महाअष्टमी 2026: अष्टमी तिथि पर कंजक पूजन का महत्व, जानिए सही तरीका और भोग

नवरात्रि के आठवें दिन महाअष्टमी का विशेष महत्व होता है। इस दिन मां महागौरी की पूजा के साथ कन्या पूजन किया जाता है। जानिए 2026 में महाअष्टमी का सही समय, पूजा विधि, दिशा और शुभ योग, जिससे आपको पूर्ण फल प्राप्त हो सके।

Post Published By: Asmita Patel
Updated : 26 March 2026, 7:54 AM IST
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New Delhi: नवरात्रि के पावन दिनों के बीच एक ऐसा दिन आता है, जिसे सबसे शक्तिशाली और निर्णायक माना जाता है-महाअष्टमी। लेकिन जरा सी लापरवाही या समय की गलती आपके पूरे पूजन को अधूरा कर सकती है। यही वजह है कि आज का दिन सिर्फ भक्ति का नहीं, बल्कि सावधानी का भी है। मान्यता है कि इस दिन की गई पूजा सीधे मां दुर्गा तक पहुंचती है, लेकिन अगर विधि और समय में चूक हुई, तो पूरा फल नहीं मिलता। ऐसे में हर कोई जानना चाहता है कि आखिर सही समय क्या है, किस दिशा में बैठाना है और कैसे करना है कन्या पूजन, ताकि मां की कृपा पूरी तरह बरसे।

महाअष्टमी का महत्व और तिथि का संयोग

इस बार नवरात्रि की शुरुआत 19 मार्च से हुई थी और आज 26 मार्च को महाअष्टमी मनाई जा रही है। वैदिक पंचांग के अनुसार अष्टमी तिथि 25 मार्च को दोपहर 1 बजकर 50 मिनट से शुरू होकर 26 मार्च को सुबह 11 बजकर 48 मिनट तक रही। उदयातिथि के आधार पर 26 मार्च को ही महाअष्टमी का व्रत और पूजा की जा रही है। इस दिन मां दुर्गा के आठवें स्वरूप मां महागौरी की पूजा का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां महागौरी की आराधना करने से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं और सुख-समृद्धि का मार्ग खुलता है।

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कन्या पूजन का धार्मिक महत्व

महाअष्टमी के दिन कन्या पूजन को बेहद खास माना जाता है। छोटी कन्याओं को मां दुर्गा का स्वरूप माना जाता है और उनकी पूजा करना देवी की आराधना के समान होता है। मान्यता है कि जो भक्त इस दिन कंजक पूजन करता है, उसके घर में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है। कन्याओं को भोजन कराना और उनका आशीर्वाद लेना इस दिन की सबसे महत्वपूर्ण परंपरा मानी जाती है।

कन्या पूजन का शुभ मुहूर्त

अगर समय की बात करें तो आज कन्या पूजन के लिए सुबह 6 बजकर 18 मिनट से 7 बजकर 50 मिनट तक का समय सबसे शुभ माना गया है। इस दौरान किया गया पूजन विशेष फलदायी होता है।

किस दिशा में बैठाएं कन्याएं

कन्या पूजन करते समय दिशा का विशेष ध्यान रखना बेहद जरूरी माना गया है। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार कन्याओं का मुख पूर्व दिशा या उत्तर-पूर्व यानी ईशान कोण की ओर होना चाहिए।

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कन्या पूजन की विधि और भोग

कन्या पूजन के दौरान सबसे पहले घर को साफ-सुथरा रखें और पूजा स्थल को सजाएं। इसके बाद कन्याओं को आदरपूर्वक बैठाएं और उनके चरण धोकर उनका स्वागत करें। इसके बाद उन्हें रोली-चावल का तिलक लगाएं और हाथ जोड़कर उनका आशीर्वाद लें। भोजन में आमतौर पर पूड़ी, चना और हलवा का भोग लगाया जाता है, जिसे बहुत शुभ माना जाता है।

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  • New Delhi

Published : 
  • 26 March 2026, 7:54 AM IST

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