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वास्तु शास्त्र के अनुसार घर की सीढ़ियों की संख्या विषम यानी 9, 15 या 21 होनी चाहिए। सम संख्या या 0 पर खत्म होने वाली सीढ़ियां शुभ नहीं मानी जातीं। जानिए सीढ़ियों से जुड़े महत्वपूर्ण वास्तु नियम और उनके पीछे की मान्यता।
वास्तु के अनुसार सीढ़ियों की संख्या (Img- Internet)
New Delhi: वास्तु शास्त्र में घर के हर हिस्से का अपना विशेष महत्व माना जाता है। जिस तरह मुख्य द्वार, रसोई और पूजा स्थान का सही दिशा में होना जरूरी माना जाता है, उसी तरह सीढ़ियों की संख्या और उनकी बनावट भी घर की ऊर्जा को प्रभावित करती है।
वास्तु के अनुसार यदि सीढ़ियां सही नियमों के अनुसार बनाई जाएं तो घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बना रहता है और परिवार की तरक्की में भी मदद मिलती है।
वास्तु शास्त्र के अनुसार घर की सीढ़ियों की संख्या हमेशा विषम यानी ऑड नंबर में होनी चाहिए। जैसे 9, 11, 15, 17, 21 आदि। विषम संख्या को वास्तु में शुभ और सकारात्मक माना जाता है। इसके विपरीत सम संख्या जैसे 8, 16, 18 आदि को वास्तु में शुभ नहीं माना जाता।
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मान्यता है कि विषम संख्या निरंतर वृद्धि और प्रगति का प्रतीक होती है, इसलिए घर की सीढ़ियों को इसी नियम के अनुसार बनाना बेहतर माना जाता है।
सीढ़ियां बनाते समय सिर्फ उनकी कुल संख्या ही नहीं बल्कि अंतिम स्टेप के अंक का भी ध्यान रखना चाहिए। वास्तु के अनुसार सीढ़ियों की गिनती ऐसी नहीं होनी चाहिए जो 0 पर खत्म हो, जैसे 10, 20 या 30। माना जाता है कि 0 पर समाप्त होने वाली संख्या स्थिरता और रुकावट का संकेत देती है, जो घर की प्रगति के लिए शुभ नहीं मानी जाती।
अगर आपके घर में पहले से बनी सीढ़ियों की संख्या वास्तु के अनुसार नहीं है तो घबराने की जरूरत नहीं है। ऐसे में एक अतिरिक्त स्टेप जोड़कर इसे विषम संख्या में बदला जा सकता है। यह एक आसान उपाय माना जाता है जिससे वास्तु दोष को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
वास्तु शास्त्र के अनुसार विषम संख्या कभी समाप्त नहीं मानी जाती, इसलिए इसे निरंतर प्रगति और विकास का प्रतीक माना जाता है। यही कारण है कि घर में सीढ़ियों की संख्या भी विषम रखने की सलाह दी जाती है। ऐसा करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है और परिवार के सदस्यों की उन्नति और सौभाग्य में वृद्धि होती है।