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श्रीकृष्ण की बाल-लीलाएं (Img- Internet)
New Delhi: प्रभु श्रीहरि के आठवें अवतार भगवान श्रीकृष्ण ने अपना बचपन गोकुल और वृंदावन की पावन गलियों में बिताया था। कान्हा का बचपन न केवल अपनी नटखट और मनमोहक हरकतों के लिए जाना जाता है, बल्कि उनकी हर एक बाल-लीला के पीछे एक गहरा आध्यात्मिक अर्थ और ब्रह्मांडीय संदेश छिपा हुआ है। इन्हीं दिव्य कथाओं में से एक है उनकी सबसे प्रसिद्ध 'माखन चोरी की लीला', जिसे सुनकर आज भी भक्त भावविभोर हो जाते हैं।
बालकृष्ण को माखन अत्यंत प्रिय था। गोपियां उनके डर से माखन को ऊंचे-ऊंचे छींकों (टांगने वाले बर्तनों) पर लटकाकर रखती थीं। लेकिन नटखट कान्हा अपने ग्वाल-बाल सखाओं के साथ मिलकर एक मानव सीढ़ी बनाते और छिपकर माखन चुरा लेते थे। इसी वजह से उन्हें 'माखन चोर' भी कहा गया। ज्योतिषी चंद्रेश शर्मा के अनुसार, कान्हा माखन खुद खाते, सखाओं को खिलाते और बचा हुआ माखन जमीन पर बिखेर देते थे ताकि वहां मौजूद बंदर उसे खा सकें।
धार्मिक मान्यता है कि ये वही वानर थे जिन्होंने त्रेतायुग में 'श्री राम' के रूप में प्रभु की निस्वार्थ सेवा की थी। द्वापरयुग में श्रीकृष्ण ने उनका ऋण चुकाने और उन्हें अपनी दिव्य लीला का सुख देने के लिए ही माखन बिखेरकर उन्हें तृप्त किया था।
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कान्हा की अन्य लीलाएं भी अद्भुत हैं। एक बार आंगन में खेलते हुए कान्हा ने मिट्टी खा ली। माता यशोदा ने जब डांटते हुए उनका मुंह खुलवाया, तो वे हैरान रह गईं। बाल-कृष्ण के छोटे से मुख के भीतर पूरा ब्रह्मांड, ग्रह, नक्षत्र, नदियां और पर्वत दिखाई दे रहे थे। यह इस बात का प्रमाण था कि उनका लाडला स्वयं पूरी सृष्टि का पालनहार है। इसी तरह, एक बार माता यशोदा ने कान्हा को एक भारी ओखली से बांध दिया।
कान्हा ओखली घसीटते हुए आंगन के दो विशाल 'यमलार्जुन' वृक्षों के बीच से निकले। जैसे ही ओखली फंसी और कान्हा ने जोर लगाया, दोनों पेड़ उखड़ गए। उन वृक्षों से कुबेर के शापित पुत्र नलकूबर और मणिग्रीव दिव्य स्वरूप में प्रकट हुए और प्रभु ने उनका उद्धार किया।
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एक अन्य मनमोहक प्रसंग में, गोकुल में एक फल बेचने वाली आई। नन्हे कान्हा अपनी छोटी सी अंजलि में अनाज के दाने लेकर फल खरीदने दौड़े, लेकिन रास्ते में अधिकांश दाने गिर गए। कान्हा का निश्छल भोलापन देखकर फलवाली ने बिना अनाज की परवाह किए अपनी टोकरी के सबसे मीठे फल उन्हें दे दिए।
जब वह घर लौटी, तो उसकी पूरी टोकरी सोने, चांदी और बहुमूल्य रत्नों से भरी हुई थी। यह लीला सिखाती है कि परमात्मा को सच्चे प्रेम से जो कुछ भी अर्पित किया जाता है, वे उसे अनंत गुना करके लौटाते हैं।
Location : New Delhi
Published : 28 May 2026, 12:58 PM IST
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