हिंदी
प्रयागराजः सोमवार को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) प्रदर्शन के दौरान हिंसा के आरोपियों का पोस्टर हटाने का आदेश दिया है। बता दें कि लखनऊ के अलग-अलग चौराहों पर 57 कथित प्रदर्शनकारियों के पोस्टर लगाए गए थे।
साथ ही यूपी सरकार पर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा है कि कथित नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) विरोधी प्रदर्शनकारियों के पोस्टर लगाने की कार्रवाई बेहद अन्यायपूर्ण है। यह संबंधित लोगों की आजादी का हनन है। ऐसा कोई कार्य नहीं किया जाना चाहिए, जिससे किसी के दिल को ठेस पहुंचे।
Allahabad High Court has ordered to remove the hoardings put up by Uttar Pradesh government, with names, addresses and photos of those who were accused of violence during protests against #CitizenshipAmendmentAct
— ANI UP (@ANINewsUP) March 9, 2020
मामले में चीफ जस्टिस गोविंद माथुर ने कहा कि इस तरह बिना किसी की अनुमति के बिना उनका पोस्टर लगाना अपमान करना है। हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश की योगी सरकार को आदेश दिया कि आज दोपहर तीन बजे से पहले ये सारे होर्डिंग्स हटाए जाए और तीन बजे कोर्ट को इसकी जानकारी दी जाए। मालूम हो कि लखनऊ प्रशासन ने शहर के प्रमुख और भीड़-भाड़ वाले स्थानों पर विवादित नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले करीब 60 लोगों के नाम और पते के साथ होर्डिंग्स लगा रखा है। इन पर आरोप है कि पिछले साल 19 दिसंबर को हुए प्रदर्शन के दौरान इन्होंने हिंसा की और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया है।
Published : 9 March 2020, 2:24 PM IST
Topics : Allahabad Court CAA poster UP Government uttar pradesh इलाहाबाद हाई कोर्ट नागरिकता संशोधन कानून यूपी सरकार लखनऊ प्रशासन सीएए