यह प्रश्न पूछना चाहिए कि हर दिन हमारे 150 किसान आत्महत्या क्यों कर रहे हैं?’’
डेरेक ने कहा कि भले ही शेयर बाजार और अरबपतियों की स्थिति बेहतर होती रहे किंतु समाज में हाशिये पर रहने वाले और कमजोर वर्गों के लिए अवश्य सोचा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत में 23 करोड़ गरीब लोग हैं जो दुनिया में सबसे अधिक गरीब आबादी है। उन्होंने कहा कि देश की 50 प्रतिशत आबादी के पास देश की कुल तीन प्रतिशत संपदा है। उन्होंने कहा, ‘‘हमें अपने को इस बात का स्मरण भी दिलाना चाहिए कि क्यों प्रत्येक चार में से तीन भारतीय संतुलित भोजन वहन नहीं कर पा रहा है...पांच वर्ष की आयु के तीन में से दो बच्चे भूख से क्यों मर जाते हैं?’’
उन्होंने कहा कि यह समय 60 साल पहले या 70 वर्ष पहले क्या हुआ, इसके बारे में चर्चा करने का नहीं है बल्कि सरकार को चाहिए कि वह वर्तमान समस्याओं के समाधान निकालने के लिए काम करे।
डेरेक ने केंद्र और पश्चिम बंगाल के आर्थिक विकास की तुलना करते हुए कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था की विकास दर वर्तमान वित्त वर्ष में सात प्रतिशत रहने का अनुमान व्यक्त किया गया है, जबकि बंगाल चालू वर्ष में 8.4 प्रतिशत से विकास कर रहा है।
उन्होंने दावा कि बंगाल में यह जो विकास हो रहा है ‘यह बांटने वाला विकास न होकर समावेशी विकास है।’
डाइनामाइट न्यूज़ संवादाता के अनुसार इस पर डेरेक को बीच में टोकते हुए सभापति जगदीप धनखड़ ने कहा, ‘‘यह इस कारण हुआ कि आपके पास तीन वर्ष तक एक अच्छा राज्यपाल था।’’ सभापति का संकेत उनके उपराष्ट्रपति बनने से पहले तीन वर्ष तक पश्चिम बंगाल के राज्यपाल रहने की ओर था।
धनखड़ की इस टिप्पणी पर पूरे सदन के साथ साथ डेरेक भी अपनी हंसी नहीं रोक पाए। डेरेक ने मुस्कुराते हुए कहा, ‘‘मैं इस बात की पुष्टि कर सकता हूं कि यही वह कारण था जिसके चलते यह सब हो पाया।
Published : 5 December 2023, 4:17 PM IST
Topics : development divisive inclusive Trinamool Congress आर्थिक प्रगति डेरेक ओब्रायन तृणमूल कांग्रेस विकास समावेशी
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