दिल्ली में कांग्रेस और AAP के बीच गठबंधन पर पूर्व सीएम शीला दीक्षित का बड़ा बयान..

डीएन ब्यूरो

आम चुनाव में एकजुट होकर विपक्ष के चुनाव लड़ने को मंगलवार को उस समय बड़ा झटका लगा जब दिल्ली कांग्रेस ने आम आदमी पार्टी (आप) के साथ गठबंधन करने से साफ इन्कार करते हुए अकेले मैदान में उतरने का ऐलान किया। डाइनामाइट न्यूज़ की रिपोर्ट..

शीला दीक्षित
शीला दीक्षित

नई दिल्ली: आम चुनाव में एकजुट होकर विपक्ष के चुनाव लड़ने को मंगलवार को उस समय बड़ा झटका लगा जब दिल्ली कांग्रेस ने आम आदमी पार्टी (आप) के साथ गठबंधन करने से साफ इन्कार करते हुए अकेले मैदान में उतरने का एलान किया।

यह भी पढ़ें: महराजगंज: टीकाकरण को लेकर डीएम से असंतुष्ट दिखे सीएम.. भरे मंच पर पूछा आज क्यों नही हुआ टीकाकरण?

दिल्ली कांग्रेस की अध्यक्ष और तीन बार मुख्यमंत्री रही शीला दीक्षित ने यह एलान करते हुए कहा कि पार्टी के नेताओं की एक राय है कि पार्टी को अकेले चुनाव लड़ना चाहिए और आप के साथ कोई गठबंधन नहीं होगा।

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की दिल्ली के पार्टी नेताओं के साथ करीब दो घंटे चली बैठक के बाद शीला दीक्षित ने यह घोषणा की। पूर्व मुख्यमंत्री दिल्ली कांग्रेस का अध्यक्ष पद संभालने के बाद से ही किसी पार्टी के साथ गठबंधन के लिए तैयार नहीं थीं।

यह भी पढ़ें: यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ ने महराजगंज ज़िले के चौक बाज़ार का किया दौरा, कई योजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास

अरविंद केजरीवाल की अगुवाई वाली आप दिल्ली की सात लोकसभा सीटों में से छह पर शनिवार को उम्मीदवार घोषित कर चुकी है। इसके बावजूद पार्टी ने कहा था कि कांग्रेस की तरफ से कोई प्रस्ताव आने पर विचार किया जायेगा।

वर्ष 2014 के आम चुनाव में दिल्ली की सभी सातों सीटों पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) विजयी हुई थी जबकि इससे पहले 2009 में सभी पर कांग्रेस काबिज थी। वर्ष 2015 के दिल्ली विधान

सभा चुनाव में कांग्रेस का पूरी तरह सूपड़ा साफ हो गया था और आप ने 70 में से 67 सीटों पर विजयी हुई थी। 

पिछले काफी दिनों से ऐसी अटकलें लगाई जा रही थीं कि दिल्ली की सात सीटों में से कांग्रेस और आप तीन-तीन सीटों पर तथा एक सीट पर निर्दलीय को लड़ाया जा सकता है।

यह भी पढ़ें: महराजगंज: टीकाकरण को लेकर डीएम से असंतुष्ट दिखे सीएम.. भरे मंच पर पूछा आज क्यों नही हुआ टीकाकरण?

वर्ष 2013 के दिल्ली विधानसभा के चुनाव में पहली बार उतरी आप ने 70 में से 29 सीटों पर विजय प्राप्त की थी और कांग्रेस के आठ विधायकों के सहयोग से केजरीवाल ने सरकार बनाई थी। दोनों के बीच यह सहयोग अधिक दिन नहीं चला और मात्र 49 दिन बाद केजरीवाल ने इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद हुए विधानसभा चुनाव में आप की रिकार्ड तोड़ जीत ने सभी को चौंका दिया था।
(वार्ता) 

(डाइनामाइट न्यूज़ के ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)











आपकी राय

Loading Poll …